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[1] दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। इसे बाँसरी के साथ गाना है। ऐ रब, मेरी बातें सुन, मेरी आहों पर ध्यान दे!

[2] ऐ मेरे बादशाह, मेरे ख़ुदा, मदद के लिए मेरी चीख़ें सुन, क्यूँकि मैं तुझ ही से दुआ करता हूँ।

[3] ऐ रब, सुब्ह को तू मेरी आवाज़ सुनता है, सुब्ह को मैं तुझे सब कुछ तरतीब से पेश करके जवाब का इन्तिज़ार करने लगता हूँ।

[4] क्यूँकि तू ऐसा ख़ुदा नहीं है जो बेदीनी से ख़ुश हो। जो बुरा है वह तेरे हुज़ूर नहीं ठहर सकता।

[5] मग़रूर तेरे हुज़ूर खड़े नहीं हो सकते, बदकार से तू नफ़रत करता है।

[6] झूट बोलने वालों को तू तबाह करता, ख़ूँख़ार और धोकेबाज़ से रब घिन खाता है।

[7] लेकिन मुझ पर तू ने बड़ी मेहरबानी की है, इस लिए मैं तेरे घर में दाख़िल हो सकता, मैं तेरा ख़ौफ़ मान कर तेरी मुक़द्दस सुकूनतगाह के सामने सिज्दा करता हूँ।

[8] ऐ रब, अपनी रास्त राह पर मेरी राहनुमाई कर ताकि मेरे दुश्मन मुझ पर ग़ालिब न आएँ। अपनी राह को मेरे आगे हमवार कर।

[9] क्यूँकि उन के मुँह से एक भी क़ाबिल-ए-एतिमाद बात नहीं निकलती। उन का दिल तबाही से भरा रहता, उन का गला खुली क़ब्र है, और उन की ज़बान चिकनी-चुपड़ी बातें उगलती रहती है।

[10] ऐ रब, उन्हें उन के ग़लत काम का अज्र दे। उन की साज़िशें उन की अपनी तबाही का बाइस बनें। उन्हें उन के मुतअद्दिद गुनाहों के बाइस निकाल कर मुन्तशिर कर दे, क्यूँकि वह तुझ से सरकश हो गए हैं।

[11] लेकिन जो तुझ में पनाह लेते हैं वह सब ख़ुश हों, वह अबद तक शादियाना बजाएँ, क्यूँकि तू उन्हें मह्फ़ूज़ रखता है। तेरे नाम को प्यार करने वाले तेरा जश्न मनाएँ।

[12] क्यूँकि तू ऐ रब, रास्तबाज़ को बरकत देता है, तू अपनी मेहरबानी की ढाल से उस की चारों तरफ़ हिफ़ाज़त करता है।

ज़बूर — Chapters