[1] दाऊद का ज़बूर। तर्ज़ : अह्द का सोसन। तालीम के लिए यह सुनहरा गीत उस वक़्त से मुताल्लिक़ है जब दाऊद ने मसोपुतामिया के अरामियों और ज़ोबाह के अरामियों से जंग की। वापसी पर योआब ने नमक की वादी में 12,000 अदोमियों को मार डाला। ऐ अल्लाह, तू ने हमें रद्द किया, हमारी क़िलाबन्दी में रख़ना डाल दिया है। लेकिन अब अपने ग़ज़ब से बाज़ आ कर हमें बहाल कर।
[2] तू ने ज़मीन को ऐसे झटके दिए कि उस में दराड़ें पड़ गईं। अब उस के शिगाफ़ों को शिफ़ा दे, क्यूँकि वह अभी तक थरथरा रही है।
[3] तू ने अपनी क़ौम को तल्ख़ तजरिबों से दोचार होने दिया, हमें ऐसी तेज़ मै पिला दी कि हम डगमगाने लगे हैं।
[4] लेकिन जो तेरा ख़ौफ़ मानते हैं उन के लिए तू ने झंडा गाड़ दिया जिस के इर्दगिर्द वह जमा हो कर तीरों से पनाह ले सकते हैं। (सिलाह)
[5] अपने दहने हाथ से मदद करके मेरी सुन ताकि जो तुझे प्यारे हैं वह नजात पाएँ।
[6] अल्लाह ने अपने मक़्दिस में फ़रमाया है, “मैं फ़त्ह मनाते हुए सिकम को तक़्सीम करूँगा और वादी-ए-सुक्कात को नाप कर बाँट दूँगा।
[7] जिलिआद मेरा है और मनस्सी मेरा है। इफ़्राईम मेरा ख़ोद और यहूदाह मेरा शाही असा है।
[8] मोआब मेरा ग़ुसल का बर्तन है, और अदोम पर मैं अपना जूता फैंक दूँगा। ऐ फ़िलिस्ती मुल्क, मुझे देख कर ज़ोरदार नारे लगा!”
[9] कौन मुझे क़िलाबन्द शहर में लाएगा? कौन मेरी राहनुमाई करके मुझे अदोम तक पहुँचाएगा?
[10] ऐ अल्लाह, तू ही यह कर सकता है, गो तू ने हमें रद्द किया है। ऐ अल्लाह, तू हमारी फ़ौजों का साथ नहीं देता जब वह लड़ने के लिए निकलती हैं।
[11] मुसीबत में हमें सहारा दे, क्यूँकि इस वक़्त इन्सानी मदद बेकार है।
[12] अल्लाह के साथ हम ज़बरदस्त काम करेंगे, क्यूँकि वही हमारे दुश्मनों को कुचल देगा।