[1] आसफ़ का ज़बूर। रब क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदा बोल उठा है, उस ने तुलू-ए-सुब्ह से ले कर ग़ुरूब-ए-आफ़्ताब तक पूरी दुनिया को बुलाया है।
[2] अल्लाह का नूर सिय्यून से चमक उठा है, उस पहाड़ से जो कामिल हुस्न का इज़हार है।
[3] हमारा ख़ुदा आ रहा है, वह ख़ामोश नहीं रहेगा। उस के आगे आगे सब कुछ भस्म हो रहा है, उस के इर्दगिर्द तेज़ आँधी चल रही है।
[4] वह आसमान-ओ-ज़मीन को आवाज़ देता है, “अब मैं अपनी क़ौम की अदालत करूँगा।
[5] मेरे ईमानदारों को मेरे हुज़ूर जमा करो, उन्हें जिन्हों ने क़ुर्बानियाँ पेश करके मेरे साथ अह्द बांधा है।”
[6] आसमान उस की रास्ती का एलान करेंगे, क्यूँकि अल्लाह ख़ुद इन्साफ़ करने वाला है। (सिलाह)
[7] “ऐ मेरी क़ौम, सुन! मुझे बात करने दे। ऐ इस्राईल, मैं तेरे ख़िलाफ़ गवाही दूँगा। मैं अल्लाह तेरा ख़ुदा हूँ।
[8] मैं तुझे तेरी ज़बह की क़ुर्बानियों के बाइस मलामत नहीं कर रहा। तेरी भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ तो मुसलसल मेरे सामने हैं।
[9] न मैं तेरे घर से बैल लूँगा, न तेरे बाड़ों से बकरे।
[10] क्यूँकि जंगल के तमाम जानदार मेरे ही हैं, हज़ारों पहाड़ियों पर बसने वाले जानवर मेरे ही हैं।
[11] मैं पहाड़ों के हर परिन्दे को जानता हूँ, और जो भी मैदानों में हरकत करता है वह मेरा है।
[12] अगर मुझे भूक लगती तो मैं तुझे न बताता, क्यूँकि ज़मीन और जो कुछ उस पर है मेरा है।
[13] क्या तू समझता है कि मैं साँडों का गोश्त खाना या बकरों का ख़ून पीना चाहता हूँ?
[14] अल्लाह को शुक्रगुज़ारी की क़ुर्बानी पेश कर, और वह मन्नत पूरी कर जो तू ने अल्लाह तआला के हुज़ूर मानी है।
[15] मुसीबत के दिन मुझे पुकार। तब मैं तुझे नजात दूँगा और तू मेरी तम्जीद करेगा।”
[16] लेकिन बेदीन से अल्लाह फ़रमाता है, “मेरे अह्काम सुनाने और मेरे अह्द का ज़िक्र करने का तेरा क्या हक़ है?
[17] तू तो तर्बियत से नफ़रत करता और मेरे फ़रमान कचरे की तरह अपने पीछे फैंक देता है।
[18] किसी चोर को देखते ही तू उस का साथ देता है, तू ज़िनाकारों से रिफ़ाक़त रखता है।
[19] तू अपने मुँह को बुरे काम के लिए इस्तेमाल करता, अपनी ज़बान को धोका देने के लिए तय्यार रखता है।
[20] तू दूसरों के पास बैठ कर अपने भाई के ख़िलाफ़ बोलता है, अपनी ही माँ के बेटे पर तोहमत लगाता है।
[21] यह कुछ तू ने किया है, और मैं ख़ामोश रहा। तब तू समझा कि मैं बिलकुल तुझ जैसा हूँ। लेकिन मैं तुझे मलामत करूँगा, तेरे सामने ही मुआमला तरतीब से सुनाऊँगा।
[22] तुम जो अल्लाह को भूले हुए हो, बात समझ लो, वर्ना मैं तुम्हें फाड़ डालूँगा। उस वक़्त कोई नहीं होगा जो तुम्हें बचाए।
[23] जो शुक्रगुज़ारी की क़ुर्बानी पेश करे वह मेरी ताज़ीम करता है। जो मुसम्मम इरादे से ऐसी राह पर चले उसे मैं अल्लाह की नजात दिखाऊँगा।”