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[1] दाऊद का ज़बूर। मैं शफ़्क़त और इन्साफ़ का गीत गाऊँगा। ऐ रब, मैं तेरी मद्हसराई करूँगा।

[2] मैं बड़ी एहतियात से बेइल्ज़ाम राह पर चलूँगा। लेकिन तू कब मेरे पास आएगा? मैं ख़ुलूसदिली से अपने घर में ज़िन्दगी गुज़ारूँगा।

[3] मैं शरारत की बात अपने सामने नहीं रखता और बुरी हरकतों से नफ़रत करता हूँ। ऐसी चीज़ें मेरे साथ लिपट न जाएँ।

[4] झूटा दिल मुझ से दूर रहे। मैं बुराई को जानना ही नहीं चाहता।

[5] जो चुपके से अपने पड़ोसी पर तोहमत लगाए उसे मैं ख़ामोश कराऊँगा, जिस की आँखें मग़रूर और दिल मुतकब्बिर हो उसे बर्दाश्त नहीं करूँगा।

[6] मेरी आँखें मुल्क के वफ़ादारों पर लगी रहती हैं ताकि वह मेरे साथ रहें। जो बेइल्ज़ाम राह पर चले वही मेरी ख़िदमत करे।

[7] धोकेबाज़ मेरे घर में न ठहरे, झूट बोलने वाला मेरी मौजूदगी में क़ाइम न रहे।

[8] हर सुब्ह को मैं मुल्क के तमाम बेदीनों को ख़ामोश कराऊँगा ताकि तमाम बदकारों को रब के शहर में से मिटाया जाए।

ज़बूर — Chapters