[1] दाऊद का ज़बूर। ऐ रब, मेरा इन्साफ़ कर, क्यूँकि मेरा चाल-चलन बेक़ुसूर है। मैं ने रब पर भरोसा रखा है, और मैं डाँवाँडोल नहीं हो जाऊँगा।
[2] ऐ रब, मुझे जाँच ले, मुझे आज़मा कर दिल की तह तक मेरा मुआइना कर।
[3] क्यूँकि तेरी शफ़्क़त मेरी आँखों के सामने रही है, मैं तेरी सच्ची राह पर चलता रहा हूँ।
[4] न मैं धोकेबाज़ों की मजलिस में बैठता, न चालाक लोगों से रिफ़ाक़त रखता हूँ।
[5] मुझे शरीरों के इजतिमाओं से नफ़रत है, बेदीनों के साथ मैं बैठता भी नहीं।
[6] ऐ रब, मैं अपने हाथ धो कर अपनी बेगुनाही का इज़हार करता हूँ। मैं तेरी क़ुर्बानगाह के गिर्द फिर कर
[7] बुलन्द आवाज़ से तेरी हम्द-ओ-सना करता, तेरे तमाम मोजिज़ात का एलान करता हूँ।
[8] ऐ रब, तेरी सुकूनतगाह मुझे प्यारी है, जिस जगह तेरा जलाल ठहरता है वह मुझे अज़ीज़ है।
[9] मेरी जान को मुझ से छीन कर मुझे गुनाहगारों में शामिल न कर! मेरी ज़िन्दगी को मिटा कर मुझे ख़ूँख़्वारों में शुमार न कर,
[10] ऐसे लोगों में जिन के हाथ शर्मनाक हरकतों से आलूदा हैं, जो हर वक़्त रिश्वत खाते हैं।
[11] क्यूँकि मैं बेगुनाह ज़िन्दगी गुज़ारता हूँ। फ़िद्या दे कर मुझे छुटकारा दे! मुझ पर मेहरबानी कर!
[12] मेरे पाँओ हमवार ज़मीन पर क़ाइम हो गए हैं, और मैं इजतिमाओं में रब की सताइश करूँगा।