[1] दाऊद का ज़बूर। गीत। ऐ अल्लाह, मेरा दिल मज़बूत है। मैं साज़ बजा कर तेरी मद्हसराई करूँगा। ऐ मेरी जान, जाग उठ!
[2] ऐ सितार और सरोद, जाग उठो! मैं तुलू-ए-सुब्ह को जगाऊँगा।
[3] ऐ रब, मैं क़ौमों में तेरी सताइश, उम्मतों में तेरी मद्हसराई करूँगा।
[4] क्यूँकि तेरी शफ़्क़त आसमान से कहीं बुलन्द है, तेरी वफ़ादारी बादलों तक पहुँचती है।
[5] ऐ अल्लाह, आसमान पर सरफ़राज़ हो! तेरा जलाल पूरी दुनिया पर छा जाए।
[6] अपने दहने हाथ से मदद करके मेरी सुन ताकि जो तुझे प्यारे हैं नजात पाएँ।
[7] अल्लाह ने अपने मक़्दिस में फ़रमाया है, “मैं फ़त्ह मनाते हुए सिकम को तक़्सीम करूँगा और वादी-ए-सुक्कात को नाप कर बाँट दूँगा।
[8] जिलिआद मेरा है और मनस्सी मेरा है। इफ़्राईम मेरा ख़ोद और यहूदाह मेरा शाही असा है।
[9] मोआब मेरा ग़ुसल का बर्तन है, और अदोम पर मैं अपना जूता फैंक दूँगा। मैं फ़िलिस्ती मुल्क पर ज़ोरदार नारे लगाऊँगा!”
[10] कौन मुझे क़िलाबन्द शहर में लाएगा? कौन मेरी राहनुमाई करके मुझे अदोम तक पहुँचाएगा?
[11] ऐ अल्लाह, तू ही यह कर सकता है, गो तू ने हमें रद्द किया है। ऐ अल्लाह, तू हमारी फ़ौजों का साथ नहीं देता जब वह लड़ने के लिए निकलती हैं।
[12] मुसीबत में हमें सहारा दे, क्यूँकि इस वक़्त इन्सानी मदद बेकार है।
[13] अल्लाह के साथ हम ज़बरदस्त काम करेंगे, क्यूँकि वही हमारे दुश्मनों को कुचल देगा।