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[1] दाऊद का ज़बूर। ऐ अल्लाह के फ़र्ज़न्दो, रब की तम्जीद करो! रब के जलाल और क़ुदरत की सताइश करो!

[2] रब के नाम को जलाल दो। मुक़द्दस लिबास से आरास्ता हो कर रब को सिज्दा करो।

[3] रब की आवाज़ समुन्दर के ऊपर गूँजती है। जलाल का ख़ुदा गरजता है, रब गहरे पानी के ऊपर गरजता है।

[4] रब की आवाज़ ज़ोरदार है, रब की आवाज़ पुरजलाल है।

[5] रब की आवाज़ देवदार के दरख़्तों को तोड़ डालती है, रब लुबनान के देवदार के दरख़्तों को टुकड़े टुकड़े कर देता है।

[6] वह लुबनान को बछड़े और कोह-ए-सिर्यून को जंगली बैल के बच्चे की तरह कूदने फाँदने देता है।

[7] रब की आवाज़ आग के शोले भड़का देती है।

[8] रब की आवाज़ रेगिस्तान को हिला देती है, रब दश्त-ए-क़ादिस को काँपने देता है।

[9] रब की आवाज़ सुन कर हिरनी दर्द-ए-ज़ह में मुब्तला हो जाती और जंगलों के पत्ते झड़ जाते हैं। लेकिन उस की सुकूनतगाह में सब पुकारते हैं, “जलाल!”

[10] रब सैलाब के ऊपर तख़्तनशीन है, रब बादशाह की हैसियत से अबद तक तख़्तनशीन है।

[11] रब अपनी क़ौम को तक़वियत देगा, रब अपने लोगों को सलामती की बरकत देगा।

ज़बूर — Chapters