[1] दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। मुबारक है वह जो पस्तहाल का ख़याल रखता है। मुसीबत के दिन रब उसे छुटकारा देगा।
[2] रब उस की हिफ़ाज़त करके उस की ज़िन्दगी को मह्फ़ूज़ रखेगा, वह मुल्क में उसे बरकत दे कर उसे उस के दुश्मनों के लालच के हवाले नहीं करेगा।
[3] बीमारी के वक़्त रब उस को बिस्तर पर सँभालेगा। तू उस की सेहत पूरी तरह बहाल करेगा।
[4] मैं बोला, “ऐ रब, मुझ पर रहम कर! मुझे शिफ़ा दे, क्यूँकि मैं ने तेरा ही गुनाह किया है।”
[5] मेरे दुश्मन मेरे बारे में ग़लत बातें करके कहते हैं, “वह कब मरेगा? उस का नाम-ओ-निशान कब मिटेगा?”
[6] जब कभी कोई मुझ से मिलने आए तो उस का दिल झूट बोलता है। पस-ए-पर्दा वह ऐसी नुक़्सानदेह मालूमात जमा करता है जिन्हें बाद में बाहर जा कर गलियों में फैला सके।
[7] मुझ से नफ़रत करने वाले सब आपस में मेरे ख़िलाफ़ फुसफुसाते हैं। वह मेरे ख़िलाफ़ बुरे मन्सूबे बांध कर कहते हैं,
[8] “उसे मोहलक मर्ज़ लग गया है। वह कभी अपने बिस्तर पर से दुबारा नहीं उठेगा।”
[9] मेरा दोस्त भी मेरे ख़िलाफ़ उठ खड़ा हुआ है। जिस पर मैं एतिमाद करता था और जो मेरी रोटी खाता था, उस ने मुझ पर लात उठाई है।
[10] लेकिन तू ऐ रब, मुझ पर मेहरबानी कर! मुझे दुबारा उठा खड़ा कर ताकि उन्हें उन के सुलूक का बदला दे सकूँ।
[11] इस से मैं जानता हूँ कि तू मुझ से ख़ुश है कि मेरा दुश्मन मुझ पर फ़त्ह के नारे नहीं लगाता।
[12] तू ने मुझे मेरी दियानतदारी के बाइस क़ाइम रखा और हमेशा के लिए अपने हुज़ूर खड़ा किया है।
[13] रब की हम्द हो जो इस्राईल का ख़ुदा है। अज़ल से अबद तक उस की तम्जीद हो। आमीन, फिर आमीन।