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[1] दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। याददाश्त के लिए। ऐ अल्लाह, जल्दी से आ कर मुझे बचा! ऐ रब, मेरी मदद करने में जल्दी कर!

[2] मेरे जानी दुश्मन शर्मिन्दा हो जाएँ, उन की सख़्त रुस्वाई हो जाए। जो मेरी मुसीबत देखने से लुत्फ़ उठाते हैं वह पीछे हट जाएँ, उन का मुँह काला हो जाए।

[3] जो मेरी मुसीबत देख कर क़ह्क़हा लगाते हैं वह शर्म के मारे पुश्त दिखाएँ।

[4] लेकिन तेरे तालिब शादमान हो कर तेरी ख़ुशी मनाएँ। जिन्हें तेरी नजात प्यारी है वह हमेशा कहें, “अल्लाह अज़ीम है!”

[5] लेकिन मैं नाचार और मुह्ताज हूँ। ऐ अल्लाह, जल्दी से मेरे पास आ! तू ही मेरा सहारा और मेरा नजातदहिन्दा है। ऐ रब, देर न कर!

ज़बूर — Chapters