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[1] ज़ियारत का गीत। जब रब ने सिय्यून को बहाल किया तो ऐसा लग रहा था कि हम ख़्वाब देख रहे हैं।

[2] तब हमारा मुँह हंसी-ख़ुशी से भर गया, और हमारी ज़बान शादमानी के नारे लगाने से रुक न सकी। तब दीगर क़ौमों में कहा गया, “रब ने उन के लिए ज़बरदस्त काम किया है।”

[3] रब ने वाक़ई हमारे लिए ज़बरदस्त काम किया है। हम कितने ख़ुश थे, कितने ख़ुश!

[4] ऐ रब, हमें बहाल कर। जिस तरह मौसम-ए-बरसात में दश्त-ए-नजब के ख़ुश्क नाले पानी से भर जाते हैं उसी तरह हमें बहाल कर।

[5] जो आँसू बहा बहा कर बीज बोएँ वह ख़ुशी के नारे लगा कर फ़सल काटेंगे।

[6] वह रोते हुए बीज बोने के लिए निकलेंगे, लेकिन जब फ़सल पक जाए तो ख़ुशी के नारे लगा कर पूले उठाए अपने घर लौटेंगे।

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