[1] “का मनखेमन ला धरती म कठिन मेहनत नइं करे बर परय? का ओमन के दिन ह बनी करइया बनिहार कस नइं होवय?
[2] जइसने एक गुलाम ह संझा के छइहां के ईछा करथे, या एक बनिहार ह अपन बनी के आसा म रहिथे,
[3] वइसने ही मोला बेकार के महिनामन ला देय गे हवय, अऊ मोर बर दुख भरे रथियामन ला ठहिराय गे हवय।
[4] जब मेंह ढलंगथंव, त मेंह सोचथंव, ‘मेंह कब उठहूं?’ रथिया ह लाम होथे, अऊ मेंह बिहनियां होवत ले छटपटावत रहिथंव।
[5] मोर देहें म कीरा अऊ घाव ह माटी के परत ले ढंकाय हवय, मोर चमड़ी ह फट गे हवय अऊ घाव ह पाक गे हवय।
[6] “मोर दिनमन कोसटा के ढरकी ले घलो जादा तेज चलत हवंय, अऊ येमन बिगर कोनो आसा के बीत जाथें।
[7] सुरता कर, हे परमेसर, मोर जिनगी ह सिरिप एक सांस अय; मोर आंखीमन फेर कभू खुसी नइं देखहीं।
[8] जऊन ह अभी मोला देखत हवय, ओकर आंखी ह मोला फेर नइं देखही; तेंह मोला खोजबे, पर मेंह नइं मिलहूं।
[9] जइसने बादर ह छरियाके गायब हो जाथे, वइसने ही जऊन ला कबर म माटी दे दिये जाथे, ओह लहुंटके नइं आवय।
[10] ओह अपन घर म फेर कभू नइं आही; ओकर जगह ह ओला फेर कभू नइं चिनही।
[11] “एकरसेति मेंह चुप नइं रहंव; मेंह अपन आतमा के दुख म होके गोठियाहूं, मेंह अपन जिनगी के करूवाहट म होके सिकायत करहूं।
[12] का मेंह समुंदर अंव, या गहिरा पानी के बिकराल जन्तु, कि तें मोला पहरेदारी म रखबे?
[13] जब मेंह सोचथंव, मोर खटिया म मोला सांति मिलही अऊ बिछौना म मोला मोर पीरा ले हरू लगही,
[14] तब घलो तें मोला सपना म डरवाथस अऊ दरसन देखाके मोला भयभीत करथस,
[15] एकरसेति मोर गला घोंटे जावय अऊ मोला मिरतू मिलय, एकर बदले कि मेंह ये देहें म बने रहंव।
[16] मोला अपन जिनगी ले घिन आवथे; मेंह हमेसा जीयत नइं रहंव। मोला अकेला छोंड़ दे; मोर जिनगी के दिनमन के कोनो मतलब नइं ए।
[17] “मनखे ह का ए कि तेंह ओला बहुंत महत्व देथस, अऊ तेंह ओकर ऊपर बहुंत धियान देथस,
[18] अऊ तेंह रोज बिहनियां ओकर जांच करथस अऊ छिन-छिन म ओला परखत रहिथस?
[19] का तेंह कभू मोर देखभाल करई नइं छोंड़स, या छिन भर के लागि घलो मोला अकेला नइं छोंड़स?
[20] तेंह ओ अस, जऊन ह हमर हर एक काम ला देखत रहिथे, अगर मेंह पाप करे हंव, त मेंह तोर का बिगाड़े हंव? तेंह काबर मोला अपन निसाना बनाय हस? का मेंह तोर बर बोझ बन गे हवंव?
[21] तेंह काबर मोर अपराध अऊ मोर पाप ला छेमा नइं करस? काबरकि अब तो मेंह माटी म मिल जाहूं; तेंह मोला खोजबे, फेर मोला नइं पाबे।”