[1] यहोवा ह अयूब ला कहिस:
[2] “जऊन ह सर्वसक्तिमान ऊपर दोस लगाथे, का ओह ओकर संग बहस करही? जऊन ह परमेसर ऊपर दोस लगाथे, ओह ओला जबाब देवय!”
[3] तब अयूब ह यहोवा ला जबाब दीस:
[4] “मेंह तो तुछ मनखे अंव—मेंह तोला कइसे जबाब दे सकत हंव? मेंह अपन मुहूं ऊपर अपन हांथ रख लेथंव।
[5] एक बार मेंह गोठिया डारेंव, पर मोर करा जबाब नइं ए— हव, दू बार घलो, पर अब मेंह नइं कहंव।”
[6] तब यहोवा ह अयूब ला गरेर म ले गोठियाईस:
[7] “एक आदमी कस अपन कनिहां कस ले; मेंह तोर ले सवाल पुछहूं, अऊ तेंह मोला जबाब देबे।
[8] “का तेंह मोर नियाय ला बेकार ठहिराबे? का तेंह अपनआप ला सही ठहिराय बर मोला दोस देबे?
[9] का तोर करा परमेसर के सहीं भुजबल हवय, अऊ का तेंह ओकर कस अवाज म गरज सकथस?
[10] तब तेंह अपनआप ला महिमा अऊ परताप ले संवार ले, अऊ अपनआप ला आदर अऊ गौरव के ओनहा पहिरा ले।
[11] अपन उफनत रिस ला छोंड़ दे, अऊ जऊन मन घमंडी अंय, ओमन ला देख अऊ ओमन ला झुकवा दे,
[12] जऊन मन घमंडी अंय, ओमन ला देख अऊ ओमन ला नम्र बना, दुस्टमन जिहां ठाढ़ होथें, उहां ओमन ला कुचर दे।
[13] ओ जम्मो झन ला एके संग माटी म गाड़ दे; अऊ कबर म ओमन के मुहूं ऊपर कफन ओढ़ा दे।
[14] तब मेंह खुद मान लूहूं कि तोरेच जेवनी हांथ ह तोला बचा सकत हे।
[15] “जलहाथी ला देख, जेला मेंह तोर संग बनाय हवंव अऊ जऊन ह बईला के सहीं कांदी खाथे।
[16] ओकर कनिहां म कतेक बल होथे, अऊ ओकर पेट के मांस-पेसी म कतेक सक्ति होथे!
[17] ओकर पुंछी ह देवदार रूख कस झुमथे; ओकर जांघ के नसमन एक-दूसर ले गुंथाय रहिथें।
[18] ओकर हाड़ामन कांस के नलीमन कस अंय, अऊ ओकर अंगमन लोहा के छड़ कस अंय।
[19] परमेसर के रचना म ओह पहिला जगह पाथे, तभो ले ओकर सिरजनहार ह ओकर करा तलवार लेके आ सकत हे।
[20] पठारमन ले ओकर बर चारा मिलथे, अऊ बन के जम्मो पसु ओकर लकठा म खेलथें।
[21] ओह कमल फूल के नार के तरी म लेटथे, चीखला म कांदी के बीच ओह छुपे रहिथे।
[22] कमल फूल के नारमन ओला अपन छइहां म छुपाथें, अऊ चिनार रूखमन नरवा के तीर म ओला घेरे रहिथें।
[23] नदी म घुमड़त बाढ़ आय ले घलो ओह नइं घबरावय; चाहे यरदन नदी के पानी ह ओकर मुहूं तक चघ जावय, तभो ले ओह सुरकछित रहिथे।
[24] का कोनो ओला पकड़ सकथे जब ओह जागत रहिथे, या फांदा म फंसाके ओकर नाक ला छेद सकथे?