[1] “का तेंह लिबयातान ला मछरी धरे के गरी ले तीरके निकाल सकथस या डोरी ले ओकर जीभ ला बांध सकत हस।
[2] का तेंह ओकर नाक म नत्थी लगा सकथस या ओकर जबड़ा ला लोहा के कांटा ले छेद सकथस?
[3] का ओह तोर ले दया के भीख मांगही? का ओह तोर ले गुरतूर बोली बोलही?
[4] का ओह तोर ले करार करही कि तेंह ओला जिनगी भर अपन गुलाम बना ले?
[5] का तेंह ओला कोनो चिरई के सहीं पालतू बना सकथस या अपन घर म जवान माईलोगनमन के खेले बर ओमा पट्टा बांधके रख सकबे?
[6] का बेपारीमन ओकर बर मोलभाव करहीं? का ओमन ओला बेपारीमन के बीच म बांट दीहीं?
[7] का तेंह ओकर खाल ला भाला ले, या ओकर मुड़ ला मछरी मारे के बरछी ले भर सकथस?
[8] यदि तेंह ओकर ऊपर अपन हांथ रखथस, त तोला ओकर संग लड़े के सुरता आही अऊ तेंह अइसने फेर कभू नइं करबे!
[9] ये बेकार के आसा ए कि तेंह ओला अपन अधिकार म रखबे; तेंह ओकर आघू म आवत ही हार जाबे।
[10] काकरो हिम्मत नइं ए कि ओला भड़कावंय। त फेर कोन ह मोर सामना कर सकथे?
[11] कोन ह मोला देय हवय कि मेंह ओला लहुंटावंव? स्वरग के खाल्हे के जम्मो चीज मोर अय।
[12] “मेंह लिबयातान के अंग, ओकर बल अऊ ओकर सोभायमान रूप के बारे म बताय बर चुप नइं रहंव।
[13] कोन ह ओकर बाहिर के आवरन ला उतार सकत हे? कोन ह ओकर दोहरा कवच ला भेद सकथे?
[14] कोन ह ओकर मुहूं ला खोले के हिम्मत कर सकथे? जेकर भयानक दांतमन एक-दूसर ले जुड़े रहिथें।
[15] ओकर पीठ म तह के तह ढालमन हवंय, जऊन म मजबूती से एक संग मुहर लगे हवय;
[16] ओमन एक-दूसर ले अइसे संटे हवंय कि ओमन के बीच म ले हवा घलो नइं निकल सकय।
[17] ओमन एक-दूसर ले मजबूती ले जुड़े हवंय; ओमन एक-दूसर ले लिपटे हवंय अऊ ओमन ला अलग नइं करे जा सकय।
[18] ओकर छींक ले अंजोर चमकथे; ओकर आंखीमन बिहनियां के किरन कस अंय।
[19] ओकर मुहूं ले बरत जुवाला निकलथे; अऊ आगी के चिनगारी निकलथे।
[20] ओकर नाक के छेदा ले धुआं निकलथे जइसे बरत सरकंडामन ऊपर रखे उबलत बरतन ले निकलथे।
[21] ओकर सांस ले कोइला ह बरथे, अऊ ओकर मुहूं ले आगी के जुवाला निकलथे।
[22] ओकर घेंच म ताकत रहिथे; अऊ डर ह ओकर आघू-आघू जाथे।
[23] ओकर मांस-पेसी के परतमन कसके जूरे हवंय; ओमन मजबूत हवंय अऊ डोलंय नइं।
[24] ओकर छाती ह पथरा कस कठोर हवय, जांता के तरी के कुटा कस कठोर हवय।
[25] जब ओह ठाढ़ होथे, त बलवालामन घलो डरा जाथें; येकर मारे-कुटे के पहिले, ओमन पाछू हट जाथें।
[26] ओकर ऊपर तलवार चलाय ले घलो ओला कुछू नइं होवय, अऊ न ही भाला या बान या बरछी के परभाव पड़य।
[27] ओह लोहा ला पैंरा सहीं अऊ कांसा ला सरे लकरी सहीं जानथे।
[28] बान ह ओला भगाय नइं सकय; गुलेल के पथरा ह ओकर बर भूंसा सहीं अय।
[29] लउठी घलो ओला पैंरा सहीं लगथे; ओह बरछी के अवाज ऊपर हांसथे।
[30] ओकर खाल्हे के भाग ह माटी के फटे बरतन के धार सहीं अय, जऊन ह चीखला म अनाज कुटे के पट्टा सहीं चिनहां छोंड़थे।
[31] ओह समुंदर के पानी ला खउलत हांड़ी के सहीं मथथे अऊ समुंदर ला मलहम के बरतन सहीं हलाथे।
[32] ओह अपन पाछू म एक चमकीला धारी छोंड़त जाथे; मानो गहिरा पानी के सफेद बाल हवय।
[33] धरती म ओकर बरोबर कोनो चीज नइं ए— एक जीव जेला काकरो डर नइं ए।
[34] ओह हर एक अभिमानी ला नीचा देखथे; जम्मो घमंड करइयामन ऊपर ओह राजा अय।”