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[1] “सर्वसक्तिमान परमेसर ह नियाय के समय ला काबर नइं ठहिरात हे? जऊन मन ओला जानथें, ओमन काबर बेकार म अइसने दिन बर अगोरंय?

[2] कुछू मनखेमन भुइयां के सिवाना ला बढ़ा देथें; ओमन चोराय भेड़मन के झुंड ला चराथें।

[3] ओमन अनाथमन के गदहा ला खेदके ले जाथें अऊ बिधवा के बईला ला गिरवी म रखथें।

[4] ओमन जरूरतमंद मनखे ला रद्दा ले ढकेल देथें अऊ देस के जम्मो गरीबमन ला छुपे बर बिबस कर देथें।

[5] सुन्ना जगह म जंगली गदहामन कस, गरीबमन जेवन के खोज म भटकत रहिथें; सुन्ना जगह ले ओमन के लइकामन ला जेवन मिलथे।

[6] ओमन खेत म फसल संकेलथें अऊ दुस्टमन के अंगूर के बारी म सीला बिनथें।

[7] ओमन बिगर ओनहा के नंगरा रथिया बिताथें; जाड़ म ओढ़े बर ओमन करा कुछू नइं रहय।

[8] ओमन परबत के बरसा ले भीग जाथें अऊ सरन लेय के जगह नइं मिले के कारन ओमन चट्टान म सरन लेथें।

[9] अनाथ लइका ला दूध पीयावत दाई के छाती ले छीन लेथें; गरीब के नानकून लइका ला लागा बर धर लिये जाथे।

[10] ओनहा के कमी के कारन, ओमन नंगरा रहिथें; ओमन अनाज के करपा ला तो ले जाथें, तभो ले भूखन रहिथें।

[11] ओमन चबूतरामन म जैतून तेल पेरथें; ओमन अंगूर के रसकुंडमन म अंगूर ला खुंदथें, तभो ले पीयासन रहिथें।

[12] सहर ले मरइयामन के कलहरई ह सुनई देथे, अऊ घायलमन के आतमा ह मदद बर पुकारथे। पर परमेसर ह कोनो ला गलती के दोस नइं देवय।

[13] “अइसने मनखे हवंय, जऊन मन अंजोर के बिरोध म बिदरोह करथें, ओमन येकर रद्दा ला नइं जानंय, या येकर रद्दा म नइं रूकंय।

[14] जब दिन के अंजोर ह चले जाथे, त हतियारा ह ठाढ़ होथे, अऊ गरीब अऊ जरूरतमंद ला मार डारथे, अऊ रथिया ओह चोर कस चोरी करथे।

[15] बेभिचार करइया के आंखी ह संझाती के डहार देखथे; ओह सोचथे, ‘मोला कोनो नइं देखहीं,’ अऊ ओह अपन चेहरा ला छुपाके रखथे।

[16] अंधियार म चोरमन घर म सेंध लगाथें, पर दिन म अपनआप ला लुकाय रखथें; अंजोर म ओमन कुछू करे बर नइं चाहंय।

[17] ओ जम्मो बर, आधा रथिया ह ओमन के बिहनियां ए; ओमन अंधियार के आतंक ला संगी बनाथें।

[18] “तभो ले ओमन पानी के ऊपर झाग सहीं अंय; ओमन के बांटा के भुइयां ह सरापित ए, जेकर ले अंगूर के बारीमन म कोनो नइं जावंय।

[19] जइसे कि गरमी अऊ सूखा ह पिघलत बरफ के पानी ला ले जाथे, वइसनेच ही कबर ह ओमन ला ले जाथे जऊन मन पाप करे हवंय।

[20] दाई ह ओमन ला भुला जाथे, कीरामन ओमन ला मजा लेके खाथें; दुस्टमन ला कोनो सुरता नइं करंय पर ओमन ला रूख कस काट डारे जाथे।

[21] ओमन ठड़गी अऊ बिगर लइका के माईलोगनमन ला लूटथें, अऊ बिधवामन ऊपर कुछू दया नइं देखावंय।

[22] पर परमेसर ह अपन सामर्थ ले सूरबीरमन ला घिल्लावत ले जाथे; हालाकि ओमन स्थापित रहिथें, पर ओमन ला जिनगी के भरोसा नइं रहय।

[23] परमेसर ह ओमन ला सुरकछा के अनुभव म अराम करा सकथे, पर ओकर आंखी ह ओमन के रद्दा ऊपर लगे रहिथे।

[24] ओमन थोरकून समय बर ऊपर उठाय जाथें, अऊ ओकर बाद ओमन के कुछू महत्व नइं रहय; ओमन ला गिराय जाथे अऊ जम्मो आने मन कस संकेले जाथे; ओमन ला अनाज के बालीमन कस काट डारे जाथे।

[25] “कहूं येह अइसे नो हय, त कोन ह मोला गलत साबित कर सकथे अऊ मोर गोठ ला बिना मतलब के ठहिरा सकथे?”

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