Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 3:05

[1] “इही बात म मोर हिरदय ह कांपथे अऊ अपन जगह ले उदकथे।

[2] सुन! परमेसर के अवाज के गरजन, ओकर मुहूं ले निकलत गड़गड़ाहट ला सुन।

[3] ओह अपन बिजली ला जम्मो अकास के खाल्हे जावन देथे अऊ ओला धरती के छोर तक पठोथे।

[4] ओकर बाद ओकर गरजन के अवाज आथे; ओह अपन परतापी अवाज ले गरजथे। जब ओकर अवाज फेर सुनई देथे, तब ओह अपन करा कुछू नइं रख छोंड़य।

[5] परमेसर के अवाज ह अद्भूत रीति ले गरजथे; ओह हमर समझ ले बाहिर बड़े-बड़े काम करथे।

[6] ओह बरफ ला हुकूम देथे, ‘धरती म गिर,’ अऊ बारिस के पानी ला हुकूम देथे, ‘जमके बरस,’

[7] ताकि हर एक मनखे, जऊन ला ओह बनाय हे, ओकर काम ला जानय, ओह जम्मो मनखे ला ओमन के मेहनत करे ले रोक देथे।

[8] तब बन के पसुमन अपन गुफा म खुसर जाथें; ओमन अपन मांद म रहिथें।

[9] अपन छेत्र ले आंधी, अऊ तेज बहत हवा ले जाड़ा आथे।

[10] परमेसर के सांस फूंके ले बरफ बनथे, अऊ बगरे पानी ह जम जाथे।

[11] ओह बादरमन ला नमी ले लादथे; अऊ अपन बिजली ला ओमन के जरिये बगराथे।

[12] ओकर आदेस म येमन धरती के चारों कोति ऊपर एती-ओती किंदरथें अऊ ओकर हुकूम के मुताबिक काम करथें।

[13] ओह मनखेमन ला दंड देय बर बादर लानथे, या धरती ऊपर पानी लानके ओह अपन मया देखाथे।

[14] “हे अयूब, येला सुन; रूक अऊ परमेसर के अद्भूत काम ऊपर बिचार कर।

[15] का तें जानथस कि परमेसर ह कइसे बादरमन ला अपन हुकूम ले चलाथे अऊ अपन बिजली चमकाथे?

[16] का तेंह जानथस कि बादरमन अधर म कइसे रहिथें, ओकर ये अचरज के काम के बारे म कोन ला सिद्ध गियान हवय?

[17] जब दक्खिन के हवा के कारन भुइयां ह सांत रहिथे, अऊ तेंह अपन कपड़ा के गरमी म बियाकुल रहिथस,

[18] त का तेंह ओकर संग म अकास-मंडल ला तान सकत हस, जऊन ह ढरूवा कांसा के दरपन सहीं कठोर होथे?

[19] “हमन ला बता कि हमन ओला का कहिबो; हमर अंधियार के कारन, हमन अपन मामला नइं रख सकन।

[20] का ओला बताय जावय कि मेंह गोठियाय चाहत हंव? का कोनो मनखे चाहथे कि ओला लील डारे जावय?

[21] अभी तो सूरज कोति कोनो नइं देख सकंय, काबरकि हवा ह अकास ला साफ कर दे हे, अऊ सूरज ह तेज चमकत हे।

[22] उत्तर कोति ले ओह सोन कस चमकत आथे; परमेसर ह अद्भूत महिमा म आथे।

[23] सर्वसक्तिमान ह हमर पहुंच के बाहिर ए अऊ बहुंत सामर्थी ए; अपन नियाय अऊ बड़े धरमीपन म, ओह अतियाचार नइं करय।

[24] एकरसेति, मनखेमन ओकर आदर करंय, काबरकि ओह जम्मो बुद्धिमान मनखेमन के आदर करथे।”

अयूब — Chapters