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[1] तब सूही के रहइया बिलदद ह जबाब दीस:
[2] “परभूता अऊ भय के अधिकारी परमेसर ही अय; ओह ऊंच स्वरग म सांति स्थापित करथे।
[3] का ओकर सेनामन के गनती करे जा सकथे? अइसे कोन हवय, जेकर ऊपर ओकर अंजोर नइं परय?
[4] तब एक मरनहार मनखे ह परमेसर के आघू म कइसे धरमी हो सकथे? माईलोगन ले जनमे मनखे ह कइसे सुध हो सकथे?
[5] कहूं ओकर नजर म चंदा ह घलो उजला अऊ तारामन घलो ओकर नजर म सुध नइं अंय,
[6] त फेर मरनहार मनखे के का गनती, जऊन ह सिरिप एक गेंगरूआ अय— एक मनखे, जऊन ह सिरिप एक कीरा अय!”