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[1] “यदि तोर ईछा हवय, त पुकार, पर तोला कोन जबाब दीही? पबितर जन म ले तेंह काकर कोति सहायता बर लहुंटबे?

[2] तमकई ह तो मुरूख मनखे ला मार डारथे, अऊ जलन ह सीधवा मनखे ला मार डारथे।

[3] मेंह खुद मुरूख मनखे ला बढ़त देखे हंव, पर अचानक ओकर घर ह सरापित हो गीस।

[4] ओकर लइकामन सुरकछित नइं एं, ओमन अदालत म कुचरे जाथें, अऊ ओमन के बचाव करइया कोनो नइं ए।

[5] भूखहा मनखेमन ओकर फसल ला खा जाथें, इहां तक कि ओमन कांटा-खूंटी के बीच ले घलो फसल ला ले लेथें, अऊ पीयासा मनखेमन ओकर धन ला हड़प लेथें।

[6] काबरकि बिपत्ति ह माटी ले नइं उपजय, अऊ न ही समस्या ह भुइयां म ले उगय।

[7] जइसे चिंगारीमन ऊपर कोति ही उड़थें, वइसे ही मनखे ह दुख भोगे बर जनमे हवय।

[8] “पर यदि मेंह तोर स्थिति म होतेंव, त में परमेसर ले पराथना करतेंव; में अपन बात ओकर आघू म रखतेंव।

[9] ओह अद्भूत काम करथे, जेला समझे नइं जा सकय अऊ ओह चमतकार करथे, जेला गने नइं जा सकय।

[10] ओह धरती म बारिस करथे; ओह खेतमन म पानी पठोथे।

[11] छोटे मनखेमन ला ओह ऊंचहा जगह म बईठारथे, अऊ सोक करइया मनखेमन ला ओह सुरकछा देथे।

[12] ओह चतुरामन के योजना ला बिफल कर देथे, जेकर ले ओमन ला सफलता नइं मिलय।

[13] ओह बुद्धिमानमन ला ओहीचमन के चतुरई म फंसो देथे, अऊ चलाकमन के योजना ह बिफल हो जाथे।

[14] दिन म ही ओमन के ऊपर अंधियार छा जाथे; मंझन के बेरा ओमन रथिया कस टमड़े लगथें।

[15] ओह जरूरतमंद मनखेमन ला ओमन के बोली के चोखा तलवार ले बचाथे; ओह ओमन ला बलवानमन के हांथ ले बचाथे।

[16] एकरसेति गरीबमन ला आसा होथे, अऊ अनियायीमन अपन मुहूं बंद रखथें।

[17] “धइन अय ओ मनखे, जऊन ला परमेसर ह सुधारथे; एकरसेति सर्वसक्तिमान के ताड़ना ला तुछ झन जान।

[18] काबरकि ओह चोट पहुंचाथे, पर ओहीच ह पट्टी घलो बांधथे; ओह घायल करथे, पर ओकर हांथमन घायल ला बने घलो करथें।

[19] छै बिपत्तिमन ले ओह तोला छोंड़ाही; सातवां म घलो तोर कुछू हानि नइं होही।

[20] दुकाल म ओह तोला मिरतू ले, अऊ लड़ई म तलवार के वार ले बचाही।

[21] तेंह जीभ ले निकले बचन के मार ले बचाय जाबे, अऊ जब बिनास ह तोर ऊपर आवय, त तोला डरे के जरूरत नइं ए।

[22] तेंह बिनास अऊ दुकाल के बेरा म हंसबे, अऊ जंगली पसुमन ले तोला डर नइं होही।

[23] काबरकि मैदान के पथरामन संग तोर एक करार होही, अऊ जंगली पसुमन तोर मितान सहीं होहीं।

[24] तेंह जानबे कि तोर डेरा ह कुसल हवय; तेंह अपन संपत्ति के जांच करबे अऊ तोर कुछू चीज गंवाय नइं रहिही।

[25] तेंह ये घलो जानबे कि तोर लइकामन अब्बड़ होहीं, अऊ तोर संतानमन भुइयां के कांदी सहीं बहुंत होहीं।

[26] जइसे कि समय म बीड़ा ला खरही गांजे जाथे, वइसे ही तेंह तोर पूरा उमर होय के बाद ही मरबे।

[27] “हमन येला परखके देख डारे हन, अऊ येह सच अय। एकरसेति येला सुन, अऊ येला अपन जिनगी म लागू कर।”

अयूब — Chapters