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[1] तब सूही के रहइया बिलदद ह जबाब दीस:

[2] “तेंह कब ये भासन ला खतम करबे? समझदार बन, अऊ तभे हमन गोठियाय सकथन।

[3] हमन काबर पसु सहीं समझे जावत हन अऊ तोर नजर म मुरूख ठहिरे हन?

[4] तें जऊन ह अपन रिस म अपनआप ला कुटा-कुटा करत हस, का तोर कारन धरती ला तियाग दिये जावय? या फेर चट्टानमन अपन जगह ले हट जावंय?

[5] “दुस्ट मनखे के दीया ह बुता जाथे; ओकर आगी के जुवाला निकलई ह बंद हो जाथे।

[6] दुस्ट मनखे के डेरा म अंजोर ह अंधियार हो जाथे, ओकर ऊपर म टांगे दीया ह बुता जाथे।

[7] ओकर गोड़ के बल ह कमजोर हो जाथे; ओकर खुद के युक्ति ह ओला ले बुड़थे।

[8] ओकर पांव ह ओला जाल म फंसोथे; ओह जाल म फंसके एती-ओती होथे।

[9] फांदा ह ओकर एड़ी ला जकड़ लेथे; जाल ह ओला कसके पकड़ लेथे।

[10] भुइयां म ओकर बर एक फांदा छिपे हवय; एक जाल ह ओकर रसता म हवय।

[11] आतंक ह ओला जम्मो कोति ले चउंकाथे अऊ ओला पकड़े बर ओकर हर कदम के पीछा करथे।

[12] बिपत्ति ह ओकर बर भूखन हवय; जब ओह गिरथे, त बिपत्ति ह ओकर बर तियार रहिथे।

[13] येह ओकर चाम के भागमन ला खा जाथे; मिरतू के रोग ह ओकर देहें के अंगमन ला खा लेथे।

[14] ओह अपन डेरा के सुरकछा ले चीर डाले जाथे अऊ आतंक के राजा करा लाने जाथे।

[15] आगी ह ओकर डेरा म रहिथे; बरत गंधक ला ओकर निवास म छितराय जाथे।

[16] ओकर जरी ह खाल्हे ले सूखा जाथे अऊ ऊपर म ओकर डारामन मुरझा जाथें।

[17] धरती ले ओकर सुरता ह मिट जाथे; देस म ओकर नांव नइं रहय।

[18] ओला अंजोर ले अंधियार के जगह म भगाय जाथे अऊ ओला संसार ले हटा दिये जाथे।

[19] अपन मनखेमन के बीच म, ओकर कोनो संतान नइं रहंय, जिहां ओह रहत रिहिस, उहां ओकर कोनो नइं बचंय।

[20] पछिम के मनखेमन ओकर दुरदसा ला देखके डराथें; पूरब के मनखेमन ऊपर भयंकर भय छा जाथे।

[21] खचित, दुस्ट मनखे के निवास ह अइसने ही होथे; जऊन ह परमेसर ला नइं जानय, ओकर जगह ह अइसने होथे।”

अयूब — Chapters