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[1] चांदी ह खदान म मिलथे अऊ सोन ला सुध करे बर एक जगह होथे।

[2] माटी म ले लोहा निकाले जाथे, अऊ तांबा ह धातु ला गलाय ले मिलथे।

[3] मरनहार मनखेमन अंधियार के अन्त कर देथें; ओमन बहुंत दूर तक कोना-कोना म घोर अंधियार म धातु के खोज करथें।

[4] मनखेमन के बसेरा ले बहुंत दूरिहा ओमन खदान खनथें, जिहां मनखेमन के गोड़ घलो नइं परे रहय; आने मनखेमन ले बहुंत दूर ओमन ओरमे अऊ झूलत रहिथें।

[5] धरती, जिहां ले फसल आथे, ओकर खाल्हे के रूप ह आगी के दुवारा बदलत हवय।

[6] येकर चट्टानमन म ले नीलमनि, अऊ येकर धुर्रा म सोन के कन पाय जाथे।

[7] ओ छुपे रद्दा ला कोनो सिकार करइया चिरई नइं जानय, येकर ऊपर कोनो बाज चिरई के आंखी नइं परे हवय।

[8] येमा जंगली पसुमन अपन गोड़ नइं रखंय, अऊ कोनो सेर उहां छुपके घलो नइं जावय।

[9] मनखेमन कठोर चट्टान ऊपर अपन हांथ ले ठोकर मारथें अऊ पहाड़मन के नीव ला उखानके हटा देथें।

[10] ओमन चट्टान म ले सुरंग निकाल लेथें; ओमन के आंखी ह येकर खजाना ला देखथे।

[11] ओमन नदीमन के सोतमन ला खोजथें अऊ छुपे चीजमन ला सब के आघू म लानथें।

[12] पर बुद्धि ह कहां मिल सकथे? ओ जगह कहां हवय, जिहां समझ ह रहिथे।

[13] कोनो मरनहार मनखे येकर कीमत नइं जान सकय; येह जीयत परानीमन के लोक म नइं मिलय।

[14] समुंदर के गहरई ह कहिथे, “बुद्धि ह मोर म नइं ए”; समुंदर ह कहिथे, “बुद्धि ह मोर करा नइं ए।”

[15] चोखा सोन ले येला बिसाय नइं जा सकय, अऊ न ही येकर कीमत बर चांदी ला तऊले जा सकथे।

[16] येला ओपीर के सोन ले बिसाय नइं जा सकय, येला कीमती गोमेदक या नीलमनि ले घलो बिसाय नइं जा सकय।

[17] न सोन, न कांच के तुलना येकर संग करे जा सकथे, न ही सोन के जेवर के बलदा म येह मिल सकथे।

[18] मूंगा अऊ मनि के येकर आघू म चरचा करई ह बेकार अय; बुद्धि के कीमत ह मानिक ले घलो बढ़के अय।

[19] कूस के पुखराज के तुलना येकर संग करे नइं जा सकय; येला चोखा सोन ले बिसाय नइं जा सकय।

[20] त फेर बुद्धि ह कहां ले आथे? समझ ह कहां रहिथे?

[21] येह हर एक जीयत चीज के आंखी ले छुपे हवय, अऊ त अऊ अकास के चिरईमन के आंखी घलो येला नइं देख सकंय।

[22] बिनास अऊ मिरतू कहिथें, “सिरिप येकर अफवाह ला हमन सुने हवन।”

[23] परमेसर ह येकर रद्दा ला समझथे अऊ सिरिप ओही ह येकर रहे के जगह ला जानथे,

[24] काबरकि ओह धरती के छोर तक नजर रखथे अऊ अकास के खाल्हे के हर एक चीज ला देखथे।

[25] जब ओह हवा के ताकत ला स्थापित करिस अऊ पानी ला नापिस,

[26] जब ओह बरसा होय के नियम अऊ बादर के गरजन के रद्दा ठहिराईस,

[27] तब ओह बुद्धि ला देखिस अऊ येकर दाम आंकिस; ओह येकर पुस्टि करिस अऊ येला जांचिस।

[28] अऊ परमेसर ह मनखे-जात ला कहिस, “परभू के भय मनई ह बुद्धि अय, अऊ बुरई ले दूरिहा रहई ह समझ अय।”

अयूब — Chapters