[1] “मेंह ये जम्मो ला अपन आंखी ले देखे हवंव, मेंह येला अपन कान ले सुने अऊ समझ गे हवंव।
[2] जऊन कुछू तुमन जानत हव, ओला मेंह घलो जानत हंव; मेंह तुमन ले कम नो हंव।
[3] पर मेंह तो सर्वसक्तिमान परमेसर ले बात करे चाहत हंव अऊ मोर हालत के बारे म परमेसर ले बहस करे चाहत हंव।
[4] तुमन तो मोर ऊपर लबारी गोठ के धब्बा लगावत हव; तुमन जम्मो झन बेकार के बईद अव।
[5] कास! तुमन एकदम चुप रहितेव! तुम्हर बर ओह बुद्धिमानी होतिस।
[6] अब मोर बहस ला सुनव; मोर तर्क के बात ला धियान देके सुनव।
[7] का तुमन परमेसर बर खराप बात कहिहू? का तुमन ओकर बर कपट ले भरे गोठ गोठियाहू?
[8] का तुमन ओकर संग पखियपात करहू? का तुमन परमेसर बर बहस करहू?
[9] कहूं ओह तुमन ला जांचय, त का येह बने होही? का तुमन ओला कोनो मनखे ला धोखा देय सहीं धोखा दे सकत हव?
[10] कहूं तुमन गुपत म पखियपात करहू, त ओह खचित तुम्हर ले लेखा लीही।
[11] का ओकर सोभा तुमन ला भयभीत नइं करही? का ओकर डर तुमन म नइं समाही?
[12] तुम्हर कहावतमन राख के नीतिबचन अंय; तुम्हर सुरकछा के गढ़मन माटी के गढ़ अंय।
[13] “चुप रहव अऊ मोला गोठियावन दव; फेर चाहे जऊन कुछू मोर ऊपर आवय, त आवय।
[14] काबर मेंह अपनआप ला जोखिम म डारंव अऊ अपन परान ला अपन हथेली म ले लंव?
[15] चाहे परमेसर ह मोला मार घलो डारय, तभो ले मेंह ओकर ऊपर आसा रखहूं; मेंह खचित ओकर आघू म अपन बात के बचाव करहूं।
[16] वास्तव म, इही ह मोर छुटकारा के कारन होही, काबरकि भक्तिहीन मनखे ह ओकर आघू म आय के हिम्मत नइं कर सकय!
[17] मोर बात ला धियान देके सुनव; मोर बचन ह तुम्हर कान म एकदम पड़य।
[18] अब मेंह अपन मामला तियार कर लेय हंव, मेंह जानत हंव कि मोला नियाय मिलही।
[19] का कोनो मोर ऊपर दोस लगा सकथे? कहूं कोनो मोला दोसी ठहिरा देवय, त मेंह चुप हो जाहूं अऊ मर जाहूं।
[20] “हे परमेसर! सिरिप मोर दू ठन मांग ला पूरा कर दे, अऊ तब मेंह तोर ले नइं लुकावंव:
[21] तोर ताड़ना के हांथ ला मोर ऊपर ले हटा ले, अऊ अपन आतंक ले मोला डराना बंद कर दे।
[22] तब मोला बला अऊ मेंह जबाब दूहूं, या फेर मोला गोठियावन दे, अऊ तें मोला ओकर जबाब दे।
[23] मेंह कतेक गलती अऊ पाप करे हवंव? मोला मोर अपराध अऊ मोर पाप ला बता।
[24] तेंह अपन चेहरा ला काबर लुकावत हस अऊ मोला अपन बईरी समझत हस?
[25] का तेंह हवा म उड़ियावत रूख के पान ला दुख देबे? या का तेंह सूखाय भूंसा के पाछू पड़बे?
[26] तेंह मोर बिरोध म करू गोठमन ला लिखत हवस, अऊ मोर जवानी के पाप के फल मोला भुगतात हवस।
[27] तेंह मोर गोड़ म बेड़ी पहिरा दे हवस; तेंह मोर गोड़ के तरवा म चिनहां देके मोर जम्मो चालचलन ला धियान ले देखत रहिथस।
[28] “अइसने मनखे ह तो सरे-गले चीज सहीं बेकार हो जाथे, जइसने कि कोनो ओनहा ला कीरामन खा डारे हवंय।