[1] तब एलीहू ह आगे कहिस:
[2] “हे बुद्धिमान मनखेमन, मोर बात ला सुनव; हे गियानी मनखेमन, मोर बात म कान लगावव।
[3] काबरकि जइसे जीभ ले जेवन चखे जाथे, वइसनेच ही कान ह गोठमन ला परखथे।
[4] सही का ए, आवव, हमन ओला समझन; भलई का ए, आवव हमन ओला एक संग सीखन।
[5] “काबरकि अयूब ह ये कहिथे, ‘मेंह निरदोस अंव, पर परमेसर ह मोर संग नियाय नइं करत हे।
[6] हालाकि मेंह सही अंव, पर मेंह लबरा समझे जावत हंव; हालाकि मेंह अपराधी नो हंव, पर ओकर तीर ह मोला असाध्य घाव देवत हे।’
[7] का कोनो अयूब कस हवय, जऊन ह अपमान ला पानी कस पी जाथे?
[8] ओह कुकरमीमन के संग म रहिथे; ओह दुस्ट मनखेमन के संगति करथे।
[9] काबरकि ओह कहिथे, ‘परमेसर ला खुस करे के कोसिस करे म कोनो फायदा नइं ए।’
[10] “एकरसेति, हे समझदार मनखेमन, मोर बात सुनव। येह संभव नो हय कि परमेसर ह बुरई करय, सर्वसक्तिमान ह गलत करय।
[11] ओह हर कोनो ला ओमन के काम के मुताबिक फर देथे; ओह ओमन के चालचलन के मुताबिक ओमन ले बरताव करथे।
[12] ये सोचे घलो नइं जा सकय कि परमेसर ह गलत करही, ये कि सर्वसक्तिमान ह नियाय ला बिगाड़ही।
[13] कोन ह ओला धरती ऊपर नियुक्त करे हवय? कोन ह ओला जम्मो संसार के जबाबदारी दे हवय।
[14] कहूं येह ओकर इरादा होतिस अऊ ओह अपन आतमा अऊ अपन सांस ला वापिस ले लेतिस,
[15] त जम्मो मानव-जाति एक संग नास हो जातिस अऊ मनखे ह फेर धुर्रा म मिल जातिस।
[16] “कहूं तोर म समझ हवय, त सुन; मेंह का कहत हंव, ओला सुन।
[17] जऊन ह नियाय के बईरी ए, का ओह सासन कर सकथे? का तेंह धरमी अऊ बलसाली ला दोसी ठहिराबे?
[18] का येह ओ नो हय, जऊन ह राजामन ला कहिथे, ‘तुमन निकम्मा अव,’ अऊ परधानमन ला कहिथे, ‘तुमन दुस्ट अव,’
[19] परमेसर ह राजकुमारमन के तरफदारी नइं करय अऊ न ही धनवान ला गरीब ले जादा महत्व देथे, काबरकि ओ जम्मो झन परमेसर के हांथ के कारीगरी अंय।
[20] ओमन छिन भर म, आधा रथिया के मर जाथें; मनखेमन कांपथें अऊ मर जाथें; परतापी मनखेमन बिगर हांथ लगाय नास हो जाथें।
[21] “परमेसर के आंखी ह मनखे के चालचलन के ऊपर लगे रहिथे; ओह ओमन के पग-पग ला देखत रहिथे।
[22] अइसे कोनो घोर अंधियार या घिटके अंधियार नइं ए, जिहां दुराचारीमन लुका सकंय।
[23] परमेसर बर मनखेमन ला अऊ परखना जरूरी नो हय, कि ओमन नियाय बर ओकर आघू म ठाढ़ होवंय।
[24] बिगर छानबीन करे ओह बलवानमन ला चूर-चूर करथे अऊ ओमन के जगह म आने मनखे ला ठाढ़ कर देथे।
[25] काबरकि ओह ओमन के करनी ला जानथे, ओह ओमन ला रथिया फटिक देथे अऊ ओमन चकनाचूर हो जाथें।
[26] ओह ओमन ला ओमन के दुस्टता के सजा उहां देथे जिहां जम्मो झन ओमन ला देख सकंय,
[27] काबरकि ओमन ओकर पाछू रेंगई ला छोंड़ दे हवंय अऊ ओकर कोनो कानून के आदर नइं करंय।
[28] ओमन के कारन गरीबमन के गोहार ह परमेसर करा हबरिस, अऊ ओह जरूरतमंद मनखे के गोहार ला सुनिस।
[29] पर कहूं ओह चुप रहय, त कोन ह ओला दोसी ठहिरा सकत हे? कहूं ओह अपन चेहरा ला छुपाय, त कोन ह ओला देख सकत हे? चाहे एक झन मनखे होवय या मनखेमन के जाति, ओह जम्मो के संग एक समान बरताव करथे,
[30] ताकि भक्तिहीन मनखे ह राज झन करय अऊ मनखेमन फांदा म झन फंसय।
[31] “मान लव, कोनो मनखे परमेसर ला कहिथे, ‘मेंह दोसी अंव पर अब कभू अपराध नइं करंव।
[32] जऊन ला मेंह नइं देख सकंव, तेंह मोला ओ बात सिखा; कहूं मेंह गलती करे हंव, त मेंह अइसे फेर नइं करंव।’
[33] त का परमेसर ह तोर सर्त के मुताबिक तोला परतिफल दीही, जबकि तेंह प्रायस्चित करे बर इनकार करथस? तें फैसला कर, में नइं; मोला बता कि तेंह का जानथस।
[34] “समझदार मनखेमन बताथें, बुद्धिमान मनखे जऊन मन मोर सुनथें, मोला कहिथें,
[35] ‘अयूब ह बिगर गियान के गोठियाथे; ओकर बात म समझ नइं दिखय।’
[36] बने होतिस, कि अयूब ह आखिरी तक परखे जातिस काबरकि ओह दुस्ट मनखे कस जबाब देथे!
[37] ओह अपन पाप के संगे-संग बिदरोह घलो करथे; तिरस्कार करके, ओह हमर बीच म ताली बजाथे अऊ परमेसर के बिरोध म बहुंत बात कहिथे।”