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[1] “का तेंह जानथस कि पहाड़ के जंगली छेरीमन कब पीला देथें? का तेंह देखथस कि हिरनी ह कब पीला देथे?

[2] का तेंह ओमन के गरभ धारन करे के महिनामन ला गनथस? का तेंह ओमन के जनम देय के समय ला जानथस?

[3] ओमन निहरके अपन पीला ला जनमथें; अऊ ओमन के लइका जनमे के पीरा ह खतम हो जाथे।

[4] ओमन के पीलामन जंगल म बाढ़थें अऊ मजबूत होवत जाथें; ओमन चल देथें अऊ फेर लहुंटके नइं आवंय।

[5] “कोन ह जंगली गदहामन ला खुला छोंड़ देथे? कोन ह ओमन के बंधना ला खोल दीस?

[6] ओमन ला मेंह ओमन के घर बर सुन्ना जगह, अऊ ओमन के निवास बर नूनचूर ऊसर भुइयां देय हवंव।

[7] ओमन तो सहर के कोलाहल ऊपर हांसथें; ओमन गदहा खेदइया के हांका ला नइं सुनंय।

[8] ओमन अपन चारा बर पहाड़मन म किंदरथें अऊ हरियर-हरियर चारा खोजत रहिथें।

[9] “का जंगली बईला ह तोर सेवा करे बर सहमती दीही? का ओह तोर कोटना के तीर म रात बिताही?

[10] का तेंह जंगली बईला ला डोरी ले बांधके नांगर जोत सकथस? का ओह तोर पाछू घाटी म पाटा ला खींचही?

[11] का तेंह ओकर बड़े बल के सेति ओकर ऊपर भरोसा करबे? का तेंह अपन मेहनत के काम ला ओकर ऊपर छोंड़ देबे?

[12] का तेंह ओकर ऊपर भरोसा करबे कि ओह तोर अनाज ला लानय अऊ लानके तोर कोठार म रखय?

[13] “सुतुरमुर्ग ह अपन डेनामन ला आनंद म फड़फड़ाथे, हालाकि ओमन के तुलना सारस के डेना अऊ पांखीमन ले नइं करे जा सकय।

[14] सुतुरमुर्ग ह तो अपन अंडा भुइयां म देथे अऊ ओमन ला धुर्रा के गरमी ह सेथे,

[15] ओला धियान नइं रहय कि ओमन काकरो गोड़ ले कुचरे जा सकथें, या कोनो जंगली पसु ओमन ला कुचर सकथे।

[16] ओह अपन पीलामन ले कठोर बरताव करथे, मानो कि ओमन ओकर पीला नो हंय; ओह फिकर नइं करय कि ओकर मेहनत ह बेकार रिहिस,

[17] काबरकि परमेसर ह ओला बुद्धि नइं देय हवय या ओला बने समझ नइं देय हवय।

[18] तभो ले जब ओह दऊड़े बर अपन डेना ला बगराथे, त ओह घोड़ा अऊ ओकर सवारी करइया ऊपर हांसथे।

[19] “का तेंह घोड़ा ला ओकर बल देथस या का तेंह ओकर घेंच म उड़त लम्बा बाल पहिराय हस?

[20] का तेंह ओला फांफा कस उचके के बल देथस, जेकर फुंफकारे के अवाज ह आतंक फईला देथे?

[21] ओह अपन बल ऊपर आनंद मनात, अपन खुर ले भुइयां ला खुरचथे, अऊ लड़ई के सामना करथे।

[22] ओह बिगर कोनो भय के, डर के ऊपर हंसथे; ओह तलवार ला देखके पाछू नइं घुंचय।

[23] तरकस ह अपन किनारा के बिरूध चमकत बरछी अऊ भाला के संग खड़खड़ाथे।

[24] उत्तेजित होके रिस के मारे, ओह भुइयां ला छेदथे; अऊ तुरही के अवाज सुनके ओह सीधा ठाढ़ नइं होवय।

[25] तुरही के अवाज म ओह हिनहिनाथे, ‘अहा!’ ओह दूरिहाच ले लड़ई के गंध ला सुंघ लेथे, अऊ सेनापतिमन के ललकार अऊ लड़ई के गरजन ला सुन लेथे।

[26] “का बाज चिरई ह तोर बुद्धि के दुवारा उड़थे अऊ दक्खिन कोति उड़े बर अपन डेनामन ला बगराथे?

[27] का गिधवा ह तोर हुकूम ले बहुंत ऊपर म उड़थे अऊ अपन खोंधरा ला ऊंच जगह म बनाथे?

[28] ओह निकले चट्टान के चोटी म रहिथे अऊ उहां रात बिताथे; खड़े चट्टान ह ओकर घर अय।

[29] उहां ले ओह अपन जेवन के ताक म रहिथे; ओकर आंखी ह दूरिहा ले ही ओला देख लेथे।

[30] ओकर पीलामन खून ला मजा लेके पीथें, अऊ जिहां लास रहिथे, उहां ओह घलो होथे।”

अयूब — Chapters