[1] “मेंह अपन जिनगी ले घिन करथंव; एकरसेति मेंह खुलके सिकायत करहूं अऊ अपन मन के करूवाहट ले गोठियाहूं।
[2] मेंह परमेसर ला कहिथंव: मोला दोसी झन ठहिरा, पर मोला बता कि मेंह तोर बिरोध म का अपराध करे हंव।
[3] का मोला सताना, अपन हांथ के काम ला तुछ जानना तोला बने लगथे, जबकि दुस्टमन के बनाय योजना ऊपर तेंह हांसथस?
[4] का तोर आंखीमन मनखे के आंखी कस हवंय? का तेंह वइसने देखथस, जइसने मनखेमन देखथें?
[5] का तोर उमर के दिन ह मनखे के दिन कस छोटे अय या का तोर बछर ह मनखे के बछर सहीं अय,
[6] कि तेंह मोर गलतीमन ला खोजबे अऊ मोर पाप के जांच-पड़ताल करबे—
[7] हालाकि तेंह जानत हस कि मेंह दोसी नो हंव अऊ ये घलो कि तोर हांथ ले मोला कोनो बचाय नइं सकय?
[8] “तोर हांथमन मोला रूप देय हवंय अऊ मोला बनाय हवंय। तभो ले का तेंह मोला नास कर देबे?
[9] सुरता कर कि तेंह मोला माटी ले बनाय हवस। का तेंह मोला फेर धुर्रा म मिला देबे?
[10] का तेंह मोला दूध के सहीं नइं रितोय अऊ दही के सहीं नइं जमाय?
[11] का तेंह मोर ऊपर मांस अऊ चमड़ी नइं चघाय अऊ हाड़ा अऊ नसमन ला एक संग बुनके मोला नइं बनाय?
[12] तेंह मोला जिनगी देय अऊ मोर ऊपर दया करय, अऊ तोर किरपा के कारन मोर आतमा के देखरेख होय हवय।
[13] “पर तेंह अपन हिरदय म ये बातमन ला लुकाके राखे हवस, अऊ मेंह जानथंव कि येह तोर मन म रिहिस:
[14] कहूं मेंह कोनो पाप करेंव, त तेंह ओला देखत होबे अऊ मोला बिगर सजा दिये नइं छोंड़बे।
[15] कहूं मेंह दोसी अंव, त दुख-तकलीफ मोर ऊपर आवय, अऊ कहूं मेंह निरदोस घलो होवंव, तभो ले मेंह अपन मुड़ उठा नइं सकंव, काबरकि मेंह बहुंत लज्जित हंव अऊ अपन पीरा म मरत हंव।
[16] यदि मेंह अपन मुड़ ला उठावंव, त तेंह सेर के सिकार करे सहीं लुकाके मोर पीछा करथस अऊ फेर तेंह मोर बिरोध म अपन अद्भूत बल देखाथस।
[17] तेंह मोर बिरोध म नवां गवाहमन ले आथस अऊ मोर ऊपर अपन रिस ला बढ़ाथस अऊ बाधा के ऊपर बाधा मोर बिरोध म ले आथस।
[18] “फेर तेंह मोला गरभ ले निकाले काबर? बने होतिस, काकरो देखे के पहिली, मेंह मर गे रहितेंव,
[19] मोर रचना नइं होय रहितिस, या सीधा गरभ ले कबर म अमराय गे रहितेंव!
[20] का मोर बांचे जिनगी के दिनमन थोरकून नइं ए? मोला छोंड़ दे कि मेंह आनंद के कुछू समय बीता सकंव
[21] येकर पहिली कि मेंह ओ जगह म जावंव, जिहां ले कोनो नइं लहुंटंय, ओ जगह, जिहां अंधियार अऊ भारी अंधियार हवय,
[22] याने ओ जगह, जिहां घोर रथिया, भारी अंधियार अऊ गड़बड़ हवय, अऊ त अऊ जिहां अंजोर ह घलो अंधियार सहीं अय।”