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[1] “मेंह अपन आंखीमन के संग करार करे हंव कि मेंह कोनो जवान माईलोगन ला लालसा ले नइं देखंव।

[2] स्वरग ले परमेसर के दुवारा हमन ला का बांटा मिले हे, या ऊंच म बिराजे सर्वसक्तिमान ले हमन ला मिले संपत्ति का ए?

[3] का येह दुस्टमन बर बिनास, अऊ गलत करइयामन बर बिपत्ति नो हय?

[4] का परमेसर ह मोर चालचलन ला नइं देखय अऊ मोर कदम-कदम ला नइं गनय?

[5] “कहूं मेंह लबारी आचरन करे हंव या मोर गोड़ ह धोखा देय बर दऊड़े हे—

[6] त परमेसर ह मोला सच के तराजू म तऊल लेवय अऊ ओह जान लेवय कि मेंह निरदोस अंव—

[7] कहूं मोर कदम ह ओकर डहार ले भटक गे हवय, कहूं मोर मन ह मोर आंखी के मुताबिक चले हवय, या कहूं मोर हांथमन असुध हो गे हवंय,

[8] त जऊन कुछू मेंह बोये हंव, ओला आने मन खावंय, अऊ मोर फसल ला उखान दिये जावय।

[9] “कहूं मोर मन ह कोनो माईलोगन के दुवारा बहकाय गे हे, या कहूं मेंह अपन परोसी के मुंहटा म घात लगाके बईठे हंव,

[10] त मोर घरवाली ह आने आदमी के अनाज पीसय, अऊ आने आदमीमन ओकर संग सुतंय।

[11] काबरकि ओह दुस्ट काम होतिस, अऊ नियायधीस के दुवारा पाप के दंड मिलतिस।

[12] येह एक आगी ए, जऊन ह जलाके भसम कर देथे; येह मोर कटनी के फसल ला जरी ले उखान देतिस।

[13] “कहूं मेंह अपन कोनो सेवक के संग अनियाय करे हंव, चाहे दास हो या दासी, जब ओमन मोर बिरोध म मोर करा सिकायत करिन,

[14] तब में का करहूं, जब परमेसर ह मोर ले जबाब मांगही? मेंह का जबाब दूहूं, जब ओह मोर ले लेखा लीही?

[15] जऊन ह मोला दाई के गरभ म बनाईस, का ओहीच ह ओमन ला नइं बनाईस? का ओही ह हमन दूनों ला हमर दाईमन के गरभ म नइं रचिस?

[16] “कहूं मेंह गरीबमन के ईछा ला पूरा नइं करे हंव या मोर कारन बिधवामन म निरासा छा गीस,

[17] कहूं मेंह खाना खाय म सुवारथी हो गे हंव, अऊ खाना ला अनाथमन संग नइं बांटे हंव—

[18] पर में तो ओमन ला अपन जवानी ले अइसे पालें-पोसें, जइसे एक ददा ह करथे, अऊ मेंह अपन लइकापन ले ही बिधवा ला रसता देखावत हंव—

[19] कहूं मेंह कोनो ला ओनहा के कमी के कारन नास होवत देखेंव, या कोनो जरूरतमंद ला बिगर ओनहा के देखेंव,

[20] त ओमन ला मेंह अपन भेड़ के ऊन ले गरम रखे के कारन ओमन मोला हिरदय ले आसीरबाद नइं दे हवंय,

[21] कहूं मेंह अनाथमन ऊपर अपन हांथ उठाय हंव, ये जानके कि अदालत म मोर पहुंच हवय,

[22] त मोर बाहां ह कंधा ले उखनके गिर जावय, येह कोहनी ले टूटके अलग हो जावय।

[23] काबरकि मेंह परमेसर कोति ले अवइया बिनास ले डरेंव, अऊ ओकर सोभा के डर के कारन मेंह अइसे नइं कर सकेंव।

[24] “कहूं मेंह अपन भरोसा सोन ऊपर रखे हंव या चोखा सोन ले कहे हंव, ‘तेंह मोर आसरा अस,’

[25] कहूं मेंह अपन बहुंत धन, या अपन हांथ के बहुंत कमई ऊपर आनंद मनाय हंव,

[26] कहूं मेंह सूरज के चमकई, या चंदा ला सोभा म चलत देखेंव,

[27] ताकि मोर मन ह मोहा गीस अऊ ओमन के भक्ति म मोर हांथ के चूमा लेय हंव,

[28] त ये पापमन के घलो दंड मिलतिस, काबरकि तब मेंह ऊपर म बिराजे परमेसर के इनकार करे रहितेंव।

[29] “कहूं मेंह अपन बईरी के दुरभाग्य म आनंद मनाय हंव या ओकर ऊपर आय बिपत्ति ला देखके खुस होय हंव—

[30] मेंह ओमन ला मरे के सराप देय के दुवारा अपन मुहूं ले पाप नइं करे हंव—

[31] कहूं मोर घर म रहइया मनखेमन ये कभू नइं कहे हवंय, ‘कोन ह अयूब के इहां खाके संतोस नइं होईस?’—

[32] पर कोनो अजनबी ला गली म रथिया बिताना नइं परिस, काबरकि मोर घर के मुंहटा ह बटोहीमन बर हमेसा खुला रिहिस—

[33] अपन मन म अपन अपराध ला छुपाय के दुवारा कहूं मेंह आने मनखेमन सहीं अपन पाप ला छुपाय हंव,

[34] काबरकि मोला मनखेमन के भीड़ ले डर लगिस अऊ अपन कुल के अपमान ले अइसे डर गेंव कि मेंह चुप रहेंव अऊ घर ले बाहिर नइं निकलेंव—

[35] (“आह, कि कोनो तो मोर बात के सुनइया रिहिस! मेंह अब अपन बचाव के दसखत करत हंव—सर्वसक्तिमान ह मोला जबाब देवय; मोर ऊपर दोस लगइया ह मोर दोस ला लिखित म देवय।

[36] खचित मेंह येला अपन खांध म उठाहूं, मेंह येला मुकुट कस पहिरहूं।

[37] मेंह ओला अपन हर कदम के हिसाब दूहूं; जइसे सासन करइया के आघू म मामला रखथें, वइसे मेंह येला ओकर आघू म रखहूं।)—

[38] “कहूं मोर भुइयां ह मोर बिरोध म पुकारथे अऊ नांगर ले बने येकर जम्मो घारीमन रोथें,

[39] कहूं मेंह बिगर दाम चुकाय येकर ऊपज ला खा गे हंव या येकर मालिक के मरे के कारन बने हंव,

[40] त गहूं के बलदा म कंटिली झाड़ी अऊ जवांर के बलदा म खरपतवार उगय।” अयूब के गोठ ह खतम होईस।

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