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[1] याहवेह शासक हैं, राष्ट्र कांपते रहें; उन्होंने अपना आसन करूबों के मध्य स्थापित किया है, पृथ्वी कांप जाए.

[2] ज़ियोन में याहवेह तेजस्वी हैं; वह समस्त राष्ट्रों के ऊपर बसा हैं.

[3] उपयुक्त है उनका आपके महान और भय-योग्य नाम की वंदना करना— पवित्र हैं वह.

[4] राजा शक्ति-सम्पन्न हैं, वह जो न्याय को प्रिय मानता है, उन्होंने इस्राएल में समता की स्थापना की है; जो न्याय संगत और उचित है.

[5] याहवेह, हमारे परमेश्वर की महिमा की जाए, उनके चरणों में गिर आराधना की जाए; वह पवित्र हैं.

[6] मोशेह और अहरोन उनके पुरोहित थे, शमुएल उनके आराधक थे; ये सभी याहवेह को पुकारते थे और वह उन्हें उत्तर देते थे.

[7] मेघ-स्तंभ में से याहवेह ने उनसे वार्तालाप किया; उन्होंने उनके अधिनियमों तथा उनके द्वारा सौंपे गए आदेशों का पालन किया.

[8] याहवेह, हमारे परमेश्वर, आप उन्हें उत्तर देते थे; इस्राएल के लिए आप क्षमा शील परमेश्वर रहे, यद्यपि आप उनके अपराधों का दंड देते रहे.

[9] याहवेह, हमारे परमेश्वर की महिमा को ऊंचा करो, उनके पवित्र पर्वत पर उनकी आराधना करो, क्योंकि पवित्र हैं हमारे याहवेह, परमेश्वर.

स्तोत्र — Chapters