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[1] स्वर्गदूत, याहवेह की महिमा करो, उनके तेज तथा सामर्थ्य की महिमा करो.

[2] याहवेह को उनके नाम के अनुरूप महिमा प्रदान करो; उनकी पवित्रता की भव्यता में याहवेह की आराधना करो.

[3] महासागर की सतह पर याहवेह का स्वर प्रतिध्वनित होता है; तेजी परमेश्वर का स्वर गर्जन समान है, याहवेह प्रबल लहरों के ऊपर गर्जन करते हैं.

[4] शक्तिशाली है याहवेह का स्वर; भव्य है याहवेह का स्वर.

[5] याहवेह का स्वर देवदार वृक्ष को उखाड़ फेंकता है; याहवेह लबानोन के देवदार वृक्षों को टुकड़े-टुकड़े कर डालते हैं.

[6] याहवेह लबानोन को बछड़े जैसे उछलने, तथा हर्मोन को वन्य सांड जैसे, उछलने के लिए प्रेरित करते हैं.

[7] याहवेह के स्वर का प्रहार, बिजलियों के समान होता है.

[8] याहवेह के स्वर वन को हिला देता है; याहवेह कादेश के वन को हिला देते हैं.

[9] याहवेह के स्वर से हिरणियों का गर्भपात हो जाता है; उनके स्वर से वन में पतझड़ हो जाता है. तब उनके मंदिर में सभी पुकार उठते हैं, “याहवेह की महिमा ही महिमा!”

[10] ढेर जल राशि पर याहवेह का सिंहासन बसा है; सर्वदा महाराजा होकर वह सिंहासन पर विराजमान हैं.

[11] याहवेह अपनी प्रजा को बल प्रदान करते हैं; याहवेह अपनी प्रजा को शांति की आशीष प्रदान करते हैं.

स्तोत्र — Chapters