[1] परमेश्वर, आपने हमें शोकित छोड़ दिया, मानो आप हम पर टूट पड़े हों; आप हमसे क्रोधित हो गए हैं. अब हमें पुन: अपना लीजिए!
[2] आपने पृथ्वी को कंपाया था, धरती फट गई थी; अब जोड़कर इसे शांत कर दीजिए, क्योंकि यह कांप रही है.
[3] आपने अपनी प्रजा को विषम परिस्थितियों का अनुभव कराया; आपने हमें पीने के लिए वह दाखमधु दी, जिसके सेवन से हमारे पांव लड़खड़ा गए,
[4] किंतु अपने श्रद्धालुओं के लिए आपने एक ध्वजा ऊंची उठाई है कि वह सत्य के प्रतीक स्वरूप प्रदर्शित की जाए.
[5] कि आपके प्रिय छुड़ा लिए जाएं, अपने दायें हाथ से हमें छुड़ाकर हमें उत्तर दीजिए.
[6] परमेश्वर ने अपनी पवित्रता में प्रगट किया है: “अपने हर्षातिरेक में मैं शेकेम को विभाजित करूंगा तथा मैं सुक्कोथ घाटी को नाप कर बंटवारा कर दूंगा.
[7] गिलआद पर मेरा अधिकार है, मनश्शेह पर मेरा अधिकार है; एफ्राईम मेरा सिर का रखवाला है, यहूदाह मेरा राजदंड है.
[8] मोआब राष्ट्र मेरे हाथ धोने का पात्र है, और एदोम राष्ट्र पर मैं अपनी पादुका फेंकूंगा; फिलिस्तिया मेरे लिए उच्च स्वर में जयघोष करे.”
[9] कौन ले जाएगा मुझे सुदृढ़-सुरक्षित नगर तक? कौन पहुंचाएगा मुझे एदोम नगर तक?
[10] परमेश्वर, क्या आप ही नहीं, जिन्होंने हमें अब शोकित छोड़ दिया है और हमारी सेनाओं को साथ देना भी छोड़ दिया है?
[11] शत्रु के विरुद्ध हमारी सहायता कीजिए, क्योंकि किसी भी मनुष्य द्वारा लाया उद्धार निरर्थक है.
[12] परमेश्वर के साथ मिलकर हमारी विजय सुनिश्चित होती है, वही हमारे शत्रुओं को कुचल डालते हैं.