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[1] बलवान घमंड, मत करो अपने बुराई का अहंकार! परमेश्वर की करुणा-प्रेम दिन भर प्रगट होती है.

[2] तेज उस्तरे जैसी तुम्हारी जीभ विनाश की बुरी युक्ति रचती रहती है, और तुम छल के कार्य में लिप्त रहते हो.

[3] तुम्हें भलाई की अपेक्षा अधर्म, और सत्य की अपेक्षा झूठाचार पसंद है.

[4] हे छली जीभ, तुझे तो हर एक बुराई शब्द प्रिय है!

[5] यह सुनिश्चित है कि परमेश्वर ने तेरे लिए स्थायी विनाश निर्धारित किया है: वह तुझे उखाड़कर तेरे निवास से दूर कर देंगे; परमेश्वर तुझे जीव-लोक से उखाड़ देंगे.

[6] यह देख धर्मी भयभीत हो जाएंगे; वे उसे देख यह कहते हुए उपहास करेंगे,

[7] “उस पुरुष को देखो, जिसने परमेश्वर को अपना आश्रय बनाना उपयुक्त न समझा परंतु उसने अपनी धन-संपत्ति पर भरोसा किया और अन्यों पर दुष्कर्म करते हुए सशक्त होता गया!”

[8] किंतु मैं परमेश्वर के निवास के हरे-भरे जैतून वृक्ष के समान हूं; मुझे परमेश्वर के करुणा-प्रेम पर सदा-सर्वदा भरोसा रखता हूं.

[9] परमेश्वर, मैं आपके द्वारा किए गए कार्यों के लिए सदा-सर्वदा आपका धन्यवाद करता रहूंगा. आपकी महिमा मेरा आश्वासन रहेगी, क्योंकि यह पवित्र है, आपके भक्तों के उपस्थिति में मैं आपकी वंदना करता रहूंगा.

स्तोत्र — Chapters