[1] याहवेह का स्तवन हो. धन्य है वह पुरुष, जो याहवेह के प्रति श्रद्धा-भय-भाव रखता है, जिसने उनके आदेशों के पालन में अधिक आनंद पाया है.
[2] उसके वंशजों का तेज समस्त पृथ्वी पर होगा; सीधे पुरुष की हर एक पीढ़ी धन्य होगी.
[3] उसके परिवार में संपत्ति और समृद्धि का वास है, सदा बनी रहती है उसकी सच्चाई और धार्मिकता
[4] सीधे लोगों के लिए अंधकार में भी प्रकाश का उदय होता है, वह उदार, कृपालु और धर्मी है.
[5] उत्तम होगा उस पुरुष का प्रतिफल, जो उदार है, जो उदारतापूर्वक ऋण देता है, जो अपने लेनदेन में सीधे है.
[6] यह सुनिश्चित है, कि वह कभी पथभ्रष्ट न होगा; धर्मी अपने पीछे स्थायी नाम छोड़ जाता है.
[7] उसे किसी बुराई के समाचार से भय नहीं होता; याहवेह पर भरोसा करते हुए उसका हृदय शांत और स्थिर बना रहता है.
[8] उसका हृदय सुरक्षा में स्थापित है, तब उसे कोई भय नहीं होता; अन्ततः वही शत्रुओं पर जयन्त होकर दृष्टि करेगा.
[9] उसने दरिद्रों को उदारतापूर्वक दान दिया है, सदा बनी रहती है उसकी सच्चाई और धार्मिकता; उसकी महिमा सदैव ऊंची होती रहती है.
[10] यह सब देखकर दुष्ट अत्यंत कुपित हो जाता है, वह दांत पीसता है और गल जाता है; दुष्ट की अभिलाषाएं अपूर्ण ही रह जाएंगी.