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[1] हमारा नहीं, याहवेह, हमारा नहीं परंतु आपका ही तेज हो, आपके करुणा-प्रेम और आपकी सच्चाई के निमित्त.

[2] अन्य राष्ट्र यह क्यों कह रहे हैं, “कहां है उनका परमेश्वर?”

[3] स्वर्ग में हैं हमारे परमेश्वर और वह वही सब करते हैं; जिसमें उनकी चाहत है.

[4] किंतु इन राष्ट्रों की प्रतिमाएं स्वर्ण एवं चांदी की हैं, जिन्हें मनुष्यों के हाथों ने रचा है.

[5] हां, उनका मुख अवश्य रचा गया है, किंतु ये बोल नहीं सकती, उनके आंखें अवश्य रचे गए हैं, किंतु ये देख नहीं सकती.

[6] उनके कान अवश्य रचे गए हैं, किंतु ये सुन नहीं सकती, नाक रची गई है, किंतु ये सूंघ नहीं सकती.

[7] इनके हाथ रचे गए हैं, किंतु ये स्पर्श नहीं कर सकती, पैर भी रचे गए हैं, किंतु ये चल फिर नहीं सकती, न ही ये अपने कण्ठ से कोई स्वर ही उच्चार सकती हैं.

[8] इनके समान ही हो जाएंगे इनके निर्माता, साथ ही वे सभी, जो इन पर भरोसा करते हैं.

[9] इस्राएल के वंशजों, याहवेह पर भरोसा करो; वही हैं तुम्हारे सहायक तथा रक्षक.

[10] अहरोन के वंशजों, याहवेह पर भरोसा करो; वही हैं तुम्हारे सहायक तथा रक्षक.

[11] याहवेह के भय माननेवालों, याहवेह में भरोसा रखे, याहवेह सहारा देता है और अपने अनुयायियों की रक्षा करता है.

[12] याहवेह को हमारा स्मरण रहता है, हम पर उनकी कृपादृष्टि रहेगी: याहवेह अपने लोग इस्राएल को आशीर्वाद देंगे, उनकी कृपादृष्टि अहरोन के वंश पर रहेगी.

[13] उनकी कृपादृष्टि उन सभी पर रहेगी, जिनमें याहवेह के प्रति श्रद्धा-भय-भाव है— चाहे वे साधारण हों अथवा विशिष्ट.

[14] याहवेह तुम्हें ऊंचा करें, तुम्हें और तुम्हारी संतान को.

[15] याहवेह की कृपादृष्टि तुम पर स्थिर रहे, जो स्वर्ग और पृथ्वी के रचनेवाले हैं.

[16] सर्वोच्च स्वर्ग के स्वामी याहवेह हैं, किंतु पृथ्वी उन्होंने मनुष्य को सौंपी है.

[17] वे मृतक नहीं हैं, जो याहवेह का स्तवन करते हैं, न ही जो चिर-निद्रा में समा जाते हैं;

[18] किंतु जहां तक हमारा प्रश्न है, हम याहवेह का गुणगान करते रहेंगे, इस समय तथा सदा-सर्वदा. याहवेह का स्तवन हो.

स्तोत्र — Chapters