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[1] याहवेह, मैं आपकी महिमा और प्रशंसा करूंगा, क्योंकि आपने मुझे गहराई में से बचा लिया है अब मेरे शत्रुओं को मुझ पर हंसने का संतोष प्राप्त न हो सकेगा.

[2] याहवेह, मेरे परमेश्वर, मैंने सहायता के लिए आपको पुकारा, आपने मुझे पुन: स्वस्थ कर दिया.

[3] याहवेह, आपने मुझे अधोलोक से ऊपर खींच लिया; आपने मुझे जीवनदान दिया, उनमें से बचा लिया, जो अधोलोक-कब्र में हैं.

[4] याहवेह के भक्तों, उनके स्तवन गान गाओ; उनकी महिमा में जय जयकार करो.

[5] क्योंकि क्षण मात्र का होता है उनका कोप, किंतु आजीवन स्थायी रहती है उनकी कृपादृष्टि; यह संभव है रोना रात भर रहे, किंतु सबेरा उल्लास से भरा होता है.

[6] अपनी समृद्धि की स्थिति, में मैं कह उठा, “अब मुझ पर विषमता की स्थिति कभी न आएगी.”

[7] याहवेह, आपने ही मुझ पर कृपादृष्टि कर, मुझे पर्वत-समान स्थिर कर दिया; किंतु जब आपने मुझसे अपना मुख छिपा लिया, तब मैं निराश हो गया.

[8] याहवेह, मैंने आपको पुकारा दी; मेरे प्रभु, मैंने आप से कृपा की प्रार्थना की:

[9] “क्या लाभ होगा मेरी मृत्यु से, मेरे अधोलोक में जाने से? क्या मिट्टी आपकी स्तुति करेगी? क्या वह आपकी सच्चाई का साक्ष्य देगा?

[10] याहवेह, मेरी विनती सुनिए, मुझ पर कृपा कीजिए; याहवेह, मेरी सहायता कीजिए.”

[11] आपने मेरे विलाप को उल्‍लास-नृत्य में बदल दिया; आपने मेरे शोक-वस्त्र उतारकर मुझे हर्ष का आवरण दे दिया,

[12] कि मेरा हृदय सदा आपका गुणगान करता रहे और कभी चुप न रहे. याहवेह, मेरे परमेश्वर, मैं सदा-सर्वदा आपके प्रति आभार व्यक्त करता रहूंगा.

स्तोत्र — Chapters