[1] परमेश्वर, मेरे स्तुति पात्र, निष्क्रिय और चुप न रहिए.
[2] दुष्ट और झूठे पुरुषों ने मेरी निंदा करना प्रारंभ कर दिया है; वे जो कुछ कहकर मेरी निंदा कर रहे हैं, वह सभी झूठ है.
[3] उन्होंने मुझ पर घिनौने शब्दों की बौछार कर दी; अकारण ही उन्होंने मुझ पर आक्रमण कर दिया है.
[4] उन्होंने मेरी मैत्री के बदले मुझ पर आरोप लगाये, किंतु प्रार्थना में मेरा अटूट विश्वास है.
[5] उन्होंने मेरे हित का प्रतिफल बुराई में दिया है, तथा मेरी मैत्री का प्रतिफल घृणा में.
[6] आप उसका प्रतिरोध करने के लिए किसी दुष्ट पुरुष को ही बसा लीजिए; उसके दायें पक्ष पर कोई विरोधी खड़ा हो जाए.
[7] जब उस पर न्याय चलाया जाए तब वह दोषी पाया जाए, उसी की प्रार्थनाएं उसके लिए दंड-आज्ञा हो जाए.
[8] उसकी आयु कम हो जाए; उसके पद को कोई अन्य हड़प ले.
[9] उसकी संतान पितृहीन हो जाए तथा उसकी पत्नी विधवा.
[10] उसकी संतान भटकें और भीख मांगे; वे अपने उजड़े घर से दूर जाकर भोजन के लिए तरस जाएं.
[11] महाजन उसका सर्वस्व हड़प लें; उसके परिश्रम की संपूर्ण निधि परदेशी लोग लूट लें.
[12] उसे किसी की भी कृपा प्राप्त न हो और न कोई उसकी पितृहीन संतान पर करुणा प्रदर्शित करे.
[13] उसका वंश ही मिट जाए, आगामी पीढ़ी की सूची से उनका नाम मिट जाए.
[14] याहवेह के सामने उसके पूर्वजों का अपराध स्मरण दिलाया जाए; उसकी माता का पाप कभी क्षमा न किया जाए.
[15] याहवेह के सामने उन सभी के पाप बने रहें, कि वह उन सबका नाम पृथ्वी पर से ही मिटा दें.
[16] करुणाभाव उसके मन में कभी आया ही नहीं, वह खोज-खोज कर निर्धनों, दीनों तथा खेदितमनवालों की हत्या करता है.
[17] शाप देना उसे अत्यंत प्रिय है, वही शाप उस पर आ पड़े. किसी की हितकामना करने में उसे कोई आनंद प्राप्त नहीं होता— उत्तम यही होगा कि हित उससे ही दूर-दूर बना रहे.
[18] वस्तुतः उसके लिए शाप देना ऐसा ही हो गया था, जैसे वस्त्र धारण करना; शाप उसके जीवन का अंश वैसा ही हो गया था, जैसा जल शरीर का अंश होता है, जैसे तेल हड्डियों का अंश हो जाता है.
[19] शाप ही उसके शरीर का आवरण बन जाए, कटिबंध समान, जो वस्त्र को सदैव समेटे रहता है.
[20] याहवेह की ओर से मेरे विरोधियों के लिए यही प्रतिफल हो, उनके लिए, जो मेरी निंदा करते रहते हैं.
[21] किंतु आप, सर्वसत्ताधारी याहवेह, अपनी महिमा के अनुरूप मुझ पर कृपा कीजिए; अपने करुणा-प्रेम के कारण मेरा उद्धार कीजिए.
[22] मैं दीन और दरिद्र हूं, और मेरा हृदय घायल है.
[23] संध्याकालीन छाया-समान मेरा अस्तित्व समाप्ति पर है; मुझे ऐसे झाड़ दिया जाता है मानो मैं अरबेह टिड्डी हूं.
[24] उपवास के कारण मेरे घुटने दुर्बल हो चुके हैं; मेरा शरीर क्षीण और कमजोर हो गया है.
[25] मेरे विरोधियों के लिए मैं घृणास्पद हो चुका हूं; मुझे देखते ही वे सिर हिलाने लगते हैं.
[26] याहवेह मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता कीजिए; अपने करुणा-प्रेम के कारण मेरा उद्धार कीजिए.
[27] उनको यह स्पष्ट हो जाए कि जो कुछ हो रहा है, वह आपके बाहुबल के कारण ही हो रहा है, यह कि याहवेह, यह सब आपने ही किया है.
[28] वे शाप देते रहे, किंतु आप आशीर्वचन ही कहें; तब जब वे, आक्रमण करेंगे, उन्हें लज्जित होना पड़ेगा, यह आपके सेवक के लिए आनंद का विषय होगा.
[29] मेरे विरोधियों को अनादर के वस्त्रों के समान धारण करनी होगी, वे अपनी ही लज्जा को कंबल जैसे लपेट लेंगे.
[30] मेरे मुख की वाणी याहवेह के सम्मान में उच्चतम धन्यवाद होगी; विशाल जनसमूह के सामने मैं उनका स्तवन करूंगा,
[31] क्योंकि याहवेह दुःखितों की सहायता के लिए उसके निकट दायें पक्ष पर आ खड़े रहते हैं, कि वह उनके जीवन को उन सबसे सुरक्षा प्रदान करें, जिन्होंने उसके लिए मृत्यु दंड निर्धारित किया था.