Skip to content
Opens in a new window

[1] याहवेह, गहराइयों में से मैं आपको पुकार रहा हूं;

[2] याहवेह, मेरा स्वर सुन लीजिए, कृपा के लिए मेरी नम्र विनती की ओर आपके कान लगे रहें.

[3] याहवेह, यदि आप अपराधों का लेखा रखने लगें, तो प्रभु, कौन ठहर सकेगा?

[4] किंतु आप क्षमा शील हैं, तब आप श्रद्धा के योग्य हैं.

[5] मुझे, मेरे प्राणों को, याहवेह की प्रतीक्षा रहती है, उनके वचन पर मैंने आशा रखी है.

[6] मुझे प्रभु की प्रतीक्षा है उन रखवालों से भी अधिक, जिन्हें सूर्योदय की प्रतीक्षा रहती है, वस्तुतः उन रखवालों से कहीं अधिक जिन्हें भोर की प्रतीक्षा रहती है.

[7] इस्राएल, याहवेह पर भरोसा रखो, क्योंकि जहां याहवेह हैं वहां करुणा-प्रेम भी है और वही पूरा छुटकारा देनेवाला है.

[8] स्वयं वही इस्राएल को उनके अपराधों को क्षमा करेगा.

स्तोत्र — Chapters