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[1] कैसे धन्य हैं वे, जिनका आचार-व्यवहार निर्दोष है, जिनका आचरण याहवेह के शिक्षाओं के अनुरूप है.

[2] कैसे धन्य हैं वे, जो उनके अधिनियमों का पालन करते हैं तथा जो पूर्ण मन से उनके खोजी हैं.

[3] वे याहवेह की सम्विधियों का पालन करते हैं, तब उनसे कोई विसंगति नहीं होती.

[4] आपने ये आदेश इसलिये दिए हैं, कि हम इनका पूरी तरह पालन करें.

[5] मेरी कामना है कि आपके आदेशों का पालन करने में मेरा आचरण दृढ़ रहे!

[6] मैं आपके आदेशों पर विचार करता रहूंगा, तब मुझे कभी लज्जित होना न पड़ेगा.

[7] जब मैं आपके धर्ममय व्यवस्था का मनन करूंगा, तब मैं निष्कपट हृदय से आपका स्तवन करूंगा.

[8] मैं आपकी विधियों का पालन करूंगा; आप मेरा परित्याग कभी न कीजिए. ב बैथ

[9] युवा अपना आचरण कैसे स्वच्छ रखे? आपके वचन पालन के द्वारा.

[10] याहवेह, मैं आपको संपूर्ण हृदय से खोजता हूं; आप मुझे अपने आदेशों से भटकने न दीजिए.

[11] आपके वचन को मैंने अपने हृदय में इसलिये रख छोड़ा है, कि मैं आपके विरुद्ध पाप न कर बैठूं.

[12] याहवेह, आपका स्तवन हो; मुझे अपने विधियों की शिक्षा दीजिए.

[13] जो व्यवस्था आपके मुख द्वारा निकली हैं, मैं उन्हें अपने मुख से दोहराता रहता हूं.

[14] आपके अधिनियमों का पालन करना मेरा आनंद है, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार कोई विशाल धनराशि पर आनंदित होता है.

[15] आपके नीति-सिद्धांत मेरे चिंतन का विषय हैं, मैं आपकी सम्विधियों की विवेचना करता रहता हूं.

[16] आपकी विधियां मुझे मगन कर देती हैं, आपके वचनों को मैं कभी न भूलूंगा. ג गिमेल

[17] अपने सेवक पर उपकार कीजिए कि मैं जीवित रह सकूं, मैं आपके वचन का पालन करूंगा.

[18] मुझे आपके व्यवस्था की गहन और अद्भुत बातों को ग्रहण करने की दृष्टि प्रदान कीजिए.

[19] पृथ्वी पर मैं प्रवासी मात्र हूं; मुझसे अपने निर्देश न छिपाइए.

[20] सारा समय आपके व्यवस्था की अभिलाषा करते-करते मेरे प्राण डूब चले हैं.

[21] आपकी प्रताड़ना उन पर पड़ती है, जो अभिमानी हैं, शापित हैं, और जो आपके आदेशों का परित्याग कर भटकते रहते हैं.

[22] मुझ पर लगे घृणा और तिरस्कार के कलंक को मिटा दीजिए, क्योंकि मैं आपके अधिनियमों का पालन करता हूं.

[23] यद्यपि प्रशासक साथ बैठकर मेरी निंदा करते हैं, आपका यह सेवक आपके विधियों पर मनन करेगा.

[24] आपके अधिनियमों में मगन है मेरा आनंद; वे ही मेरे सलाहकार हैं. ד दालेथ

[25] मेरा प्राण नीचे धूलि में जा पड़ा है; अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप मुझमें नवजीवन का संचार कीजिए.

[26] जब मैंने आपके सामने अपने आचरण का वर्णन किया, आपने मुझे उत्तर दिया; याहवेह, अब मुझे अपने विधियां सिखा दीजिए.

[27] मुझे अपने उपदेशों के प्रणाली की समझ प्रदान कीजिए, कि मैं आपके अद्भुत कार्यों पर मनन कर सकूं.

[28] शोक अतिरेक में मेरा प्राण डूबा जा रहा है; अपने वचन से मुझमें बल दीजिए.

[29] झूठे मार्ग से मुझे दूर रखिए; और अपनी कृपा में मुझे अपने व्यवस्था की शिक्षा दीजिए.

[30] मैंने सच्चाई के मार्ग को अपनाया है; मैंने आपके नियमों को अपना आदर्श बनाया है.

[31] याहवेह, मैंने आपके नियमों को दृढ़तापूर्वक थाम रखा है; मुझे लज्जित न होने दीजिए.

[32] आपने मेरे हृदय में साहस का संचार किया है, तब मैं अब आपके आदेशों के पथ पर दौड़ रहा हूं. ה हे

[33] याहवेह, मुझे आपके विधियों का आचरण करने की शिक्षा दीजिए, कि मैं आजीवन उनका पालन करता रहूं.

[34] मुझे वह समझ प्रदान कीजिए, कि मैं आपके व्यवस्था का पालन कर सकूं और संपूर्ण हृदय से इसमें मगन आज्ञाओं का पालन कर सकूं.

[35] अपने आदेशों के मार्ग में मेरा संचालन कीजिए, क्योंकि इन्हीं में मेरा आनन्दमग्न है.

[36] मेरे हृदय को स्वार्थी लाभ की ओर नहीं परंतु अपने नियमों की ओर फेर दीजिए.

[37] अपने वचन के द्वारा मुझमें नवजीवन का संचार कीजिए; मेरी रुचि निरर्थक वस्तुओं से हटा दीजिए.

[38] अपने सेवक से की गई प्रतिज्ञा पूर्ण कीजिए, कि आपके प्रति श्रद्धा-भय-भाव स्थायी रहे.

[39] उस लज्जा को मुझसे दूर रखिए, जिसकी मुझे आशंका है, क्योंकि आपके नियम उत्तम हैं.

[40] कैसे तीव्र है आपके उपदेशों के प्रति मेरी अभिलाषा! अपने धार्मिकता के द्वारा मुझमें नवजीवन का संचार कीजिए. ו वाव

[41] याहवेह, आपकी करुणा-प्रेम मुझ पर प्रगट हो जाए, और आपकी प्रतिज्ञा के अनुरूप मुझे आपका उद्धार प्राप्त हो;

[42] कि मैं उसे उत्तर दे सकूं, जो मेरा अपमान करता है, आपके वचन पर मेरा भरोसा है.

[43] सत्य के वचन मेरे मुख से न छीनिए, मैं आपके व्यवस्था पर आशा रखता हूं.

[44] मैं सदा-सर्वदा निरंतर, आपके व्यवस्था का पालन करता रहूंगा.

[45] मेरा जीवन स्वतंत्र हो जाएगा, क्योंकि मैं आपके उपदेशों का खोजी हूं.

[46] राजाओं के सामने मैं आपके अधिनियमों पर व्याख्यान दूंगा और मुझे लज्जित नहीं होना पड़ेगा.

[47] क्योंकि मेरे आनंद का उगम हैं आपके आदेश और वे मुझे प्रिय हैं.

[48] मैं आपके आदेशों की ओर हाथ बढ़ाऊंगा, जो मुझे प्रिय हैं, और आपके विधियां मेरे मनन का विषय हैं. ז ज़ईन

[49] याहवेह, अपने सेवक से की गई प्रतिज्ञा को स्मरण कीजिए, क्योंकि आपने मुझमें आशा का संचार किया है.

[50] मेरी पीड़ा में मुझे इस बातें से सांत्वना प्राप्त होती है: आपकी प्रतिज्ञाएं मेरे नवजीवन का स्रोत हैं.

[51] अहंकारी बेधड़क मेरा उपहास करते हैं, किंतु मैं आपके व्यवस्था से दूर नहीं होता.

[52] याहवेह, जब प्राचीन काल से प्रगट आपके व्यवस्था पर मैं विचार करता हूं, तब मुझे उनमें सांत्वना प्राप्त होती है.

[53] दुष्ट मुझमें कोप उकसाते हैं, ये वही हैं, जिन्होंने आपकी व्यवस्था त्याग दी है.

[54] आपके विधियां मेरे गीत की विषय वस्तु हैं चाहे मैं किसी भी स्थिति में रहूं.

[55] याहवेह, मैं आपके व्यवस्था का पालन करता हूं, रात्रि में मैं आपका स्मरण करता हूं.

[56] आपके उपदेशों का पालन करते: जाना ही मेरी चर्या है. ח ख़ेथ

[57] याहवेह, आप मेरे जीवन का अंश बन गए हैं; आपके आदेशों के पालन के लिए मैंने प्रतिज्ञा की है.

[58] सारे मन से मैंने आप से आग्रह किया है; अपनी ही प्रतिज्ञा के अनुरूप मुझ पर कृपा कीजिए.

[59] मैंने अपनी जीवनशैली का विचार किया है और मैंने आपके अधिनियमों के पालन की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं.

[60] अब मैं विलंब न करूंगा और शीघ्रता से आपके आदेशों को मानने का प्रारंभ कर दूंगा.

[61] मैं आपके व्यवस्था से दूर न होऊंगा, यद्यपि दुर्जनों ने मुझे रस्सियों से बांध भी रखा हो.

[62] आपके युक्ति संगत व्यवस्था के प्रति आभार अभिव्यक्त करने के लिए, मैं मध्य रात्रि को ही जाग जाता हूं.

[63] मेरी मैत्री उन सभी से है, जिनमें आपके प्रति श्रद्धा-भय-भाव है, उन सभी से, जो आपके उपदेशों पर चलते हैं.

[64] याहवेह, पृथ्वी आपके करुणा-प्रेम से तृप्त है; मुझे अपने विधियों की शिक्षा दीजिए. ט टेथ

[65] याहवेह, अपनी ही प्रतिज्ञा के अनुरूप अपने सेवक का कल्याण कीजिए.

[66] मुझे ज्ञान और धर्ममय परख सीखाइए, क्योंकि मैं आपके आज्ञाओं पर भरोसा करता हूं.

[67] अपनी पीड़ाओं में रहने के पूर्व मैं भटक गया था, किंतु अब मैं आपके वचन के प्रति आज्ञाकारी हूं.

[68] आप धन्य हैं, और जो कुछ आप करते हैं भला ही होता है; मुझे अपने विधियों की शिक्षा दीजिए.

[69] यद्यपि अहंकारियों ने मुझे झूठी बातों से कलंकित कर दिया है, मैं पूर्ण सच्चाई में आपके आदेशों को थामे हुए हूं.

[70] उनके हृदय कठोर तथा संवेदनहीन हो चुके हैं, किंतु आपकी व्यवस्था ही मेरा आनंद है.

[71] यह मेरे लिए भला ही रहा कि मैं ताड़ना किया गया कि इससे मैं आपकी विधियों से सीख सकूं.

[72] मेरे लिए स्वर्ण और चांदी की हजारों मुद्राओं से कहीं अधिक मूल्यवान हैं, आपके मुख से निकली व्यवस्था. י योध

[73] आपके हाथों ने मेरा निर्माण किया और आकार दिया; मुझे अपने आदेशों को समझने की सदबुद्धि प्रदान कीजिए.

[74] मुझे देख आपके भक्त उल्‍लासित हो सकें, क्योंकि आपका वचन ही मेरी आशा है.

[75] याहवेह, यह मैं जानता हूं कि आपकी व्यवस्था धर्ममय हैं, और आपके द्वारा मेरा क्लेश न्याय संगत था.

[76] अब अपने सेवक से की गई प्रतिज्ञा के अनुरूप, आपका करुणा-प्रेम ही मेरी शांति है

[77] आपकी व्यवस्था में मेरा आनन्दमग्न है, तब मुझे आपकी मनोहरता में जीवन प्राप्त हो.

[78] अहंकारियों को लज्जित होना पड़े क्योंकि उन्होंने अकारण ही मेरा छल किया है; किंतु मैं आपके उपदेशों पर मनन करता रहूंगा.

[79] आपके श्रद्धालु, जिन्होंने आपके अधिनियमों को समझ लिया है, पुन: मेरे पक्ष में हो जाएं,

[80] मेरा हृदय पूर्ण सिद्धता में आपकी विधियों का पालन करता रहे, कि मुझे लज्जित न होना पड़े. כ काफ़

[81] आपके उद्धार की तीव्र अभिलाषा करते हुए मेरा प्राण बेचैन हुआ जा रहा है, अब आपका वचन ही मेरी आशा का आधार है.

[82] आपके द्वारा की गई प्रतिज्ञा की पूर्ति की प्रतीक्षा में मेरे आंखें थक चुकी हैं; मैं विचार करता रहता हूं, “कब मुझे आपकी ओर से सांत्वना प्राप्त होगी?”

[83] यद्यपि मैं धुएं में संकुचित द्राक्षारस की कुप्पी के समान हो गया हूं, फिर भी आपकी विधियां मेरे मन से लुप्त नहीं हुई हैं.

[84] और कितनी प्रतीक्षा करनी होगी आपके सेवक को? आप कब मेरे सतानेवालों को दंड देंगे?

[85] अहंकारियों ने मेरे लिए गड्ढे खोद रखे हैं, उनका आचरण आपके व्यवस्था के विपरीत है.

[86] विश्वासयोग्य हैं आपके आदेश; मेरी सहायता कीजिए, झूठ बोलनेवाले मुझे दुःखित कर रहे हैं.

[87] उन्होंने मुझे धरती पर से लगभग मिटा ही डाला था, फिर भी मैं आपके नीति सूत्रों से दूर न हुआ.

[88] मैं आपके मुख से बोले हुए नियमों का पालन करता रहूंगा, अपने करुणा-प्रेम के अनुरूप मेरे जीवन की रक्षा कीजिए. ל लामेध

[89] याहवेह, सर्वदा है आपका वचन; यह स्वर्ग में दृढ़तापूर्वक बसा है.

[90] पीढ़ी से पीढ़ी आपकी सच्चाई बनी रहती है; आपके द्वारा ही पृथ्वी की स्थापना की गई और यह स्थायी बनी हुई है.

[91] आप ही के नियम-निर्धारण के परिणामस्वरूप ये सभी आज तक अस्तित्व में हैं, ये सभी आपके उद्देश्य की पूर्ति कर रहे हैं.

[92] यदि आपकी व्यवस्था में मैं उल्लास मगन न होता, इन पीड़ाओं को सहते सहते मेरी मृत्यु हो जाती.

[93] आपके उपदेश मेरे मन से कभी नष्ट न होंगे, क्योंकि इन्हीं के द्वारा आपने मुझे जीवन प्रदान किया है,

[94] तब मुझ पर आपका ही स्वामित्व है, मेरी रक्षा कीजिए; मैं आपके ही उपदेशों का खोजी हूं.

[95] दुष्ट मुझे नष्ट करने के उद्देश्य से घात लगाए बैठे हैं, किंतु आपकी चेतावनियों पर मैं विचार करता रहूंगा.

[96] हर एक सिद्धता में मैंने कोई न कोई सीमा ही पाई है, किंतु आपके आदेश असीमित हैं. מ मेम

[97] आह, कितनी अधिक प्रिय है मुझे आपकी व्यवस्था! इतना, कि मैं दिन भर इसी पर विचार करता रहता हूं.

[98] आपके आदेशों ने तो मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान बना दिया है क्योंकि ये कभी मुझसे दूर नहीं होते.

[99] मुझमें तो अपने सभी शिक्षकों से अधिक समझ है, क्योंकि आपके उपदेश मेरे चिंतन का विषय हैं.

[100] आपके उपदेशों का पालन करने का ही परिणाम यह है, कि मुझमें बुजुर्गो से अधिक समझ है.

[101] आपके आज्ञा का पालन करने के लक्ष्य से, मैंने अपने कदम हर एक अधर्म के पथ पर चलने से बचा रखे हैं.

[102] आप ही के द्वारा दी गई शिक्षा के कारण, मैं आपके नियम तोड़ने से बच सका हूं.

[103] कैसा मधुर है आपकी प्रतिज्ञाओं का आस्वादन करना, आपकी प्रतिज्ञाएं मेरे मुख में मधु से भी अधिक मीठी हैं!

[104] हर एक झूठे मार्ग मेरी दृष्टि में घृणास्पद है; क्योंकि आपके उपदेशों से मुझे समझदारी प्राप्त होती है. נ नून

[105] आपका वचन मेरे पांवों के लिए दीपक, और मेरे मार्ग के लिए प्रकाश है.

[106] मैंने यह शपथ ली है और यह सुनिश्चित किया है, कि मैं आपके धर्ममय नियमों का ही पालन करता जाऊंगा.

[107] याहवेह, मेरी पीड़ा असह्य है; अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप मुझमें नवजीवन का संचार कीजिए.

[108] याहवेह, मेरे मुख से निकले स्वैच्छिक स्तवन वचनों का स्वीकार कीजिए, और मुझे अपने नियमों की शिक्षा दीजिए.

[109] आपके व्यवस्था से मैं कभी दूर न होऊंगा, यद्यपि मैं लगातार अपने जीवन को हथेली पर लिए फिरता हूं.

[110] दुष्टों ने मेरे लिए जाल बिछाया हुआ है, किंतु मैं आपके उपदेशों से नहीं भटका.

[111] आपके नियमों को मैंने सदा-सर्वदा के लिए निज भाग में प्राप्त कर लिया है; वे ही मेरे हृदय का आनंद हैं.

[112] आपके विधियों का अंत तक पालन करने के लिए मेरा हृदय तैयार है. ס सामेख

[113] दुविधा से ग्रस्त मन का पुरुष मेरे लिए घृणास्पद हैं, मुझे प्रिय है आपकी व्यवस्था.

[114] आप मेरे आश्रय हैं, मेरी ढाल हैं; मेरी आशा का आधार है आपका वचन.

[115] अधर्मियों, दूर रहो मुझसे, कि मैं परमेश्वर के आदेशों का पालन कर सकूं!

[116] याहवेह, अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप मुझे सम्भालिए, कि मैं जीवित रहूं; मेरी आशा भंग न होने पाए.

[117] मुझे थाम लीजिए कि मैं सुरक्षित रहूं; मैं सदैव आपके विधियों पर भरोसा करता रहूंगा.

[118] वे सभी, जो आपके नियमों से भटक जाते हैं, आपकी उपेक्षा के पात्र हो जाते हैं, क्योंकि निरर्थक होती है उनकी चालाकी.

[119] संसार के सभी दुष्टों को आप मैल के समान फेंक देते हैं; यही कारण है कि मुझे आपकी चेतावनियां प्रिय हैं.

[120] आपके भय से मेरी देह कांप जाती है; आपके निर्णयों का विचार मुझमें भय का संचार कर देता है. ע अयिन

[121] मैंने वही किया है, जो न्याय संगत तथा धर्ममय है; मुझे सतानेवालों के सामने न छोड़ दीजिएगा.

[122] अपने सेवक का हित निश्चित कर दीजिए; अहंकारियों को मुझ पर अत्याचार न करने दीजिए.

[123] आपके उद्धार की प्रतीक्षा में, आपकी निष्ठ प्रतिज्ञाओं की प्रतीक्षा में मेरी आंखें थक चुकी हैं.

[124] अपने करुणा-प्रेम के अनुरूप अपने सेवक से व्यवहार कीजिए और मुझे अपने अधिनियमों की शिक्षा दीजिए.

[125] मैं आपका सेवक हूं, मुझे समझ प्रदान कीजिए, कि मैं आपके विधियों को समझ सकूं.

[126] याहवेह, आपके नियम तोड़े जा रहे हैं; समय आ गया है कि आप अपना कार्य करे.

[127] इसलिये कि मुझे आपके आदेश स्वर्ण से अधिक प्रिय हैं, शुद्ध कुन्दन से अधिक,

[128] मैं आपके उपदेशों को धर्ममय मानता हूं, तब मुझे हर एक गलत मार्ग से घृणा है. פ पे

[129] अद्भुत हैं आपके अधिनियम; इसलिये मैं उनका पालन करता हूं.

[130] आपके वचन के खुलने से ज्योति उत्पन्न होती है; परिणामस्वरूप भोले पुरुषों को सदबुद्धि प्राप्त होती है.

[131] मेरा मुख खुला है और मैं हांफ रहा हूं, क्योंकि मुझे प्यास है आपके आदेशों की.

[132] मेरी ओर ध्यान दीजिए और मुझ पर कृपा कीजिए, जैसी आपकी नीति उनके प्रति है, जिन्हें आप से प्रेम है.

[133] अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप मेरे पांव को स्थिर कर दीजिए; कोई भी दुष्टता मुझ पर प्रभुता न करने पाए.

[134] मुझे मनुष्यों के अत्याचार से छुड़ा लीजिए, कि मैं आपके उपदेशों का पालन कर सकूं.

[135] अपने सेवक पर अपना मुख प्रकाशित कीजिए और मुझे अपने नियमों की शिक्षा दीजिए.

[136] मेरे आंखों से अश्रु-प्रवाह हो रहा है, क्योंकि लोग आपके व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे. צ त्सादे

[137] याहवेह, आप धर्मी हैं, सच्चे हैं आपके नियम.

[138] जो अधिनियम आपने प्रगट किए हैं, वे धर्ममय हैं; वे हर एक दृष्टिकोण से विश्वासयोग्य हैं.

[139] मैं भस्म हो रहा हूं, क्योंकि मेरे शत्रु आपके वचनों को भूल गए हैं.

[140] आपकी प्रतिज्ञाओं का उचित परीक्षण किया जा चुका है, वे आपके सेवक को अत्यंत प्रिय हैं.

[141] यद्यपि मैं छोटा, यहां तक कि लोगों की दृष्टि में घृणास्पद हूं, फिर भी मैं आपके अधिनियमों को नहीं भूलता.

[142] अनंत है आपकी धार्मिकता, परमेश्वर तथा यथार्थ है आपकी व्यवस्था.

[143] क्लेश और संकट मुझ पर टूट पड़े हैं, किंतु आपके आदेश मुझे मगन रखे हुए हैं.

[144] आपके अधिनियम सदा-सर्वदा धर्ममय ही प्रमाणित हुए हैं; मुझे इनके विषय में ऐसी समझ प्रदान कीजिए कि मैं जीवित रह सकूं. ק क़ौफ़

[145] याहवेह, मैं संपूर्ण हृदय से आपको पुकार रहा हूं, मुझे उत्तर दीजिए, कि मैं आपके विधियों का पालन कर सकूं.

[146] मैं आपको पुकार रहा हूं; मेरी रक्षा कीजिए, कि मैं आपके अधिनियमों का पालन कर सकूं.

[147] मैं सूर्योदय से पूर्व ही जाग कर सहायता के लिये पुकारता हूं; मेरी आशा आपके वचन पर आधारित है.

[148] रात्रि के समस्त प्रहरों में मेरे आंखें खुले रहते हैं, कि मैं आपकी प्रतिज्ञाओं पर मनन कर सकूं.

[149] अपने करुणा-प्रेम के कारण मेरी पुकार सुनिए; याहवेह, अपने ही नियमों के अनुरूप मुझमें नवजीवन का संचार कीजिए.

[150] जो मेरे विरुद्ध बुराई की युक्ति रच रहे हैं, मेरे निकट आ गए हैं, किंतु वे आपके व्यवस्था से दूर हैं.

[151] फिर भी, याहवेह, आप मेरे निकट हैं, और आपके सभी आदेश प्रामाणिक हैं.

[152] अनेक-अनेक वर्ष पूर्व मैंने आपके अधिनियमों से यह अनुभव कर लिया था कि आपने इनकी स्थापना ही इसलिये की है कि ये सदा-सर्वदा स्थायी बने रहें. ר रेश

[153] मेरे दुःख पर ध्यान दीजिए और मुझे इससे बचा लीजिए, क्योंकि आपकी व्यवस्था को मैं भुला नहीं.

[154] मेरे पक्ष का समर्थन करके मेरा उद्धार कीजिए; अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप मुझमें नवजीवन का संचार कीजिए.

[155] कठिन है दुष्टों का उद्धार होना, क्योंकि उन्हें आपके विधियों की महानता ही ज्ञात नहीं.

[156] याहवेह, अनुपम है आपकी मनोहरता; अपने ही नियमों के अनुरूप मुझमें नवजीवन का संचार कीजिए.

[157] मेरे सतानेवाले तथा शत्रु अनेक हैं, किंतु मैं आपके अधिनियमों से दूर नहीं हुआ हूं.

[158] विश्‍वासघातियों आपके आदेशों का पालन नहीं करते, तब मेरी दृष्टि में वे घृणास्पद हैं.

[159] आप ही देख लीजिए: कितने प्रिय हैं मुझे आपके नीति-सिद्धांत; याहवेह, अपने करुणा-प्रेम के अनुरूप मुझमें नवजीवन का संचार कीजिए.

[160] वस्तुतः सत्य आपके वचन का सार है; तथा आपके धर्ममय नियम सदा-सर्वदा स्थायी रहते हैं. ש शीन

[161] प्रधान मुझे बिना किसी कारण के दुःखित कर रहे हैं, किंतु आपके वचन का ध्यान कर मेरा हृदय कांप उठता है.

[162] आपकी प्रतिज्ञाओं से मुझे वही उल्लास प्राप्त होता है जैसा उल्लास किसी को लूट की सामग्री प्राप्त करने पर होता है.

[163] झूठ से मुझे घृणा है, बैर है किंतु मुझे प्रेम है आपके व्यवस्था से.

[164] आपके धर्ममय व्यवस्था का ध्यान कर मैं दिन में सात-सात बार आपका स्तवन करता हूं.

[165] जिन्हें आपके व्यवस्था से प्रेम है, उनको बड़ी शांति मिलती रहती है, वे किसी रीति से विचलित नहीं हो सकते.

[166] याहवेह, मैं आपकी उद्धार का प्रत्याशी हूं, मैं आपके आदेशों का पालन करता हूं.

[167] मैं आपके अधिनियमों का पालन करता हूं, क्योंकि वे मुझे अत्यंत प्रिय हैं.

[168] मैं आपके उपदेशों तथा नियमों का पालन करता हूं, आपके सामने मेरा संपूर्ण आचरण प्रगट है. ת ताव

[169] याहवेह, मेरी पुकार आप तक पहुंचे; मुझे अपने वचन को समझने की क्षमता प्रदान कीजिए.

[170] मेरा गिड़गिड़ाना आप तक पहुंचे; अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करते हुए मुझे छुड़ा लीजिए.

[171] मेरे ओंठों से आपका स्तवन छलक उठे, क्योंकि आपने मुझे अपने विधियों की शिक्षा दी है.

[172] मेरी जीभ आपके वचन प्रगट का गान करेगी, क्योंकि आपके सभी आदेश आदर्श हैं.

[173] आपकी भुजा मेरी सहायता के लिए तत्पर रहे, मैंने आपके उपदेशों को अपनाया है.

[174] आप से उद्धार की प्राप्ति की मुझे उत्कण्ठा है, याहवेह, आपके व्यवस्था में मेरा आनन्दमग्न है.

[175] मुझे आयुष्मान कीजिए कि मैं आपका स्तवन करता रहूं, और आपकी व्यवस्था मुझे संभाले रहे.

[176] मैं खोई हुई भेड़ के समान हो गया था. आप ही अपने सेवक को खोज लीजिए, क्योंकि मैं आपके आदेशों को भूला नहीं.

स्तोत्र — Chapters