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[1] याहवेह, दावीद को और उनके द्वारा झेली गई समस्त विषमताओं को स्मरण कीजिए.

[2] उन्होंने याहवेह की शपथ खाई, तथा याकोब के सर्वशक्तिमान से प्रतिज्ञा की थी:

[3] “मैं न तो तब तक घर में प्रवेश करूंगा और न मैं अपने बिछौने पर जाऊंगा,

[4] न तो मैं अपनी आंखों में नींद आने दूंगा और न पलकों में झपकी,

[5] जब तक मुझे याहवेह के लिए स्थान उपलब्ध न हो जाए, याकोब के सर्वशक्तिमान के आवास के लिए.”

[6] इसके विषय में हमने एफ़राथा में सुना, याअर के मैदान में भी यही पाया गया:

[7] “आओ, हम उनके आवास को चलें; हम उनके चरणों में जाकर आराधना करें.

[8] ‘याहवेह, अब उठकर अपने विश्राम स्थल पर आ जाइए, आप और आपके सामर्थ्य की संदूक भी.

[9] आपके पुरोहित धर्म के वस्त्र पहिने हुए हों; और आपके सात्विक हर्ष गीत गाएं.’ ”

[10] अपने सेवक दावीद के निमित्त, अपने अभिषिक्त को न ठुकराईए.

[11] याहवेह ने दावीद से शपथ खाई थी, एक ऐसी शपथ, जिसे वह तोड़ेंगे नहीं: “तुम्हारे ही अपने वंशजों में से एक को मैं तुम्हारे सिंहासन पर विराजमान करूंगा.

[12] यदि तुम्हारे वंशज मेरी वाचा का पालन करेंगे तथा मेरे द्वारा सिखाए गए उपदेशों का पालन करेंगे, तब उनकी संतान भी तुम्हारे सिंहासन पर सदा-सर्वदा के लिए विराजमान होगी.”

[13] क्योंकि ज़ियोन याहवेह द्वारा ही निर्धारित किया गया है, अपने आवास के लिए याहवेह की यही अभिलाषा है.

[14] “यह सदा-सर्वदा के लिए मेरा विश्रान्ति स्थल है; मैं यहीं सिंहासन पर विराजमान रहूंगा, क्योंकि यही मेरी अभिलाषा है.

[15] उसके लिए मेरी आशीष बड़ी योजना होगी; मैं इसके दरिद्रों को भोजन से तृप्त करूंगा.

[16] उसके पुरोहितों को मैं उद्धार के परिधानों से सुसज्जित करूंगा, और उसके निवासी सात्विक सदैव हर्षगान गाते रहेंगे.

[17] “यहां मैं दावीद के वंश को बढाऊंगा, मैं अपने अभिषिक्त के लिए एक दीप स्थापित करूंगा.

[18] मैं उसके शत्रुओं को लज्जा के वस्त्र पहनाऊंगा, किंतु उसके अपने सिर का मुकुट उज्जवल रहेगा.”

स्तोत्र — Chapters