[1] हनन्याह नाँव के एगो आमदी आउर ओकर मेहरारू स फीरा कुछ ज मीन बेचलन,
[2] आउर ओकर दाम में से कुछ रखलन; आउर ई बात ओकर मेहरारू ओ जानऽ हलथिान, आउर ओकर एक भाग लाके परेरितमन के गोड़ के आगू रख देलथी।
[3] पतरस कहलन, “हे हनन्याह! सैतान तोहर मन में ई बात काहे घुस य लक कि तूँ पबित्तर आतमा से भूफठ बोलऽ, आउर ज मीन के दाम में से कुछ रख ले?
[4] ज बले उ तोरा पाले रहल, का तोहर नञ हल? आउर जब बिक गेलइ तो का तोहर काबू में नञ हल? तूँ ई बात अप्पण मन में काहे बिचारलऽ? तूँ आमदिय न से नञ बाकि परमेसर से भूफठ बोललऽ हे।”
[5] ई बात सुनतही हनन्याह गिर पड़लन आउर परान तियाग देलन, आउर सभ सुनवैइया ढ़ेर डेरा गेलन
[6] फिन ज मानवन उठके ओकर अरथी बनाय लन आउर बाहिर ले जाके गाड़ देलन।
[7] करीब तीन घंटा के बाद ओकर मेहरारू, जे कुछ होलइ हल नञ जानके, भीतर अय ली।
[8] तब पतरस ओकरा से कहलन, “हमरा बतावऽ का तोहनी उ ज मीन ए तनही में बेचलऽ हल?” उ कहलकी, “हाँ ए तनेही में।”
[9] पतरस ओकरा से कहलन, “ई का बात हे कि तूँ दुन्नु परभु के आतमा के परीच्छा लागी एक जोरे हलऽ? देखहु, तोहर पति के गाड़ेवाला दुआरे पर खड़ा हथ, आउर तोरो बाहिर ले ज य तो।”
[10] तब उ तुरत उनखर गोड़ पर गिर पड़ली, आउर परान छोड़ देलकी; आउर ज मानवन भीतर आके ओकरा मरल पय लन, आउर बाहिर ले जाके ओकर मरद के बगल में गाड़ देलन।
[11] स उँसे कलीसिया पर आउर ई बात के सभ सुनवैइया पर बड़का डर घेर लेलकय।
[12] परेरितमन के हाँथे ढे़र चिन्हासी आउर अज गुत काम लोग-बाग के बीच देखावल जा हल, आउर ओ सभ एक चित्त होके सुलैमान के ओसारा में ए कट्ठा होल करऽ हलन।
[13] बाकि आन में से केकरो ई हियाव नञ होवऽ हल कि उनकरा में जाके मिलय, तइयो लोग उनकर बड़ाइ करऽ हलन।
[14] बिसवास करवैइया ढ़ेरमनी आमदी आउर अउरतिय न परभु के कलीसिया में लगातार बढ़इत गेलइ।
[15] हीयाँ तकले कि लोग बेमरिय न के स ड़क पर लाके, खटिया आउर खटोलमन पर सुता दे हलन कि जब पतरस आवे, तो उनकर छाहुरो उनकरा में से केकरो पर पड़ जाय।
[16] यरूसलेम के अगल-बगल के स हरो में ढ़ेर लोग बेमरिय न आउर असुद्ध आतमावन के स तावलन के ला लाके, ए कट्ठा होवऽ हलन, आउर सब नीमन कर देल जा हलन।
[17] तब परधान याज क आउर ओकर सब संगी जे स दूकिय न के पंथा के हलन, डाह से भर गेलन।
[18] आउर परेरितमन के पकड़के जेहल में बन्द कर देलन।
[19] बाकि रात के परभु के एगो स रगदूत जेहल के दुआर खोलके ओखनी के बाहर लाके कहलन,
[20] “जा, मनि्दल में खड़ा होके ई जि नगी के सब बात लोग के सुनावहु।”
[21] ओ ई सुनके भोरउवा मनि्दल जाके उपदेस देवे लगलन। तब महा याज क आउर ओकर संगतिय न आके महास भा के आउर इस राय लिय न के सभ पुरनियन के ए कट्ठा कयलन, आउर जेहल में कहा भेज लन कि उनकनी के लावे।
[22] बाकि बराहिल हुआँ पहँचके उनकनी के जेहल में नञ पय लन, आउर लउट के स नेस देलन,
[23] “हमनी जेहल के बड़ चउकसी से बन्द कय ली हल, आउर पहरेदार के बाहिर दुआर पर खड़ा पय ली; बाकि जब खोलली, तो भीतर कोइ नञ मिललय।”
[24] जब मनि्दल के सास क आउर परधान याजकवन ई बात सुनलन, तो उनका बारे में ढ़ेर चिन्ता में पड़ गेलन कि उनकर का होलइ।
[25] एतने में कोइ आके उनका बतय लक, “देखहु जिनका तोहनी जेहल में बन्द रखलऽ हल, ओ आमदिय न मनि्दल में खड़ा लोग के उपदेस दे रहलथी हे।”
[26] तब सास क, बराहिलवन के जोरे जाके, उनकनी के ले अयलन, बाकि ज बरदस्ती नञ, काहेकि ओ लोग से डेरा हलन कि हमनी पर ढ़ेलाबाजी नञ करे।
[27] ओखनी उनकनी के लाके महास भा के सामने खड़ा कर देलन; तब महायाज क उनका से पूछलन,
[28] “का हमनी तोरा चेताके आग्यां नञ देलिअई हल कि तोहनी ई नाँव से उपदेस नञ करिहऽ? तइयो देखहू, तोहनी स उँसे यरूसलेम के अप्पन उपदेस से भर देलऽ हे आउर उ आमदी के खून हमनी के गरदन पर लावे चाहऽ हू।”
[29] तब पतरस आउर दोसर परेरितमन ज बाव देलन, “आमदिय न के आग्यां से बढ़के परमेसर के आग्यां के माननाइये हमनी के काम हे।
[30] हमनी के पुरखन के परमेसर यीसु के जि य लन, जिनका तोहनी कुरू स पर लटका के मुआ देलऽ हल।
[31] उनके परमेसर परभु आउर उद्धार करवैइया बताके, अप्पन दहिना हाँथा पर ऊँचा कर देलन, कि ऊ इस राय लिय न के मन फिराव के तागत आउर पाप के माप फ कर दे।
[32] हमनी ई बात के गवाह हिअई आउर ओय स ने पबित्तर आतमो, जे परमेसर उनखा देलन हे जे उनखर आग्यां मानऽ हथ।”
[33] ई सुनके ओ डहा गेलन, आउर ओखनी के मुआ देवे चाहलन।
[34] बाकि गमलीए ल नाँव के एगो फरीसी जे बेबस्थाप क आउर सभ लोग में इज ज तदार हलन, कचहरी में खड़ा होके परेरितमन के थोरे देर ला बाहर कर देवे के आग्यां देलन।
[35] तब उ कहलन, “हे इस राय लिय न, तोहनी जे कुछ ई आमदिय न से करे चाहऽ हु, सोच स मभ्फके करिय हु।
[36] काहेकि ई बखत से पहिले थिायुदास ई कहइत उठल, कि हमहु कुछ ही, आउर कोइ चार सो आमदी ओकर संगे हो गेलइ, बाकि उ मारल गेलइ आउर जेतना लोग ओकरा मानऽ हलन, सब हिरति-बितिर होलन आउर मेटा गेलन।
[37] ओकरा बाद नाँव लिखाइ के दिन में यहूदा गलीली उठलन, आउर कुछ लोग अपना दन्न कर लेलन; ऊहो खतम हो गेलन, आउर जेत्ते लोग ओकरा मानइत हलन, सब छितिर-बितिर हो गेलन।
[38] एहिसे अब हम तोरा से कहइत हियो, ई आमदिय न से दूरे रहऽ आउर इनकरा से कुछ काम नञ रखहु काहेकि जे ई धरम चाहे काम आमदिय न दन्न से हो तब तो मेटा जयतइ;
[39] बाकि जे परमेसर दन्न से हे, तो तूँ ओकरा कहियो मेटा नञ स कबऽ। कहीं अयसन नञ हो कि तूँ परमेसर से लड़ेवाला हो जयबऽ।”
[40] तब ओखनी उनकर बात मान लेलन; आउर परेरितमन के बोलाके पि टवय लन; आउर ई आग्यां देके छोड़ देलन कि यीसु के नाँव से फिन कोइ बात नञ करिय हु।
[41] ओ ई बात से आननि्दत होके महास भा के सामने से चल गेलन, कि हमनी उनखर नाँव लागी अप मानित होवे लाय क त बन लिअई।
[42] ओ रोज मनि्दल में आउर घरे-घर उपदेस करे, आउर ई बात के सुभसमाचार सुनावे से कि यीसुए मसीह हथ नञ थामलन।