[1] फेस्तुस ऊ राज पहुँचला के तीन दिन बाद कैस रिया से यरूसलेम गेलन।
[2] तब परधान याजकवन आउर य हूदिवन के नामी लोग उनका सामने पौलुस के सि काय त कयलन;
[3] आउर उनका से बिनती करके पौलुस के बिरोध् में ई किरपा चाहलन कि ऊ उनका यरूसलेम बोलबावे काहेकि ओ उनका राहे में मार देवे के ताक में लगल हलन।
[4] फेस्तुस ज बाव देलन, “पौलुस कैस रिया में पहरा में हे, आउर हम अप नेही ज ल्दी हुआँ जयबइ।”
[5] फिन कहलन, “तोहनी में जे अधिकार रखऽ हथ ओ ज उरे चलय, आउर जे ई आमदी कुछ गलत काम कयले हे तो ओकरा पर दोष लगावय।”
[6] ओखनी के बीच आठ-दस दिन रहके ऊ कैस रिया चल गेलन, आउर दूस रका दिन नेयाय आस न पर बइठके पौलुस के लावे के आग्यां देलन।
[7] जब ऊ आय लन तो जे य हूदी यरूसलेम में आयल हलन, ओखनी अगल-बगल खड़ा होके उनखा पर ढेरस न भारी आरोप लगय लन, जेकर स बूत ओ नञ दे स कऽ हलन।
[8] बाकि पौलुस ज बाव देलथी, “हम नञ तो यहूदियन के बेबस्था के आउर नञ मनि्दल के, आउर नञ ही कैसर के खिलाफ कोइ अप राध् कयले ही।”
[9] तब फेस्तुस यहूदियन के खुस करे के हिच्छा से पौलुस से कहलथी, “का तूँ चाह ऽ हे कि यरूसलेम जाय, आउर हुआँ हमरा सोझा तोइर ई मोकदमा तय कयल जाए?”
[10] पौलुस कहलथी, “हम कैसर के नेयाय आस न के सोझा खड़ा ही, हमर मोकदमा के हीऐं फैस ला होवे के चाहीं। जयस न अपने नीमन तरे जानऽ ही, य हूदिवन के हम कुछ अप राध् नञ कय ली।
[11] जे हम अप राधी हियो आउर मार देवे लाय क कोइ काम कयले ही, तो मरे से पीछे नञ हटऽ ही, बाकि जे बात के ई हमरा पर दोष लगावऽ हथ, जे ओकरा में कोइयो बात सच नञ साबित होय, त कोइ हमरा उनकरा हाँथा नञ स ऊँप स कऽ हे। हम कैसर के दोहाइ दे ही।”
[12] तब फेस्तुस मंन्नीय न के स भा जोरे राय करके ज बाव देलन, “तूँ कैस रे के दोहाइ देले हऽ, तूँ कैस रे के भीरू जयबऽ।
[13] कुछ दिन बीतला के बाद अगरिप्पा राजा आउर बिरनीके कैस रिया आके प फेस्तुस से भेंट कय लथिान।
[14] उनकरा ढेर दिन हुआँ रहे के बाद फेस्तुस पौलुस के बारे में राजा के बतय लन: “एगो आमदी हे, जेकरा फेलिक्स कइदी छोड़ गेलन हे।
[15] जब हम यरूसलेम में हली, तो परधान याज क आउर यहूदियन के पुरनिया सब ओकर सिकायत कयलन आउर चाहलन कि ओकरा पर सजा के आग्यां देल जाय।
[16] बाकि हम उनकरा ज बाव देलिअई कि रोमी सब के ई परथा नञ कि कउनो आमदी के सजा ला स उँप देवे, जबले मुद्दालय के अप्पण मुद्दइ के सामने खड़ा होके दोष के ज बाव देवे के मौका नञ मिले।
[17] ईसे जब ओ हीयाँ ए कट्ठा होलन, तो हम तनिको देर नञ कय ली, बाकि दूस रके दिन नेयाय आस न पर बइठके ऊ आमदी के लावे के आग्यां देली।
[18] जब ओकर बिरोधी खड़ा होलन, तो ओखनी अ य स न अनुचित बात के दोष नञ लगय लन, जयस न हम स मझली हल।
[19] बाकि ओ अप्पण धरम के आउर यीसु नाँव के कवनो आमदी के बारे में, जे मर गेलआ हल आउर पौलुस ओकरा जि न्दा बताव हल, बहस करऽ हलन।
[20] हम उलझन में हलियो कि ई बात के पता कइसे लगइअई? एहिसे हम ओकरा से पूछली, ‘का तूँ यरूसलेम जयवऽ कि हुआँ ई बात के प फैस ला हो?
[21] बाकि जब पौलुस दोहाइ देलन कि ओकर मोकदमा के फैस ला महाराजाधि् राज के हीयाँ हो, तो हम आग्यां देली कि जबले ओकरा कैसर के भीरू नञ भेजि अई, ओकरा कइद में रखल जाय।”
[22] तब अ गरिप्पा फेस्तुस से कहलन, “हम्हु ऊ आमदी के सुने चाहऽ ही।” उ कहलन, “अप ने कल्ह सुन लेबई।”
[23] ईसे दूस रका दिन जब अ गरिप्पा आउर बिरनीके बड़ धूमधाम से अ य लन आउर पलटन के सरदार आउर सहर के नामी लोग के जोरे दरबार में प हुँचलन। तब फेस्तुस आग्यां देलथी कि पौलुस के ले आवहु।
[24] फेस्तुस कहलन, “हे राजा अगरिप्पा, आउर हे आमदी सभ जे हीयाँ हमनी जोरे ह, तोहनी ई आमदी के देखइत हू, जेकरा बारे में यहूदियन सभ यरूसलेम में आउर हीयों गरज-गरज के हमरा से बिनती कहलकय कि एकर जि न्दा रहनाय सही नञ।
[25] बाकि हम जान गेली कि ऊ अ य स न कुछ नञ कय लकय कि मार देल जाय, आउर जब ऊ अपनही महाराजाधि् राज के दोहाइ देलकय, तो हम ओकरा भेजे के प फैस ला कय ली।
[26] हम ओकरा बारे में कोइ निस चित बात नञ पय ली कि अ प्पण मालिक भीरू लिखिअई। एहिसे हम ओकरा तोहनी सामने आउर जादे करके हे राजा अ गरिप्पा, अपने सामने लय ली हे कि जाँचे के बाद हमरा कुछ लिखे के मिले।
[27] काहेकि कय दी के भेजनाय आउर जे दोष ओकरा पर लगावल गेलइ, ओकरा नञ बतानाय, हमरा बेयरथ जान पड़ऽ हे।”