Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 4:19

[1] धरमी जन नास हो जाथें, अऊ कोनो ये बात के चिंता नइं करंय; भक्त जनमन उठा लिये जाथें, अऊ कोनो नइं समझंय धरमी जन एकर बर उठा लिये जाथें ताकि अवइया बिपत्ति ले बांच जावंय।

[2] जेमन सीधा चाल चलथें ओमन सांति पाथें; ओमन आराम पाथें, जब ओमन के मऊत होथे।

[3] “पर तुमन—इहां आवव, हे जादूगरनी के लइकामन, हे बेभिचारी अऊ बेस्यामन के संतान!

[4] तुमन काकर हंसी उड़ात हव? काकर ऊपर तुमन हंसत हव अऊ कोन ला तुमन अपन जीभ देखात हव? का तुमन बिदरोही अऊ लबरामन के संतान नो हव?

[5] तुमन बलूत रूखमन के बीच अऊ हर फईले रूखमन के खाल्हे म कामातुर होथव; तुमन अपन लइकामन ला घाटी म अऊ बाहिर निकले चट्टानमन के खाल्हे म बलिदान चघाथव।

[6] घाटी के चिकना पथरामन के बीच मूरतीमन तुम्हर हिस्सा अंय; वास्तव म, ओमन तुम्हर भाग अंय। हव, ओमन बर तुमन पेय-बलिदान अऊ अन्न-बलिदान चघाय हव। ये सब ला देखके घलो, का में सांत हो जावंव?

[7] तुमन एक ठन ऊंचहा अऊ उठे हुए पहाड़ी ऊपर अपन बिस्तर बिछाय हवव; उहां तुमन अपन बलिदान चघाय बर गे रहेव।

[8] अपन कपाट अऊ अपन चौखटमन के पाछू म तुमन अपन मूरती-पूजा के चीजमन ला रखे हव। मोला छोंड़के, तुमन अपन बिस्तर ला खुला रखे हव, तुमन येकर ऊपर चघके येला चौड़ा कर ले हव; तुमन ओमन ले एक समझौता कर ले हव, जेमन के बिस्तर तुमन ला बने लगथे, अऊ तुमन ओमन के नंगरा देहें ला काम-वासना से देखे हव।

[9] तें जैतून तेल लेके मोलेक करा गे रहे अऊ अपन खुसबू ला बढ़ाय। तेंह अपन दूतमन ला बहुंत दूरिहा तक पठोय; तें खाल्हे अधोलोक तक चले गेय!

[10] तें यातरा के दुवारा अपनआप ला थका लेय, पर तेंह ये नइं कहे, ‘येह बेकार अय।’ तोर म नवां बल के संचार होईस, एकर कारन तेंह नइं थके।

[11] “तेंह काकर डर ले अतेक भय खाय हस अऊ डर गे हस कि तेंह मोर ले सच नइं बोलय, अऊ मोला सुरता नइं राखे, न ही येकर ऊपर धियान देय? येकर कारन ये नो हय कि में बहुंत समय ले चुपेचाप हंव जेकर ले तें मोला नइं डरस?

[12] मेंह तोर धरमीपन अऊ तोर करम ला परगट कर दूहूं, पर ओमन ले तोला कुछू फायदा नइं होवय।

[13] जब तें मदद बर पुकारथस, त तोर जमा करे गय मूरतीमन तोला बचावंय! हवा ह ओ जम्मो ला दूरिहा ले जाही, सिरिप एक सांस ह ओमन ला उड़िहा ले जाही। पर जऊन ह मोर सरन लीही ओह देस के उत्तराधिकारी होही अऊ मोर पबितर पहाड़ ह ओकर अधिकार म रहिही।”

[14] अऊ ये कहे जाही: “बनावव, बनावव, सड़क ला तियार करव! मोर मनखेमन के रद्दा ले बाधामन ला हटावव।”

[15] काबरकि ऊंच अऊ उठाय गय परमेसर ह ये कहत हे— ओ जऊन ह सदा जीयत हे, जेकर नांव पबितर ए: “मेंह एक ऊंच अऊ पबितर स्थान म रहिथंव, पर ओकर संग घलो रहिथंव, जऊन ह टूटे मन के अऊ आतमा म नम्र ए, कि नम्र मन के आतमा अऊ टूटे मन वाले के हिरदय ला खुस करंव।

[16] में हमेसा ओमन ऊपर दोस नइं लगावंव, न ही हमेसा मेंह गुस्सा करहूं, काबरकि तब ओ मोर बनाय मनखेमन मोर कारन मूरछित हो जाहीं।

[17] ओमन के पापी लालची सुभाव के कारन मेंह बहुंत गुस्सा करेंव; में ओमन ला दंड देंय, अऊ गुस्सा म अपन चेहरा छुपांय; तभो ले ओमन अपन मन के रद्दा म चलते रिहिन।

[18] में ओमन के चालचलन ला देखे हंव, तभो ले ओमन ला चंगा करहूं; मेंह ओमन ला ले चलहूं अऊ इसरायल के सोक करइयामन ला सांति दूहूं,

[19] मेंह ओमन के ओंठ म परसंसा के बात लानहूं। सांति, जेमन दूरिहा अऊ लकठा म हवंय, दूनों ला सांति मिलय,” यहोवा ह कहत हे। “अऊ में ओमन ला चंगा करहूं।”

[20] पर दुस्टमन लहरावत समुंदर सहीं अंय, जऊन ह आराम नइं कर सकय, अऊ जेकर लहरामन मईला अऊ चीखला उछालथें।

[21] “दुस्टमन बर सांति नइं ए,” मोर परमेसर ह कहत हे।

यसायाह — Chapters