[1] हे यहोवा, तें मोर परमेसर अस; मेंह तोर महिमा करत तोला ऊपर उठाहूं अऊ तोर नांव के परसंसा करहूं, काबरकि पूरा बिसवासयोग्यता म तेंह अद्भूत काम करे हस, ओ काम जेकर योजना बहुंत पहिले बनाय गे रिहिस।
[2] तेंह सहर ला कचरा के एक ढेर बना दे हस, गढ़वाले नगर ला खंडहर बना दे हस, परदेसीमन के मजबूत गढ़वाला सहर अब नइं ए; येला फेर कभू बसाय नइं जावय।
[3] एकरसेति बलवान मनखेमन तोर आदर करहीं; निरदयी जातिमन के नगरमन तोर आदर करहीं।
[4] तेंह गरीबमन बर एक सरन-स्थान, जरूरतमंद बर ओमन के बिपत्ति म एक सरन-स्थान, आंधी म एक आसरय, अऊ घाम म एक छइहां के जगह रहे हस। काबरकि निरदयी के सांस ह दीवार म टकरावत एक आंधी के सहीं
[5] अऊ मरू-भुइयां के गरमी सहीं अय। तेंह परदेसीमन के कोलाहल ला वइसने सांत करथस; जइसने बादर के छइहां के दुवारा गरमी ह सांत होथे, ओही किसम ले निरदयी के गीत ह सांत हो जाथे।
[6] ये पहाड़ ऊपर सर्वसक्तिमान यहोवा ह जम्मो मनखेमन बर बढ़िया जेवन के एक भोज तियार करही, पुराना अंगूर के मंद के एक जेवनार— सबले बढ़िया मांस अऊ सबले बढ़िया अंगूर के मंद होही।
[7] ये पहाड़ ऊपर, ओह ओ परदा ला नास करही जऊन ह जम्मो मनखेमन ला लपेटके रखथे, ओ चादर, जऊन ह सब जातिमन ला ढांपे हवय;
[8] ओह मऊत ला हमेसा बर नास कर दीही। परमपरधान यहोवा ह सबो के चेहरा ले आंसू ला पोंछ दीही; ओह पूरा धरती ले अपन मनखेमन के कलंक ला हटा दीही। यहोवा ह कहे हवय।
[9] ओ दिन ओमन कहिहीं, “खचित येह हमर परमेसर अय; हमन ओकर ऊपर भरोसा करेंन, अऊ ओह हमर उद्धार करिस। येह यहोवा अय, हमन ओकर भरोसा करे हवन; आवव, हमन ओकर उद्धार म आनंद अऊ खुसी मनावन।”
[10] यहोवा के हांथ ह ये पहाड़ ऊपर बने रहिही; पर मोआब ह ओमन के देस म अइसन रऊंदे जाही जइसन पैंरा ह खातू म रऊंदे जाथे।
[11] ओमन येमा अपन हांथ अइसन फईलाहीं, जइसन तउंरइयामन तउंरे बर अपन हांथ फईलाथें। पर ओमन के हांथ के चतुरई के बावजूद परमेसर ह ओमन के घमंड ला टोर दीही।
[12] ओह तुम्हर ऊंच गढ़वाले दीवारमन ला खाल्हे ले आही अऊ खाल्हे गिरा दीही; ओह ओमन ला भुइयां म ले आही, अऊ माटी म मिला दीही।