[1] ओ दिन यहूदा देस म ये गीत गाय जाही: हमर एक ठन मजबूत सहर हवय; परमेसर उद्धार ला बनाथे येकर दीवार अऊ गढ़ के घेरामन ला बनाथे।
[2] सहर के दुवारमन ला खोलव ताकि धरमी जाति ह भीतर आवय, ओ जाति जऊन ह बिसवास ला बनाय रखथे।
[3] जेमन के मन ह तोर बर अटल बने रहिथे, ओमन ला तें पूरा सांति म रखथस, काबरकि ओमन तोर ऊपर भरोसा करथें।
[4] यहोवा ऊपर हमेसा बर भरोसा रखव, काबरकि यहोवा, यहोवा खुद सदाकाल के चट्टान अय।
[5] ओह ओमन ला नम्र करथे, जेमन डींग मारथें, ओह ऊंच सहर ला खाल्हे ले आथे; ओह येला भुइयां म समतल कर देथे अऊ येला धुर्रा म मिला देथे।
[6] गोड़मन येला कुचर देथें— सताय गय मनखेमन के गोड़मन, गरीबमन के गोड़मन येला कुचर देथें।
[7] धरमी के डहार ह समतल होथे; तें, धरमी जन अस अऊ धरमी के डहार ला सरल बनाथस।
[8] हे यहोवा, हव, तोर कानून के रसता म चलत, हमन तोर बाट जोहत हन; तोर नांव अऊ खियाती के हमर मन ह लालसा करथे।
[9] रथिया मोर परान ह तोर लालसा करथे; बिहनियां मोर मन ह तोर लालसा करथे। जब तोर नियाय के काम धरती ऊपर होथे, तब संसार के मनखेमन, धरमीपन सीखथें।
[10] पर जब दुस्ट ऊपर दया घलो करे जाथे, तभो ले ओह धरमीपन के बात ला नइं सीखय; सीधवा मनखेमन के देस म घलो ओमन दुस्टता करते रहिथें अऊ यहोवा के महानता के आदर नइं करंय।
[11] हे यहोवा तोर हांथ ह उठे हवय, पर ओमन येला नइं देखंय। ओमन तोर मनखेमन बर तोर उत्साह ला देखंय अऊ लज्जित होवंय; तोर बईरीमन बर रखे आगी ह ओमन ला भसम कर देवय।
[12] हे यहोवा, तें हमर बर सांति लानथस; हमर करा जऊन कुछू घलो हवय, ओला तेंह हमर बर करे हवस।
[13] हे यहोवा हमर परमेसर, तोर अलावा अऊ मालिकमन हमर ऊपर सासन करे हवंय, पर सिरिप तोरेच नांव ला हमन आदर देथन।
[14] ओमन मर गीन, ओमन अब जीयत नइं एं; ओमन के आतमा जी नइं उठय तेंह ओमन ला दंड देय अऊ ओमन ला नास कर देय; तें ओमन के सुरता ला घलो मेटा देय।
[15] हे यहोवा, तेंह जाति ला बढ़ाय हस; तेंह जाति ला बढ़ाय हस। तेंह अपन बर महिमा देखाय हस; तेंह देस के सब सीमना ला बढ़ाय हस।
[16] हे यहोवा, दुख म ओमन तोला सुरता करिन; जब तें ओमन के ताड़ना करे, तब ओमन मुसकिल से फुसफुसाके पराथना कर सकत रिहिन।
[17] जइसन गरभवती माईलोगन ह लइका जनमावत बेरा पीरा म छटपटाथे अऊ चिचियाथे, हे यहोवा, हमर स्थिति घलो तोर आघू म वइसन हो गे रिहिस।
[18] हमन गरभवती रहेंन, हमन पीरा म छटपटायेंन, पर हमन मानो हवा ला ही जनमेंन। हमन धरती बर कोनो उद्धार के काम नइं करेंन, अऊ न ही संसार के मनखेमन जिनगी पाईन।
[19] पर हे यहोवा, तोर मरे मनखेमन जी जाहीं; ओमन के देहेंमन उठके ठाढ़ होहीं— जेमन माटी म निवास करथें, ओमन जागंय अऊ आनंद के मारे जय-जयकार करंय— तोर ओस ह बिहनियां के ओस सहीं अय; धरती ह अपन मुरदामन ला लहुंटा दीही।
[20] हे मोर मनखेमन, जावव, अपन खोलीमन म जावव अऊ कपाटमन ला बंद कर लेवव; थोरकन देर बर अपनआप ला छुपाके रखव जब तक कि गुस्सा ह सांत नइं हो जावय।
[21] देखव, यहोवा ह अपन निवास ले बाहिर निकलत हे ताकि धरती के मनखेमन ला ओमन के पाप के दंड देवय। धरती ह अपन ऊपर बहे खून ला परगट कर दीही; धरती ह घात करे गय मनखेमन ला अऊ छुपाके नइं रखही।