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[1] ओ मुकुट ऊपर हाय, जऊन ह एपरैम के मतवारमन के घमंड अय, ओ मुरझावत फूल ऊपर हाय, ओकर महिमामय सुघरता, जऊन ह एक उपजाऊ घाटी के टीप म रखे हवय— ओ सहर ऊपर हाय, जेकर घमंड ला अंगूर के मंद के दुवारा खतम करे गे हवय!

[2] देखव, परभू करा एक झन हवय, जऊन ह बलवान अऊ मजबूत हे। करा के आंधी या नास करइया गरेर के सहीं, तेज बारिस अऊ मूसलाधार बारिस के सहीं, ओह येला बहुंत जोर से भुइयां म फटिक दीही।

[3] एपरैम के मतवारमन के घमंड के ओ मुकुट ला गोड़ खाल्हे रऊंदे जाही।

[4] ओ मुरझावत फूल, ओकर महिमामय सुघरता, जऊन ह एक उपजाऊ घाटी के टीप म रखे हवय, ओह कटनी के पहिले पाके अंजीर के सहीं होही— जेमन ला मनखेमन देखते ही अपन हांथ म लेथें, अऊ ओमन ला लील जाथें।

[5] ओ दिन सर्वसक्तिमान यहोवा ह एक महिमामय मुकुट होही, अपन बांचे मनखेमन बर एक सुघर मुकुट ठहिरही।

[6] ओह ओकर बर नियाय के एक आतमा होही जऊन ह नियाय के आसन म बईठथे, ओह ओमन बर ताकत के मूल होही जेमन बईरीमन ला वापिस दुवार कोति ढकेल देथें।

[7] अऊ येमन घलो अंगूर के मंद पीके डगमगाथें अऊ मंद ले लड़खड़ाथें: पुरोहित अऊ अगमजानीमन मंद पीके डगमगाथें अऊ अंगूर के मंद पीके गिर जाथें; ओमन मंद पीके लड़खड़ाथें, ओमन डगमगाथें, जब ओमन दरसन देखथें, ओमन लड़खड़ाथें, जब ओमन फैसला सुनाथें।

[8] जम्मो मेजमन उल्टी ले भरे हवंय अऊ अइसे कोनो जगह नइं बांचे हवय, जिहां गंदगी नइं ए।

[9] “येह कोन ए, जेला ओह सिखाय के कोसिस करत हे? कोन ला ओह अपन संदेस के अर्थ समझावत हे? का ओ लइकामन ला, जेमन के दूध छोंड़ाय गे हवय, का ओमन, जेमन ला अभी-अभी दाई के थन ले अलग करे गे हवय?

[10] काबरकि येह अय: येला करव, ओला करव, एक नियम येकर बर, एक नियम ओकर बर; थोरकन इहां, थोरकन उहां।”

[11] तब बहुंत अछा, परदेसी भासा अऊ अनजान बोली के संग परमेसर ह ये मनखेमन ले गोठियाही,

[12] जऊन मन ला ओह कहिस, “येह अराम करे के जगह अय, थके मनखेमन अराम करंय”; अऊ, “येह अराम करे के जगह अय”— पर ओमन सुने नइं चाहिन।

[13] एकरसेति, यहोवा के बचन ह ओमन बर बन जाही: येला करव, ओला करव, एक नियम येकर बर, एक नियम ओकर बर; थोरकन इहां, थोरकन उहां— ताकि जब ओमन जावंय, त ओमन पाछू के भार गिरंय; अऊ घायल हो जावंय अऊ फांदा म फंसके पकड़े जावंय।

[14] येकर कारन, हे ठट्ठा करइयामन, जेमन यरूसलेम म ये मनखेमन ऊपर सासन करथव, यहोवा के बचन ला सुनव।

[15] तुमन ये डींग मारथव, “हमन मऊत के संग करार करे हन, मिरतू-लोक के संग हमन एक समझौता करे हन। एकर कारन जब बिपत्ति बाढ़ सहीं आथे, त येह हमन ला छू नइं सकय, काबरकि हमन झूठ के सरन लेय हवन अऊ लबारी के आड़ म लुकाय हवन।”

[16] एकरसेति परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे: “देखव, मेंह सियोन म एक ठन पथरा, एक परखे पथरा, एक ठन कीमती कोना के पथरा, एक मजबूत नीव बर रखे हंव; अऊ जऊन कोनो येकर ऊपर बिसवास करही ओह कभू आतंकित नइं होही।

[17] मेंह नियाय ला नापे के डोरी अऊ धरमीपन ला साहुल ठहिराहूं; करा ह तुम्हर झूठ के सरन-स्थान ला बोहाके ले जाही, अऊ तुम्हर लुकाय के जगह ह पानी म बुड़ जाही।

[18] मऊत के संग तुम्हर करार ह टूट जाही; अऊ मिरतू-लोक के संग तुम्हर समझौता ह नइं ठहिरही। जब बाढ़ सहीं बिपत्ति ह आही, तब तुमन ओमा कुचरे जाहू।

[19] जब-जब भी येह आही, येह तुमन ला दूरिहा ले जाही; बिहनियां के बाद बिहनियां, रात अऊ दिन, येह आके नुकसान करही।” ये संदेस के समझ ह भयंकर आतंक लानही।

[20] बिछौना ह हांथ-गोड़ फईलाय बर बहुंत छोटे हे, अऊ ओढ़ना ह ओढ़े बर सांकुर हवय।

[21] काबरकि यहोवा ह वइसन उठके ठाढ़ होही, जइसन ओह परासीम नांव पहाड़ म ठाढ़ होय रिहिस, ओह अपनआप ला वइसन देखाही, जइसन ओह गिबोन के घाटी म देखाय रिहिस— ताकि ओह अपन काम, अपन अद्भूत काम ला करय, अऊ अपन काम, अपन अलग किसम ला देखावय।

[22] एकरसेति अब तुमन ठट्ठा झन करव, नइं तो तुम्हर बेड़ीमन ला अऊ भारी कर दिये जाही; परभू, सर्वसक्तिमान यहोवा ह मोला बताय हवय कि पूरा देस के बिरूध बिनास के फैसला करे गे हवय।

[23] धियान दव अऊ मोर अवाज ला सुनव, धियान दव अऊ मोर बात ला सुनव।

[24] का कोनो किसान बीज बोय बर नांगर जोतथे, त का लगातार जोतत रहिथे? का ओह लगातार माटी ला फोरथे अऊ काम करत रहिथे?

[25] जब ओह भुइयां ला समतल कर लेथे, त का ओह अजवाईन ला नइं बोवय अऊ जीरा ला नइं छिंचय? का ओह गहूं ला येकर जगह म, जौ ला येकर भाग म अऊ कठिया गहूं ला येकर खेत के मुड़ा म नइं बोवय?

[26] ओकर परमेसर ह ओला सही तरीका सिखोथे अऊ बताथे।

[27] अजवाईन ला बेलन चलाके नइं मिंजे जावय, न ही जीरा ऊपर गाड़ी के चक्का चलाय जावय; अजवाईन ला छड़ी ले अऊ जीरा ला लउठी ले पीटके झर्राय जाथे।

[28] रोटी बनाय बर अनाज ला पीसना जरूरी अय; पर ओला कोनो हमेसा मिंजत नइं रहय। मिंजई करे के गाड़ी के चक्का ह येकर ऊपर चल सकत हे, पर कोनो मनखे अनाज ला पीसे बर घोड़ामन के उपयोग नइं करय।

[29] ये जम्मो चीज घलो सर्वसक्तिमान यहोवा करा ले आथे, जेकर योजना ह अद्भूत अय, जेकर बुद्धि ह उत्तम अय।

यसायाह — Chapters