[1] हे मोर बेटा, यदि तेंह अपन परोसी बर जमानत ले हस, या कोनो अजनबी बर अपन चीज गिरवी म दे हस,
[2] तेंह अपन ही बात म फंस गे हस, अऊ अपन ही बात म पकड़े गे हस।
[3] त हे मोर बेटा, अपनआप ला बंचाय बर अइसे कर, जब तेंह अपन परोसी के हांथ म पड़ गे हस: त, जा, जल्दी कर, अऊ तुरते अपन परोसी ले बिनती कर।
[4] जागत रह; अपन आंखी म झपकी घलो झन आवन दे।
[5] अपनआप ला छुड़ा, जइसे हिरन ह सिकारी के हांथ ले, अऊ चिरई ह चिड़ीमार के जाल ले अपनआप ला छुड़ाथे।
[6] हे अलाल मनखे, चांटीमन करा जा; ओमन के काम ला देख, अऊ बुद्धिमान बन।
[7] ओमन ला न तो कोनो हुकूम देवइया होथे, न देखरेख करइया, अऊ न ही ओमन ऊपर सासन करइया,
[8] तभो ले ओमन धूपकाला म अपन खाना संकेलथें अऊ लुवई के बेरा अपन जेवन कुढ़ोथें।
[9] हे अलाल मनखे, तेंह कब तक सोवत रहिबे? तोर नींद ह कब टूटही?
[10] थोरकन अऊ नींद, थोरकन अऊ ऊंघासी, हांथ म हांथ धरके अऊ थोरकन देर बईठे रहई—
[11] अऊ गरीबी ह चोर सहीं, अऊ घटी ह हथियार धरे मनखे सहीं तोर ऊपर आ जाही।
[12] समस्या खड़े करइया अऊ दुस्ट मनखे ह बेईमानी के बात करथे;
[13] ओह खराप इरादा से आंखी मारथे, अपन पांव ले इसारा करथे अऊ अपन अंगरी ले घलो इसारा करथे।
[14] ये काम ओह अपन खराप मन ले बुरई के बात ला सोचके करथे; ओह हमेसा झगरा करे म लगे रहिथे।
[15] एकरसेति, बिपत्ति ह ओकर ऊपर अचानक आ जाही; पल भर म, बिगर कोनो बचाव के ओह नास हो जाही।
[16] छै ठन चीज ला यहोवा ह नापसंद करथे, अऊ सात ठन चीज ले ओह घिन करथे:
[17] घमंड ले भरे आंखी, लबारी बात कहइया जीभ, निरदोस मनखे के खून बहानेवाला हांथ,
[18] दुस्टता के बात सोचनेवाला हिरदय, खराप काम करे बर तियार रहइया पांव,
[19] लबरा गवाह, जऊन ह लबारी के ऊपर लबारी मारथे अऊ ओ मनखे जऊन ह मनखेमन के बीच म फूट डारथे।
[20] हे मोर बेटा, अपन ददा के हुकूम ला मान अऊ अपन दाई के सिकछा ला झन छोंड़।
[21] ये बातमन ला हमेसा अपन हिरदय म रख; येमन ला अपन घेंच म माला सहीं पहिर ले।
[22] जब तेंह रेंगबे, त येमन तोर अगुवई करहीं; जब तेंह सुतबे, त येमन तोर रखवारी करहीं; अऊ जब तेंह जागबे, त येमन तोर ले गोठियाहीं।
[23] काबरकि ये हुकूम ह एक दीया सहीं अय; ये सिकछा ह अंजोर सहीं अय, अऊ सुधार अऊ निरदेस जिनगी के रसता सहीं अंय;
[24] येमन तोला परोसी के घरवाली, अऊ छिनार माईलोगन के गुरतूर बोली ले बचाथें।
[25] ओकर सुघरता ला देखके अपन मन म ओकर लालसा झन कर अऊ ओकर आंखी के जादू तोला झन मोहय।
[26] काबरकि एक बेस्या के कीमत एक रोटी हो सकथे, पर आने मनखे के घरवाली ह तोर खुद के जिनगी ला लूट लेथे।
[27] का अइसे हो सकथे कि कोनो मनखे आगी ला अपन कोरा म रखे अऊ ओकर ओनहा ह नइं जरय?
[28] या का अइसे हो सकथे कि कोनो मनखे आगी म रेंगे अऊ ओकर पांव ह नइं झुलसय?
[29] अइसे ओ मनखे के दसा होथे, जऊन ह आने के घरवाली संग सुतथे; जऊन ह अइसे माईलोगन ला छूथे, ओह दंड के भागी होही।
[30] जऊन चोर ह अपन पेट के भूख ला मिटाय बर चोरी करथे, ओला मनखेमन तुछ नइं समझंय।
[31] तभो ले यदि ओह पकड़े जाथे, त ओला सात गुना भरना पड़ही; चाहे ओला अपन घर के जम्मो चीज देना पड़य।
[32] जऊन ह बेभिचार करथे, ओकर करा बुद्धि नइं ए; जऊन ह अइसे करथे, ओह अपनआप ला नास करथे।
[33] ओह मार खाथे अऊ अपमानित होथे, अऊ ओकर कलंक ह कभू नइं मिटय।
[34] काबरकि जलन ह घरवाला ला बहुंत गुस्सा देवाथे, अऊ बदला लेवत बेरा ओह दया नइं करय।
[35] ओह नुकसान के भरपई नइं चाहय; ओला जतका भी घूस दे दव, ओह नइं मानय।