Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 4:07

[1] यहोवा के हांथ म राजा के मन ह पानी के नरवा सहीं अय जऊन ला ओह ओ जम्मो मनखे कोति मोड़ देथे, जेमन ले ओह खुस होथे।

[2] मनखे ह सोचथे कि ओकर खुद के चालचलन ह सही अय, पर यहोवा ह मनखे के मन ला जांचथे।

[3] सही अऊ नियाय के काम करई ह यहोवा ला बलिदान ले जादा बने लगथे।

[4] घमंड ले चढ़े आंखी अऊ घमंडीमन— अऊ दुस्ट मनखे के बिगर जोते खेत—ये तीनों ले पाप होथे।

[5] मेहनती मनखे के योजना ले लाभ होथे पर जल्दबाजी करइया ह गरीब हो जाथे।

[6] लबारी मारके कमाय गे धन ह तुरते उड़ जानेवाला भाप अऊ मिरतू के फांदा सहीं अय।

[7] दुस्टमन के हिंसक काम ह ओमन ला नास कर दीही, काबरकि ओमन सही काम करे बर नइं चाहंय।

[8] दोसी मनखे के काम ह टेढ़ा होथे, पर निरदोस मनखे के आचरन ह सीधा होथे।

[9] झगड़ालू घरवाली के संग घर म रहई के बदले छानी के कोनटा म रहई ह बने अय।

[10] दुस्ट मनखेमन बुरई करे के लालसा करथें; ओमन अपन परोसी ऊपर कोनो दया नइं करंय।

[11] जब ठट्ठा करइया ला दंड मिलथे, त सधारन मनखे ह बुद्धि पाथे; बुद्धिमान मनखे के बात ला सुनके ओमन गियान पाथें।

[12] धरमी जन ह दुस्ट मनखे के घर ऊपर नजर रखथे अऊ ओला बिनास म पहुंचा देथे।

[13] जऊन ह गरीब के गोहार ला नइं सुनय, ओह खुद घलो गोहार पारही, पर ओकर कोनो जबाब नइं मिलही।

[14] गुपत म दिये गे भेंट ले गुस्सा ह सांत होथे, अऊ छुपाके दिये गे घूस ह भयंकर गुस्सा ला घलो सांत करथे।

[15] जब नियाय मिलथे, त येकर से धरमी ह आनंदित होथे पर दुस्टमन ऊपर आतंक छा जाथे।

[16] जऊन ह समझदारी के रसता ले भटक जाथे, ओह मरे मनखेमन के संग ठिकाना पाथे।

[17] जऊन ह मऊज-मस्ती ले मया करथे, ओह गरीब हो जाही; जऊन ह अंगूर के मंद अऊ जैतून तेल ले मया करथे, ओह कभू धनी नइं होवय।

[18] दुस्ट मनखे ह धरमी जन बर छुड़ौती ठहिरथे, अऊ बिसवासघाती ह ईमानदार मनखे बर छुड़ौती होथे।

[19] झगरा करइया अऊ चिढ़ देवइया घरवाली के संग रहे के बदले सुनसान जगह म रहई ह बने ए।

[20] बुद्धिमान मनखे ह मनभावन जेवन अऊ जैतून तेल जमा करथे, पर मुरूख मनखे ह ओमन ला गटागट खा जाथे।

[21] जऊन ह धरमीपन अऊ मया करे म लगे रहिथे, ओह जिनगी, धन अऊ आदर पाथे।

[22] बुद्धिमान मनखे ह सूरबीरमन के सहर म चढ़ई करके ओमन के गढ़ ला गिरा सकथे, जेमा ओमन भरोसा करथें।

[23] जऊन मन अपन मुहूं अऊ जीभ ला बस म रखथें, ओमन अपनआप ला बिपत्ति ले बचाथें।

[24] घमंडी अऊ जिद्दी मनखे ला “ठट्ठा करइया” कहिथें— ओकर बरताव ह घमंड अऊ गुस्सा ले भरे रहिथे।

[25] आलसी मनखे के ईछा ह ओला मार डालथे, काबरकि ओकर हांथमन काम करे बर नइं चाहंय।

[26] दिन भर ओह ईछा करते रहिथे, पर धरमी मनखे ह अपन बर बिगर रखे दे देथे।

[27] दुस्ट के बलिदान ह घिन के चीज होथे— त ओह अऊ कतेक घिन के लईक होही, जब ओह बुरई करे के ईछा से लाथे!

[28] लबरा गवाह ह नास होही, पर धियान से सुनइया ह सही गवाही दीही।

[29] दुस्ट मनखे के मुहूं ह कठोर होथे, पर सीधवा मनखे ह अपन चालचलन ऊपर बिचार करथे।

[30] अइसे कोनो बुद्धि, समझ या योजना नइं ए, जऊन ह यहोवा के बिरोध म सफल होवय।

[31] लड़ई के दिन बर घोड़ा ला तो तियार करे जाथे, पर जीत यहोवा के दुवारा ही मिलथे।

नीतिबचन — Chapters