[1] कल के दिन बर घमंड झन कर, काबरकि तें नइं जानस कि कल का होही।
[2] आने मन तोर बड़ई करंय तो करंय, पर तें अपन बड़ई झन करबे; बाहिरी मनखेमन तोर बड़ई करंय, पर तें खुद झन करबे।
[3] पथरा ह भारी अऊ बालू ह एक बोझ होथे, पर मुरूख के उकसई ह ये दूनों ले भारी होथे।
[4] गुस्सा ह निरदयी ए अऊ उत्तेजना ह बियाकुल कर देथे, पर ईरसा के आघू म कोन ठहर सकथे?
[5] खुला डांट ह छुपे मया ले बने अय।
[6] कोनो संगी के चोट पहुंचई के भरोसा करे जा सकथे, पर कोनो बईरी के बहुंत चूमा ला घलो भरोसा नइं करे जा सकय।
[7] जेकर पेट भरे होथे, ओला मधु-छत्ता के मंधरस घलो बने नइं लगय, पर भूखा मनखे ला करू चीज घलो मीठ लगथे।
[8] अपन घर ला छोंड़के भागनेवाला ह ओ चिरई सहीं होथे, जऊन ह अपन खोंधरा छोंड़के भाग जाथे।
[9] इतर अऊ खुसबूदार धूप ह मन ला आनंदित करथे, अऊ कोनो संगी के हिरदय ले निकले सलाह ह ओकर खुसी ला देखाथे।
[10] अपन संगी या अपन परिवारिक संगी ला झन छोंड़बे, अऊ अपन बिपत्ति के बेरा अपन रिस्तेदार के घर झन जाबे— लकठा म रहइया परोसी ह दूरिहा म रहइया रिस्तेदार ले बने अय।
[11] हे मोर बेटा, बुद्धिमान बन अऊ मोर मन ला आनंदित कर; तब मेंह ओला जबाब दे सकहूं, जऊन ह मोर अपमान करथे।
[12] समझदार मनखे ह खतरा ला देखके सरन ले लेथे, पर सीधवा मनखे ह चलते रहिथे अऊ हानि उठाथे।
[13] ओ मनखे के कपड़ा ला लेय ले, जऊन ह कोनो अजनबी मनखे के जिम्मेदारी लेथे; यदि ये काम कोनो बाहिरी मनखे बर करे जाथे, त ओ कपड़ा ला गिरवी के रूप म रख।
[14] यदि कोनो मनखे ह बड़े बिहनियां अपन परोसी ला ऊंचहा अवाज म आसीस देथे, त येला एक सराप समझे जाही।
[15] झगरा करइया घरवाली ह बारिस के दिन म छानी ले लगातार चूहत पानी सहीं अय;
[16] ओला रोकई, हवा ला रोकई सहीं या हांथ म तेल ला पकड़ई सहीं अय।
[17] जइसने कि लोहा ह लोहा ला तेज करथे, वइसने ही एक मनखे ह दूसर मनखे ला तेज बनाथे।
[18] जऊन ह अंजीर रूख के रखवारी करथे, ओह ओकर फर खाही, अऊ जऊन ह अपन मालिक के रकछा करथे, ओकर आदर होही।
[19] जइसने कि पानी ह चेहरा के परछाई ला देखाथे, वइसने ही मनखे के मन ह ओकर जिनगी ला परगट करथे।
[20] मिरतू अऊ बिनास कभू संतोस नइं होवंय, अऊ न ही मनखे के आंखी ह संतोस होवय।
[21] चांदी ला परखे बर कुठाली अऊ सोन ला परखे बर भट्ठी होथे, पर मनखे के परख ओकर परसंसा के दुवारा होथे।
[22] चाहे तेंह मुरूख ला ओखली म पीस, या ओला लोढ़ा म अनाज सहीं पीस, तभो ले तेंह ओकर मुरूखता ला ओकर ले अलग नइं कर सकस।
[23] अपन भेड़-बकरी के झुंड के दसा ला बने करके जान ले, अपन पसु के झुंड के बने करके धियान रख;
[24] काबरकि धन ह हमेसा बर नइं रहय, अऊ राज-मुकुट ह पीढ़ी-पीढ़ी तक बने नइं रहय।
[25] जब कांदी ला काटके हटाय जाथे, त नवां कांदी निकलथे अऊ पहाड़ ले कांदी ला संकेले जाथे,
[26] भेड़ के पीलामन तोर बर कपड़ा दीहीं, अऊ बोकरामन खेत बिसाय बर कीमत दीहीं।
[27] तोर करा अपन परिवार के मनखेमन ला पीयाय बर बकरी के बहुंत दूध होही अऊ येकर ले तोर सेविकामन के घलो पालन-पोसन होही।