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[1] दुस्ट मनखे के बारे म जलन झन रखबे, ओमन के संगति के ईछा झन करबे;

[2] काबरकि ओमन हिंसा के बात सोचथें, अऊ ओमन समस्या खड़े करे के बात करथें।

[3] बुद्धि के दुवारा घर ह बनथे, अऊ समझ के जरिये येह इस्थिर होथे;

[4] गियान के जरिये येकर कमरामन दुरलभ अऊ सुघर खजाना ले भर जाथें।

[5] बुद्धिमान ह अपन बड़े सक्ति के जरिये जय पाथे, अऊ जेकर करा गियान होथे, ओह अपन ताकत बढ़ाथे।

[6] खचित, लड़ई बर तोला सही युक्ति के जरूरत हवय, अऊ बिजय बहुंत सलाहकारमन के जरिये मिलथे।

[7] बुद्धि ह अतेक ऊपर म हवय कि मुरूख ह ओला पा नइं सकय; ओह सभा के दुवार म कुछू गोठिया नइं सकय।

[8] जऊन ह दुस्टता के सडयंत्र रचथे, ओह सडयंत्र रचइया के रूप म जाने जाथे।

[9] मुरूखता के योजना बनई ह पाप ए, अऊ मनखेमन ठट्ठा करइया ले घिन करथें।

[10] यदि बिपत्ति के बेरा तेंह लड़खड़ाथस, त तोर सक्ति बहुंत कम हवय!

[11] जऊन मन ला मार डाले बर ले जावथें, ओमन ला छुड़ा; जऊन मन मरे बर लड़खड़ावत जावथें, ओमन ला रोक ले।

[12] यदि तेंह कहिथस, “पर हमन येकर बारे म कुछू नइं जानत रहेंन,” त का मन के जांचनेवाला ह येला नइं समझय? जऊन ह तोर जिनगी के रखवारी करथे, ओह का येला नइं जानय? का ओह हर एक मनखे ला ओकर काम के मुताबिक ओकर परतिफल नइं दीही?

[13] हे मोर बेटा, मंधरस ला खा, काबरकि येह बने अय; मधु-छत्ता के मंधरस ह सुवाद म मीठ लगथे।

[14] ये बात ला घलो जान ले कि बुद्धि ह तोर बर मंधरस के सहीं अय: यदि येह तोला मिलथे, त भविस्य म तोर बर एक आसा हवय, अऊ तोर आसा ह नइं टूटही।

[15] धरमी मनखे के घर के लकठा म एक चोर के सहीं घात झन लगा, ओकर निवास ला झन लूट;

[16] काबरकि धरमी जन चाहे सात बार ले गिरे, पर ओह फेर उठही, पर दुस्ट मनखेमन बिपत्ति आय ले लड़खड़ाथें।

[17] जब तोर बईरी ह गिरथे, त खुस झन होबे; जब ओह लड़खड़ाथे, त अपन मन म आनंदित झन हो,

[18] नइं तो यहोवा ह येला देखही अऊ खुस नइं होही अऊ ओह तोर बईरी ऊपर ले अपन कोप ला हटा लीही।

[19] कुकरमीमन के कारन झन कुढ़ या दुस्ट मनखे ले जलन झन रख,

[20] काबरकि कुकरमी के कोनो भविस्य नइं ए, अऊ दुस्ट मनखे के दीया ह बुता जाही।

[21] हे मोर बेटा, यहोवा अऊ राजा के भय मान, अऊ बिदरोही करमचारीमन के संग झन जा,

[22] काबरकि ओ दूनों ओमन के अचानक बिनास कर दीहीं, अऊ कोन जानथे कि ओमन अऊ का बिपत्ति ला सकथें?

[23] बुद्धिमान मनखे के कहावत ये घलो अंय: नियाय म पखियपात करई ह बने नो हय:

[24] जऊन ह दोसी मनखे ला कहिथे, “तेंह निरदोस अस,” ओला मनखेमन सराप देथें अऊ जाति-जाति के मनखेमन ओकर ले घिन करथें।

[25] पर जऊन मन दोसी ला दोसी ठहिराथें, ओमन के भलई होही, अऊ ओमन ऊपर बहुंत आसीस होही।

[26] एक ईमानदार जबाब ह ओंठ ला चूमा देय सहीं अय।

[27] अपन बाहिर के काम ला ठीक कर ले अऊ अपन खेत ला तियार रख; ओकर बाद, अपन घर ला बना।

[28] बिगर कारन के, अपन परोसी के बिरूध गवाही झन देबे, अऊ अपन बात के दुवारा ओला झन बहकाबे।

[29] ये झन कहिबे, “जइसने ओमन मोर संग करे हवंय, वइसने मेंह ओमन के संग करहूं; जइसने ओमन करे हवंय, मेंह ओमन ले ओकर बदला लूहूं।”

[30] मेंह एक आलसी के खेत ले अऊ एक अगियानी के अंगूर के बारी ले होवत गेंव;

[31] त देखेंव कि उहां हर जगह कंटिला पऊधामन भर गे हवंय, भुइयां ह कांदी ले भर गे हवय, अऊ पथरा के बाड़ा ह टूट गे हवय।

[32] ओमन ला धियान से देखके, मन म बिचार करेंव अऊ जऊन कुछू मेंह देखेंव, ओकर ले एक बात सीखेंव:

[33] थोरकन अऊ नींद, थोरकन अऊ ऊंघासी, हांथ म हांथ धरके अऊ थोरकन देर बईठे रहई—

[34] अऊ गरीबी ह चोर सहीं अऊ घटी ह हथियार धरे मनखे सहीं तोर ऊपर आ जाही।

नीतिबचन — Chapters