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[1] लेमूएल राजा के कहावत—एक परभावसाली बचन, जऊन ला ओकर दाई ह ओला सिखोईस।

[2] सुन, हे मोर बेटा! सुन, हे मोर कोख के बेटा! सुन, हे मोर बेटा, तेंह मोर पराथना के जबाब अस!

[3] अपन ताकत ला माईलोगन ऊपर झन लगा, अऊ न ही अपन बल के उपयोग ओमन बर करबे, जऊन मन राजामन ला नास करथें।

[4] हे लेमूएल, येह राजामन बर नो हय, अंगूर के मंद पीयई राजामन बर ठीक नो हय, अऊ न ही सासन करइयामन बर मंद के लालसा करना बने अय,

[5] नइं तो ओमन पीके कानून ला भुला जाहीं, अऊ जम्मो दुखी मनखेमन के हक ला मारहीं।

[6] मंद ह ओमन बर होवय, जऊन मन नास होवथें, अऊ अंगूर के मंद ओमन बर अय, जेमन के मन ह उदास हवय!

[7] ओमन पीयंय अऊ अपन गरीबी ला भुला जावंय अऊ अपन दुख ला सुरता झन करंय।

[8] जऊन मन अपन बर नइं गोठिया सकंय, ओमन बर गोठिया, ओमन के अधिकार बर, जऊन मन गरीब-अनाथ अंय।

[9] गोठिया अऊ सही नियाय कर; गरीब अऊ जरूरतमंद मनखेमन के अधिकार के बचाव कर।

[10] उत्तम चालचलन के घरवाली कोन पा सकथे? ओकर कीमत मनि ले घलो बहुंत जादा होथे।

[11] ओकर घरवाला ला ओकर ऊपर पूरा भरोसा रहिथे अऊ ओला कोनो बने चीज के घटी नइं होवय।

[12] ओह अपन जिनगी भर अपन घरवाला बर भलई के काम करथे, बुरई के नइं।

[13] ओह ऊन अऊ सन छांटथे अऊ खुस होके अपन हांथ ले काम करथे।

[14] ओह बेपारी जहाज के सहीं अपन जेवन दूरिहा ले लानथे।

[15] ओह रथिया के रहत उठ जाथे; ओह अपन परिवार के जेवन के परबंध करथे अऊ अपन सेविकामन ला घलो ओमन के हिस्सा देथे।

[16] ओह कोनो खेत ला सोच-बिचार करके बिसाथे; ओह अपन कमई ले अंगूर के बारी लगाथे।

[17] ओह मेहनत से अपन काम ला जमाथे; ओकर हांथमन ओकर काम बर मजबूत होथें।

[18] ओह ये बात के धियान रखथे कि ओला ओकर काम-धंधा म लाभ मिलय, अऊ रथिया ओकर दीया ह झन बुतावय।

[19] ओह अटेरन ला अपन हांथ म धरथे अऊ चरखा के धुरा ला अपन अंगरी म पकड़थे।

[20] ओह गरीबमन के मदद करे बर अपन हांथ खोलथे अऊ जरूरतमंद मनखे बर अपन हांथ बढ़ाथे।

[21] जब बरफ गिरथे, त ओला अपन परिवार के चिंता करे के जरूरत नइं रहय; काबरकि परिवार के जम्मो झन गरम कपड़ा पहिरे रहिथें।

[22] ओह अपन बिस्तर बर चादर बनाथे; ओह सुघर सन के बने अऊ बैंगनी कपड़ा पहिरथे।

[23] सहर के दुवार म ओकर घरवाला के आदर होथे, जिहां ओह देस के अगुवामन के बीच म बईठथे।

[24] ओह सन के कपड़ा बनाके बेचथे, अऊ बेपारीमन ला बेचे बर दुपट्टा देथे।

[25] ओह बल अऊ सम्मान के पहिरावा पहिरे रहिथे; ओह अवइया समय ऊपर हंस सकथे।

[26] ओह बुद्धि के संग गोठियाथे, अऊ ओकर मुहूं ले सच्चई के सिकछा निकलथे।

[27] ओह अपन घर के कामकाज ऊपर नजर रखथे अऊ बिगर मेहनत के रोटी नइं खावय।

[28] ओकर लइकामन उठके ओला धइन कहिथें; ओकर घरवाला घलो ओला आसीसित कहिथे, अऊ ये कहिके ओकर परसंसा करथे:

[29] “कतको माईलोगनमन उत्तम काम करथें, पर तेंह ओ जम्मो ले बढ़के करथस।”

[30] आकरसन ह धोखा देवइया ए अऊ सुन्दरता ह गायब हो जाथे; पर जऊन माईलोगन ह यहोवा के भय मानथे, ओकर परसंसा होथे।

[31] ओह जऊन काम करे हवय, ओ जम्मो बर ओकर आदर करव, अऊ ओकर काम के कारन सहर के दुवार म ओकर परसंसा होवय।

नीतिबचन — Chapters