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[1] जइसने कि गरमी के महिना म बरफ गिरई अऊ फसल लुवई के बेरा बारिस होवई ह बने नो हय वइसने ही मुरूख मनखे के आदर करई ह बने नो हय।

[2] जइसने कि डेना फड़फड़ावत गौरइया या उड़त अबाबील चिरई नइं बईठ सकय, वइसने ही बेकार के दिये गे सराप ह नइं लगय।

[3] घोड़ा बर चाबुक, गदहा बर लगाम, अऊ मुरूखमन के पीठ बर छड़ी अय!

[4] कोनो मुरूख ला ओकर मुरूखता के मुताबिक जबाब झन देबे, नइं तो तें खुद घलो ओकर सहीं ठहिरबे।

[5] मुरूख ला ओकर मुढ़ता के मुताबिक जबाब देबे, नइं तो ओह अपन खुद के नजर म बुद्धिमान ठहिरही।

[6] कोनो मुरूख के हांथ ले खबर पठोई ह अपन गोड़ म टांगा मारई या जहर पीयई सहीं अय।

[7] जइसने कि कोनो लंगड़ा के बेकार गोड़ ह होथे वइसने ही कोनो मुरूख के मुहूं ले कहावत निकलई होथे।

[8] जइसने कि कोनो पट्टा म बंधई पथरा होथे वइसने ही कोनो मुरूख ला आदर देवई होथे।

[9] जइसने कि कोनो मतवार के हांथ म कंटिली झाड़ी होथे वइसने ही कोनो मुरूख के मुहूं ले कहावत निकलई होथे।

[10] जइसने कि कोनो धनुसधारी ह बिगर सोचे-समझे चोट पहुंचाथे वइसने ही ओह अय, जऊन ह कोनो मुरूख या डहार-रेंगइया ला काम म रखथे।

[11] जइसने कि कुकुर ह अपन उछरे चीज ला खाय बर फेर लहुंटके आथे, वइसने ही मुरूखमन अपन मुरूखता ला दोहराथें।

[12] का तेंह अइसे मनखे ला देखथस, जऊन ह अपन खुद के नजर म बुद्धिमान ए? त फेर ओकर ले जादा आसा मुरूख ऊपर रख।

[13] आलसी मनखे ह कहिथे, “डहार म सेर हवय, एक भयंकर सेर गली म घुमत हवय!”

[14] जइसने कि कपाट ह अपन कब्जा म घुमथे, वइसने ही आलसी मनखे ह अपन खटिया म करवट लेथे।

[15] आलसी मनखे ह अपन हांथ जेवन के थाली म तो डालथे; पर आलस के मारे, ओह कऊंरा ला मुहूं तक नइं लानय।

[16] आलसी मनखे ह अपनआप ला ओ सात मनखे ले घलो बुद्धिमान समझथे, जऊन मन समझदारी से जबाब देथें।

[17] जइसने कि कोनो मनखे ह भटकत कुकुर ला कान ले धरथे वइसने ही ओह अय, जऊन ह आने के झगरा म झंपई होथे।

[18] जइसने कि पागल मनखे ह मिरतू के बरत तीरमन ला छोंड़थे

[19] वइसने ही ओह अय, जऊन ह अपन परोसी ला धोखा देथे अऊ कहिथे, “मेंह तो मजाक करत रहेंव!”

[20] जइसने कि बिगर लकरी के आगी ह बुता जाथे; वइसने ही बक-बक नइं करे ले झगरा ह खतम हो जाथे।

[21] जइसने कि कोइला ह आगी ला बनाय रखथे अऊ लकरी ले आगी बरथे वइसने ही झगड़ालू मनखे ह समस्या खड़े करथे।

[22] बकवास करई ह सुवादवाले जेवन सहीं होथे; येमन मनखे के भीतर तक चले जाथें।

[23] जइसने कि चांदी के परत चढ़ाय माटी के बरतन होथे वइसने ही बुरई ले भरे मनखे के मयारू बचन होथे।

[24] बईरीमन अपन बात के दुवारा सीधवा बनथें, पर अपन मन म छल-कपट के बात छुपाके रखथें।

[25] हालाकि ओमन खुसी देवइया बात कहिथें, पर ओमन ऊपर बिसवास झन करबे, काबरकि ओमन के मन ह सात ठन घिनौना चीज ले भरे रहिथे।

[26] ओमन के बईरता ह छल-कपट के कारन छुप जाथे, पर ओमन के दुस्टता ह भरे सभा म परगट हो जाही।

[27] जऊन ह आने बर खंचवा कोड़थे, ओह खुद ओमा गिरही; जऊन ह आने ऊपर पथरा ला ढलंगाथे, ओ पथरा ह वापिस ओकरेच ऊपर ढलंगही।

[28] जऊन ह लबारी मारके आने मन ला चोट पहुंचाथे, ओह ओमन ले घिन करथे, अऊ चापलूसी करइया ह बिनास के काम करथे।

नीतिबचन — Chapters