[1] मनखे ह अपन मन के योजना के बस म रहिथे, पर मुहूं के सही जबाब यहोवा करा ले आथे।
[2] मनखे के जम्मो चालचलन ओकर नजर म सही जान पड़थे, पर मन के उदेस्य ला यहोवा ह जांचथे।
[3] अपन जम्मो काम ला यहोवा ला सऊंप दव, अऊ ओह तुम्हर योजना ला स्थापित करही।
[4] यहोवा ह जम्मो काम एक उदेस्य के संग करथे— इहां तक कि दुस्ट ला बिपत्ति के दिन बर रखथे।
[5] यहोवा ह मन के जम्मो घमंड के बात ले घिन करथे। ये बात निस्चित ए: ओमन दंड पाय बिगर नइं बचंय।
[6] मया अऊ बिसवासयोग्यता के दुवारा पाप के पछताप होथे; यहोवा के भय माने के दुवारा बुरई ले बचे जाथे।
[7] जब यहोवा ह काकरो काम ले खुस होथे, त ओह ओकर बईरीमन के घलो ओकर ले मेल-मिलाप कराथे।
[8] अनियाय करके बहुंत कमाय ले धरमीपन के दुवारा थोरकन कमई ह बने अय।
[9] मनखेमन अपन मन म अपन जिनगी जीये के योजना बनाथें, पर यहोवा ह ओमन के जिनगी के कदम ला इस्थिर करथे।
[10] राजा के मुहूं ले गियान के बात निकलथे, अऊ ओह अनियाय के बात नइं करय।
[11] ईमानदारी के नाप अऊ तराजू यहोवा के अय; थैली के जम्मो वजन ओकर दुवारा बनाय गे हवंय।
[12] राजामन गलत काम ले घिन करथें, काबरकि सिंघासन ह धरमीपन के जरिये इस्थिर रहिथे।
[13] राजामन ईमानदारी के बात म खुस होथें; ओमन ओकर बात ऊपर धियान देथें, जऊन ह सही बात गोठियाथे।
[14] राजा के गुस्सा ह मिरतू के दूत के सहीं अय, पर बुद्धिमान मनखे ह ओला मना लेथे।
[15] जब राजा के चेहरा ह खुस दिखथे, येकर मतलब जिनगी अय; ओकर किरपा बसन्त समय के बारिस के बादर सहीं अय।
[16] बुद्धि ला पाना सोन के पाय ले जादा बने अय, अऊ समझ के बात ला जानना, चांदी के पाय ले जादा बने अय।
[17] ईमानदार मनखे के रसता ह बुरई ले दूरिहा रहिथे; जऊन मन अपन चालचलन ऊपर धियान देथें, ओमन अपन परान ला बचाथें।
[18] बिनास के पहिली घमंड, अऊ ठोकर खाय के पहिली जिद्दी सुभाव आथे।
[19] घमंडी मनखेमन संग लूट के बांटा लेय के बदले दुखी मनखेमन के संग नरम सुभाव से रहई बने अय।
[20] जऊन ह निरदेस ऊपर धियान देथे, ओह बढ़थे, अऊ जऊन ह यहोवा ऊपर भरोसा रखथे, ओह आसीसित होथे।
[21] जेकर हिरदय म बुद्धि हवय, ओला समझदार मनखे कहे जाथे, अऊ मधुर बचन ह मनखेमन ले बात मनवाथे।
[22] समझदार मनखे बर समझदारी ह जिनगी के झरना ए, पर मुरूखता ह मुरूख मनखेमन बर दंड लाथे।
[23] बुद्धिमान के मन ह ओकर बात ला समझदार बनाथे, अऊ ओमन के बात ला मनखेमन मानथें।
[24] गुरतूर बोली ह मधुमक्खी के छत्ता सहीं अय, जऊन ह मन ला सांति अऊ देहें के हाड़ामन ला मजबूत करथे।
[25] एक डहार हवय, जऊन ह मनखे ला सही जान पड़थे, पर आखिर म येह मिरतू करा ले जाथे।
[26] मेहनती मनखेमन के लालसा ओमन बर काम करथे; ओमन के भूख ह ओमन ला उभारथे।
[27] दुस्ट मनखे ह बुरई करे के बात सोचथे, अऊ ओकर बात ह झुलसा देवई आगी सहीं होथे।
[28] जिद्दी मनखे ह झगरा ला बढ़ाथे, अऊ कानाफूसी करई या अफवाह फईलई ह नजदीकी संगीमन के बीच फूट डाल देथे।
[29] हिंसक मनखे ह अपन परोसी ला बहकाथे अऊ ओला बुरई के रसता म ले चलथे।
[30] जऊन ह बार-बार आंखी के पलक झपकाथे, ओह सडयंत्र रचथे; जऊन ह ओंठ दबाथे, ओह बुरई करथे।
[31] पाके चुंदी ह सोभा देवइया मुकुट सहीं अय; येह धरमीपन के रसता म चले के दुवारा मिलथे।
[32] धीरजवाला मनखे ह एक योद्धा ले बने होथे, अऊ मन ला बस म रखई ह सहर ला जीत लेवई ले उत्तम अय।
[33] परची ह कोरा म डाले जाथे, पर येकर हर एक निरनय ह यहोवा कोति ले होथे।