[1] हम जो मज़बूत हैं, हमें कमज़ोर (संवेदनशील) लोगों को सहारा देना चाहिए, बजाए इसके कि अपने आप को खुश करने का अवसर ढूँढते रहें।
[2] हम में से हर एक जन अपने पड़ोसी की भलाई सोचे तथा उसकी उन्नति के लिए कोशिश करे।
[3] यीशु ने भी अपने आप को खुश करना नहीं चाहा। जैसा कि लिखा है, "जो तुम्हारी बेइज़्ज़ती करते हैं, उनकी बेइज़्ज़ती मुझ पर आ गिरी है।"
[4] जो बातें पहले लिखी गयी थीं, वे हमारे सिखाने के लिए थीं ताकि हम धीरज और वचन से साहस पाकर आशा रखें।
[5] अब धीरज और प्रोत्साहन के पिता परमेश्वर, मसीह यीशु के नमूने के समान, तुम सभी को एक दूसरे के लिए सहानुभूति दें,
[6] ताकि तुम सभी एक मन और एक मुँह से प्रभु यीशु मसीह के पिता को आदर दे सको।
[7] इसलिए परमेश्वर के सम्मान के लिए, जैसा यीशु ने तुम्हें अपनाया है, तुम भी एक दूसरे को अपना लो।
[8] अब मैं कहता हूँ कि यीशु मसीह, परमेश्वर के सत्य के लिए यहूदियों के लिए सेवक बने, ताकि पूर्वजों को दी गयी प्रतिज्ञाओं की पुष्टि हो सके,
[9] और यह भी कि गैरयहूदी परमेश्वर की दया के लिए उन्हीं की प्रशंसा करें। जैसा कि लिखा है, इस कारणवश गैरयहूदियों के सामने मैं तुम्हें मान लूँगा ताकि तुम्हारे नाम के गीत गाऊँ।
[10] वह फिर कहते हैं, "हे गैरयहूदियो, परमेश्वर के लोगों (यहूदियों) के साथ आनन्दित हो।
[11] फिर से, "सभी गैरयहूदियो, याहवे की स्तुति करो; सभी लोग उनकी महिमा करें।"
[12] पुनः यशायाह भविष्यद्वक्ता कहता है, "यिशै (दाऊद) का वंश सदा बना रहेगा। वह गैरयहूदियों के ऊपर शासन करेंगे, गैरयहूदी उन (यीशु) पर भरोसा रखेंगे।"
[13] विश्वास करने के कारण अब आशा के दाता तुम्हें आनन्द और शान्ति से भर दें, ताकि तुम पवित्र आत्मा की शक्ति से आशा में उमड़ते रहो।
[14] मेरे भाइयो-बहनो, मैं स्वयं तुम्हारे बारे में बेफिक्र हूँ कि तुम भी भलाई और ज्ञान से भरे हो और एक दूसरे को सिखाने के लायक हो।
[15] फिर भी भाइयो-बहनो कुछ विषयों पर परमेश्वर पिता की कृपा के कारण मैंने हिम्मत के साथ यह याद दिलाने के लिए लिखा है,
[16] कि मैं गैर यहूदियों के बीच सु-संदेश देने वाला यीशु मसीह का सेवक बनूँ, ताकि पवित्र आत्मा द्वारा शुद्ध किए जाने से गैरयहूदियों का समर्पित किया जाना ग्रहणयोग्य हो।
[17] इसलिए परमेश्वर की बातों में खुश होने के लिए मेरे पास यीशु मसीह में ही कारण है।
[18] गैर यहूदियों को आज्ञाकारी बनाने के लिए मसीह ने जिन बातों को मेरे द्वारा नहीं किया है, उन में से किसी बात को कहने के लिए मैं हिम्मत न करूँगा।
[19] ताकि जो वचन और कार्य की शक्ति अद्भुत कामों और चिन्हों में दिखायी दी, मैंने बिना किसी सीमा के मसीह के सुसमाचार को यरूशलेम और उसके बाहर के जिलों में परिश्रम से इल्लुरिकुम तक सुनाया।
[20] मैंने अपना लक्ष्य यह बनाया है कि जहाँ-जहाँ मसीह का नाम नहीं पहुँचा है, वहाँ सुसमाचार पहुँचाऊँ, ताकि मैं किसी दूसरे व्यक्ति की नींव पर इमारत न बनाऊँ।
[21] किन्तु ऐसा लिखा है, "जिनके बारे में कहा नहीं गया, वे देखेंगे, जिन्होंने सुना नहीं, वे समझेंगे"।
[22] इस कारणवश भी मैं तुम्हारे पास नहीं आ सका।
[23] लेकिन अब इन सभी क्षेत्रों में सुसमाचार पहुँचाए जाने और बहुत वर्षों से मिलने की इच्छा के कारण मैं स्पेन आऊँगा, और मिलूँगा।
[24] मेरी आशा है कि मैं कुछ दिन तुम्हारे साथ समय बिताऊँ और फिर तुम मुझे आगे पहुँचा दो।
[25] अभी मैं यरूशलेम के पवित्र लोगों की सेवा के लिए वहाँ जा रहा हूँ।
[26] क्योंकि मकिदुनिया और अखाया के लोगों को यह अच्छा लगा था, कि वे यरूशलेम के पवित्र लोगों के बीच गरीबों के लिए कुछ इकट्ठा करें।
[27] सच पूछो, तो यह उन्हें अच्छा लगा और वे यरूशलेम के लोगों के कर्ज़दार भी हैं। क्योंकि यदि गैरयहूदियों को उन से आत्मिक फ़ायदा मिला है, तो उनकी ज़िम्मेदारी यह है कि धन से उनकी मदद करें।
[28] इसलिए जब मैं यह कार्य पूरा कर लूँगा और उन्हें यह मदद मिल जाएगी तो तुम्हारे पास से होता हुआ स्पेन जाऊँगा।
[29] मुझे निश्चय है कि जब मैं तुम्हारे पास आऊँ, तो मसीह के सुसमाचार की आशीष की भरपूरी में आऊँ।
[30] मैं यीशु मसीह के नाम से और पवित्र आत्मा के प्रेम के कारण तुम से बिनती करता हूँ, कि परमेश्वर से मेरे लिए प्रार्थना करने में लगे रहो,
[31] ताकि मैं यहूदिया नगर में अविश्वासियों के हाथों से छुड़ाया जाऊँ और यरूशलेम के लिए मेरी सेवा पवित्र लोग स्वीकार कर सकें।
[32] परमेश्वर की इच्छा द्वारा मैं बड़ी खुशी के साथ तुम्हारे पास आ सकूँ, और तुम भी उत्साहित हो जाओ।
[33] अब शान्ति के पिता तुम सब के साथ रहें। ऐसा ही हो।