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[1] इसलिए हे भाइयो-बहनो, परमेश्‍वर की कृपा याद दिलाकर मैं तुम से बिनती करता हूँ, कि तुम अपनी देह को एक जीवित, पवित्र और परमेश्‍वर को पसन्द बलिदान करके चढ़ाओ, जो तुम्हारी आत्मिक सेवा है।

[2] इस दुनिया के समान मत बनो, लेकिन तुम्हारे मन के बदले जाने के कारण खुद बदलते जाओ, ताकि तुम परमेश्‍वर की सही, अच्छी और अपनाने लायक इच्छा की पुष्टि कर सको।

[3] उस बड़ी कृपा के कारण जो मुझे मिली, मैं तुम में से प्रत्येक को चेतावनी देता हूँ किसी भी व्यक्‍ति को अपने को दूसरे से बढ़कर नहीं समझना चाहिये। परमेश्‍वर ने हर एक को जिस मात्रा से विश्‍वास दिया है, उसी आधार पर अपने को समझना चाहिए।

[4] जिस तरह हम सब की देह में तमाम अंग हैं और सभी अंगों का काम एक सा नहीं होता है,

[5] उसी तरह से संख्या में हम हालाँकि बहुत हैं, किंतु मसीह की देह में एक हैं और हम एक दूसरे के लिए एक दूसरे के सहभागी (अंग) हैं।

[6] मिलने वाली असीम कृपा (अनुग्रह) के कारण हमें अलग-अलग वरदान प्राप्त हैं। यदि भविष्यद्वाणी का दान है तो विश्‍वास के माप के अनुसार व्यक्‍ति भविष्यद्वाणी करे।

[7] यदि सेवा करने का है, तो वह सेवा में लगा रहे। यदि सिखाने का वरदान है, तो सिखाने में लगा रहे।

[8] जो प्रोत्साहन देता है वह लोगों की हिम्मत बढ़ाए, जो भेंट देता है, दिल खोलकर दे। जो अगुवाई करता है, वह गंभीरता से करे। जो करूणा दिखाता है, खुशी से करे।

[9] प्यार में दिखावा न हो। बुराई से नफ़रत करो। अच्छाई को पकड़े रहो।

[10] भाईचारे के प्यार से एक दूसरे के लिए समर्पित रहो। जहाँ आदर की बात है, अपने से अधिक दूसरों को सम्मान दो।

[11] अपने जोश में कम न होते जाओ, परन्तु आत्मा में लगन से यीशु की सेवा करते जाओ।

[12] आशा में खुश रहो, सताव में धीरज रखो, प्रार्थना में बने रहो।

[13] पवित्र लोगों की ज़रूरतों को पूरा करो, तथा आवभगत में आगे रहो।

[14] जो लोग तुम्हें सताते हैं, उन्हें आशीर्वाद दो; शाप नहीं लेकिन आशीर्वाद दो।

[15] जो लोग खुश हैं उनके साथ खुश हो, जो रोते हैं, उनके साथ विलाप करो।

[16] एक दूसरे के साथ समान विचार रखो। अपने को दूसरों से अधिक अच्छा मत समझो, किन्तु छोटे तबके के लोगों के साथ भी मेल-जोल बनाए रखो। ऐसा मत समझो, कि तुम ही बहुत बुद्धिमान हो।

[17] किसी के बुरा करने पर उससे बदला मत लो। सब लोगों की निगाह में जो उत्तम है, उसी को महत्व दो।

[18] जहाँ तक हो सके यदि संभव है, प्रत्येक के साथ शान्ति से रहो।

[19] प्यारे दोस्तो, बदला मत लेना, लेकिन यह काम परमेश्‍वर को सौंप दो। क्योंकि प्रभु की कही यह बात लिखी है, "बदला लेना मेरा काम है, मैं चुकता करूँगा।"

[20] इसलिए "यदि तुम्हारा दुश्मन भूखा है, उसे खाना खिलाओ, यदि वह प्यासा है, उसे पीने के लिए कुछ दो। ऐसा करने से तुम उसके सिर पर जलते कोयलों का ढेर रखोगे।"

[21] बुराई से मत हारो लेकिन भलाई से बुराई को जीत लो।

रोमियों — Chapters